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एलपीजी संकट पर सरकार का बड़ा बयान : ‘पैनिक बुकिंग’ न करें उपभोक्ता, आपूर्ति बहाल करने के लिए रिफाइनरियों को मिले सख्त निर्देश

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने से भारत में एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस स्थिति पर सरकार ने बुधवार को महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए देशवासियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी प्रभावित मार्ग से आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन सरकार स्थिति को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है।

रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाने पर जोर आपूर्ति में आई कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने 8 मार्च को ही सभी रिफाइनरियों को एलपीजी का उत्पादन अधिकतम स्तर पर ले जाने के निर्देश दिए हैं। सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी करना है। कमर्शियल गैस के मामले में भी अस्पतालों और स्कूलों जैसे जरूरी संस्थानों को वरीयता दी जा रही है। कीमतों को लेकर सुजाता शर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागत बढ़ने के बावजूद सरकार बड़ा बोझ खुद वहन कर रही है, ताकि आम आदमी पर इसका सीधा असर न पड़े। दिल्ली में फिलहाल घरेलू सिलेंडर 913 रुपये में मिल रहा है, जिसमें हालिया 60 रुपये की बढ़ोतरी शामिल है। शिकायतों के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति कमर्शियल उपभोक्ताओं, जैसे होटल और रेस्तरां संचालकों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशकों की एक विशेष तीन सदस्यीय समिति गठित की है।

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यह समिति व्यावसायिक जरूरतों का आकलन करेगी और वास्तविक मांग के आधार पर गैस वितरण सुनिश्चित करेगी। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि गैस की कालाबाजारी या अनावश्यक स्टॉकिंग करने वालों पर नजर रखी जा रही है। ईंधन बचाने और संयम बरतने की अपील सरकार ने जनता से आग्रह किया है कि वे जरूरत से ज्यादा गैस सिलेंडर बुक न करें। वर्तमान में बुकिंग के बाद 25 दिनों के भीतर डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है। संयुक्त सचिव ने लोगों से अपील की कि वे ऊर्जा का संचय करें और जहां संभव हो ईंधन की बचत करें। संकट की मुख्य वजह यह पूरा संकट 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है। 1970 के दशक के बाद इसे सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट माना जा रहा है, जिसका असर भारत सहित दुनिया के कई देशों पर पड़ रहा है।

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