एजेंसी, वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी दौरे के दूसरे दिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक बेहद सरल और सहज अंदाज देखने को मिला। शनिवार की सुबह मुख्यमंत्री अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ शहर की मशहूर ‘राम भंडार’ की दुकान पर पहुंचे। वहां उन्होंने बड़े ही आत्मीय भाव से दुकानदार से पूछा, “क्या खिलाओगे?” मुख्यमंत्री का यह अपनापन देखकर दुकानदार भी मुस्कुरा उठा।
इसके बाद डॉ. मोहन यादव ने कचौड़ी-सब्जी और लस्सी का ऑर्डर दिया और किसी विशेष प्रोटोकॉल के बजाय वहां मौजूद आम लोगों के बीच बैठकर ही नाश्ते का आनंद लिया। नाश्ता करने के बाद उन्होंने खुद अपने हाथ से दुकानदार को बिल के पैसे दिए। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखा गया। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने सभी से अपील की कि वे काशी में आयोजित ‘विक्रमादित्य महानाट्य’ को देखने जरूर जाएं।
डॉ. मोहन यादव ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह बाबा विश्वनाथ की ही विशेष कृपा है कि उन्हें मात्र सात दिनों के भीतर दो बार काशी आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा की सराहना की और विक्रमादित्य पर आधारित महानाट्य को एक अद्भुत और गौरवशाली प्रस्तुति बताया।
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इससे पहले 3 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त रूप से ‘विक्रमोत्सव 2026’ के तहत इस महानाट्य का शुभारंभ किया था। इस खास मौके पर डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री योगी को एक ‘वैदिक घड़ी’ भी भेंट स्वरूप प्रदान की। उन्होंने अपने संबोधन में भगवान श्रीकृष्ण-बलराम और महाराज भर्तृहरि-विक्रमादित्य की जोड़ियों का उदाहरण देते हुए भाइयों के आदर्श संबंधों पर प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने बताया कि महाराज भर्तृहरि का नाथ संप्रदाय में विशेष स्थान है, जिनकी दीक्षा उज्जैन में हुई थी और साधना के लिए उन्होंने काशी के पास चुनार के किले को चुना था। उन्होंने यह भी साझा किया कि जब इस नाटक के मंचन का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के पास आया, तो उन्होंने सबसे पहले इसे बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में आयोजित करने का सुझाव दिया था। डॉ. मोहन यादव ने गर्व के साथ बताया कि इस नाटक में अभिनय करने वाले कलाकार पेशे से डॉक्टर और इंजीनियर हैं, जो महाराज विक्रमादित्य के इतिहास को जीवंत करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से दोनों राज्यों के सांस्कृतिक और प्राकृतिक संबंध और भी मजबूत हो रहे हैं।


