उग्र प्रदर्शन

नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर मजदूरों का उग्र प्रदर्शन : फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और वाहनों में आगजनी के बाद तनाव

उत्तर प्रदेश देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, नोएडा। नोएडा मजदूर प्रदर्शन : नोएडा मजदूर प्रदर्शनउत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों का आंदोलन सोमवार को हिंसक रूप ले चुका है। सड़कों पर उतरे कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर वाहनों में तोड़फोड़ की और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस हंगामे के कारण नोएडा और गाजियाबाद के बीच यातायात पूरी तरह ठप हो गया है और लंबी जाम की स्थिति बनी हुई है। औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित कंपनियों के भीतर इस आक्रामक रुख को देखकर डर का माहौल है।

वेतन बढ़ाने की मांग पर अड़े कर्मचारी

श्रमिक और कर्मचारी लंबे समय से अपनी तनख्वाह में बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। पिछले कुछ दिनों से जारी यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसा में बदल गया। बताया जा रहा है कि यह विरोध पहले गुरुग्राम से शुरू हुआ था और अब नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच गया है। गुरुग्राम में न्यूनतम वेतन बढ़ाए जाने के बाद अब नोएडा के कर्मचारी भी इसी तर्ज पर मजदूरी बढ़ाने की जिद पर अड़े हुए हैं।

फैक्ट्रियों के बाहर भारी हंगामा और पथराव

सोमवार को हालात उस समय बेकाबू हो गए जब प्रदर्शनकारियों के समूहों ने कंपनियों के बाहर खड़ी गाड़ियों को अपना निशाना बनाना शुरू किया। नोएडा सेक्टर 62 में स्थित मदरसन ग्रुप की फैक्ट्री के बाहर जबरदस्त बवाल हुआ। यहां प्रदर्शनकारियों ने न केवल वाहनों के शीशे तोड़े बल्कि कई गाड़ियों में आग भी लगा दी। जब पुलिस प्रशासन ने भीड़ को रोकने की कोशिश की, तो उन पर पथराव किया गया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस बल को आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा।

महंगाई के बीच कम वेतन से नाराजगी

आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का तर्क है कि इस बार उनके वेतन में महज ढाई सौ से तीन सौ रुपये की वृद्धि की गई है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में नाकाफी है। उनकी मांग है कि न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 18 से 20 हजार रुपये प्रति माह किया जाए। मजदूरों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें केवल 10 से 15 हजार रुपये ही मिल रहे हैं, जिससे परिवार का खर्च चलाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को भी रोजाना 700 रुपये तक मिल जाते हैं, जो महीने के 21 हजार रुपये होते हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और सुलह की कोशिश

शहर में बिगड़े हालातों को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना है। संवेदनशील जगहों पर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों और कानून हाथ में लेने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट इस मामले में कंपनियों के प्रबंधकों के साथ बैठकें कर रही हैं ताकि बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकाला जा सके। हालांकि, कर्मचारी अब भी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

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