एजेंसी, नई दिल्ली। Ebola Virus Alert : अफ्रीकी महाद्वीप के कुछ देशों में घातक इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने उच्च जोखिम वाले अफ्रीकी देशों से आने वाले या वहां से होकर गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक देशव्यापी स्वास्थ्य सलाह (हेल्थ एडवाइजरी) जारी की है। इस विशेष परामर्श में साफ कहा गया है कि यदि किसी यात्री में संक्रमण के थोड़े भी लक्षण दिखाई देते हैं, तो वह हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन (आव्रजन) जांच काउंटर पर जाने से पहले ही वहां मौजूद हवाई अड्डा स्वास्थ्य अधिकारियों को तुरंत इसकी लिखित या मौखिक सूचना दे। सरकार ने यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया है ताकि इस खतरनाक वायरस को भारतीय सीमा के भीतर प्रवेश करने से पूरी तरह रोका जा सके।
The Directorate General of Health Services (DGHS) has issued a health advisory for passengers arriving from or transiting through Ebola-affected countries, including DR Congo, Uganda, and South Sudan.
Travellers showing symptoms such as fever, vomiting, diarrhoea, bleeding, or… pic.twitter.com/RxQKPvN3bX
— Press Trust of India (@PTI_News) May 21, 2026
डब्ल्यूएचओ ने इन तीन अफ्रीकी देशों को माना उच्च जोखिम, हवाई अड्डों पर लगी विशेष गाइडलाइन
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की हालिया रिपोर्ट के बाद भारत सरकार ने विशेष रूप से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले हवाई यात्रियों पर कड़ी निगरानी रखना शुरू कर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने इन तीनों ही देशों को इबोला संक्रमण के मामले में ”उच्च जोखिम वाले देशों” की सबसे संवेदनशील श्रेणी में रखा है। इस आदेश के बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित देश के सभी प्रमुख विमानपत्तनों पर एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (एपीएचओ) ने विशेष दिशा-निर्देशों के होर्डिंग्स और डिजिटल बोर्ड प्रदर्शित कर दिए हैं। इन दिशा-निर्देशों के माध्यम से विदेश से आने वाले हर नागरिक को वायरस के खतरों और देश की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
बुखार, उल्टी और ब्लीडिंग जैसे लक्षणों पर रखें नजर, 21 दिनों तक सख्त निगरानी के निर्देश
हवाई अड्डा स्वास्थ्य संगठन (एपीएचओ) द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, इबोला वायरस से प्रभावित इलाकों से लौटने वाले यात्रियों को अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। यात्रियों को बुखार, अत्यधिक कमजोरी महसूस होना, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में असहनीय दर्द, उल्टी, दस्त, गले में तेज खराश और शरीर से बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होने जैसे गंभीर लक्षणों के प्रति हर समय सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। इसके अलावा, यदि कोई भी यात्री अनजाने में किसी इबोला संक्रमित मरीज या संदिग्ध व्यक्ति के सीधे संपर्क में आया है, तो उसके लिए भी एयरपोर्ट के हेल्थ डेस्क को रिपोर्ट करना अनिवार्य कर दिया गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावित देशों से भारत आगमन के 21 दिनों के भीतर अगर किसी भी व्यक्ति में ऐसे लक्षण उभरते हैं, तो उसे बिना कोई समय गंवाए तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सा सहायता लेनी होगी और डॉक्टरों को अपनी ट्रैवल हिस्ट्री (पुरानी यात्राओं) की पूरी सच जानकारी देनी होगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग, भारत में अब तक एक भी मामला नहीं
इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट के बीच देश की आंतरिक तैयारियों को मजबूत करने के लिए बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक अत्यंत उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस डिजिटल बैठक में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों ने हिस्सा लिया, जिसमें इबोला से निपटने के आइसोलेशन वार्ड, दवाओं और आपातकालीन उपायों का बारीकी से आकलन किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि वर्तमान में भारत के भीतर इबोला संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है और देश पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, डब्ल्यूएचओ द्वारा इबोला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पीएचईआईसी) घोषित किए जाने के बाद, भारत सरकार किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहती है, इसलिए पूरे देश के चिकित्सा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखकर निगरानी व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है।
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