एजेंसी, काठमांडू/दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को पड़ोसी देश नेपाल में शांतिपूर्ण और सफल आम चुनावों के आयोजन के लिए वहां की जनता और सरकार की जमकर सराहना की है। पीएम मोदी ने इस चुनाव परिणाम को नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा का एक गर्व भरा अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि एक घनिष्ठ मित्र होने के नाते भारत, नेपाल के लोगों और वहां बनने वाली नई सरकार के साथ मिलकर प्रगति और समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर खुशी जताते हुए कहा कि नेपाली भाई-बहनों को अपने मताधिकार का इतने उत्साह से इस्तेमाल करते देखना सुखद है।
नेपाल चुनाव में बड़ा उलटफेर: बालेन शाह बने ‘किंगमेकर’, पुरानी पार्टियों का किला ढहा
नेपाल के राजनीतिक इतिहास में इस बार सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। मशहूर रैपर और इंजीनियर से राजनेता बने बालेंद्र शाह (बालेन शाह) की ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (आरएसपी) भारी जीत की ओर बढ़ रही है। इस चुनावी लहर ने नेपाल के दशकों पुराने स्थापित राजनीतिक दलों के दबदबे को पूरी तरह खत्म कर दिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बालेन शाह की पार्टी आरएसपी ने कई सीटों पर जीत हासिल कर ली है और दर्जनों अन्य सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिससे इसके सबसे बड़े दल के रूप में उभरने की पूरी संभावना है। भारत इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत हमेशा से नेपाल में स्थिरता और विकास का समर्थक रहा है। चुनाव के सफल आयोजन के लिए भारत ने नेपाल सरकार के अनुरोध पर जरूरी साजो-सामान की मदद भी मुहैया कराई थी। वर्तमान नतीजों में पुरानी दिग्गज पार्टियां जैसे नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट दल, बालेन शाह की पार्टी के मुकाबले काफी पिछड़ गए हैं।
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क्यों बदला नेपाल का सियासी मिजाज?
नेपाल में इस क्रांतिकारी बदलाव की मुख्य वजह पिछले साल हुए ‘जेन जेड’ (नौजवान पीढ़ी) के हिंसक विरोध प्रदर्शनों को माना जा रहा है। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और पुराने चेहरों से तंग आकर युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सत्ता परिवर्तन की मांग की थी, जिसके कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद राष्ट्रपति ने संसद भंग कर कार्यवाहक सरकार नियुक्त की थी। अब 35 वर्षीय बालेन शाह नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। जनता का यह फैसला पुराने नेताओं के प्रति उनके गुस्से और बदलाव की चाहत को दर्शाता है। पिछले 18 वर्षों में 14 सरकारें देख चुके नेपाल के लिए यह चुनाव एक नई शुरुआत की उम्मीद लेकर आया है। लगभग 1.89 करोड़ मतदाताओं वाले इस देश में इस बार करीब 60 प्रतिशत लोगों ने अपने भविष्य के लिए मतदान किया।


