एजेंसी, नई दिल्ली। DRDO Drone Missile Trial : भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ड्रोन से दागी जाने वाली अत्याधुनिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर लिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने यूएलपीजीएम-वी3 नाम की इस स्वदेशी मिसाइल का परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुर्नूल स्थित परीक्षण केंद्र में किया। यह मिसाइल हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के लक्ष्यों को बेहद सटीकता के साथ निशाना बना सकती है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह मिसाइल दुश्मन के हेलिकॉप्टर, ड्रोन और अन्य हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने के साथ-साथ जमीन पर मौजूद टैंक, बंकर और सैन्य वाहनों पर भी हमला करने में सक्षम है। इस परीक्षण को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
In a boost to India’s Atmanirbharta in Defence, Defence Research & Development Organisation (DRDO) successfully completed the final deliverable configuration development trials of Unmanned Aerial Vehicle Launched Precision Guided Missile (ULPGM)-V3 in Air-to-Ground and Air-to-Air… pic.twitter.com/57heEUwUGC
— ANI (@ANI) May 19, 2026
चलते लक्ष्य को भी कर सकती है तबाह
यूएलपीजीएम-वी3 को स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल के रूप में विकसित किया गया है। इसमें अत्याधुनिक सीकर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी मदद से यह लक्ष्य की पहचान कर उसे लॉक करती है और फिर सटीक हमला करती है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चलते हुए लक्ष्य को भी ट्रैक कर सकती है। यही वजह है कि इसे आधुनिक युद्ध के लिए बेहद प्रभावी हथियार माना जा रहा है।
टैंक से लेकर ड्रोन तक पर कर सकेगी हमला
डीआरडीओ के अनुसार इस मिसाइल को एंटी-टैंक भूमिका के लिए भी तैयार किया गया है। युद्ध के दौरान यह दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को निशाना बनाने में सक्षम होगी। इसके अलावा यह दुश्मन के ड्रोन और हेलिकॉप्टरों को हवा में ही मार गिरा सकती है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस मिसाइल का इस्तेमाल भविष्य में भारतीय सेना की ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता को और मजबूत करेगा। आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका को देखते हुए इसे बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
स्वदेशी तकनीक और भारतीय कंपनियों की बड़ी भूमिका
इस मिसाइल को डीआरडीओ के हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत की अगुआई में विकसित किया गया है। इसके साथ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी, टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी और हाई एनर्जी मटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी ने भी अहम भूमिका निभाई। मिसाइल के उत्पादन के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी की गई है। वहीं परीक्षण के दौरान इसे बेंगलुरु की न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज द्वारा तैयार किए गए मानवरहित विमान यानी यूएवी के साथ इस्तेमाल किया गया।
रक्षा मंत्री बोले- आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर डीआरडीओ और सभी वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीक के जरिए विकसित ऐसे हथियार भारत की सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती देंगे। रक्षा मंत्रालय ने भी कहा कि इस परियोजना के जरिए देश की घरेलू रक्षा आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हुई है और बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस प्रोजेक्ट में बड़ी संख्या में भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों ने भी योगदान दिया है।
भारत बना रहा अलग ड्रोन फोर्स
ड्रोन तकनीक के बढ़ते महत्व को देखते हुए भारत अब अलग ड्रोन फोर्स तैयार करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। हाल के वैश्विक संघर्षों और सैन्य अभियानों से मिले अनुभवों के बाद भारतीय सेना ने ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता को और मजबूत करने का फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक करीब 50 हजार सैन्यकर्मियों को ड्रोन संचालन और आधुनिक युद्ध तकनीकों की ट्रेनिंग दी जा रही है। अगले तीन वर्षों में 15 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जहां वर्चुअल रियलिटी और सिम्युलेटर तकनीक के जरिए जवानों को युद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आधुनिक युद्ध में भारत की बढ़ती ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि यूएलपीजीएम-वी3 जैसी मिसाइलें भारत की सैन्य ताकत को नई दिशा देंगी। दुनिया के कई देशों में ड्रोन आधारित युद्ध तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे समय में भारत की यह उपलब्धि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्वदेशी तकनीक पर आधारित इस मिसाइल के सफल परीक्षण से यह भी साफ हो गया है कि भारत अब आधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास में तेजी से आत्मनिर्भर बनता जा रहा है।
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