एजेंसी, बालाघाट। पाकिस्तान की जेल में बंद पिछले 14 साल से बंद से भारतीय नागरिक मूल रूप से मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के अंतर्गत आने वाले वारासिवनी के खैरलांजी गांव में रहने वाले 38 वर्षीय प्रसन्नजीत रंगारी आजाद हो गए है। बी-फार्मेसी की पढ़ाई के बाद मानसिक संतुलन बिगड़ने से वो भटकते हुए सीमा पार चले गए थे। उसकी बहन संघमित्रा खोबरागढ़े के अथक प्रयास के बाद ये सफलता मिली है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य इंजी. विक्रम के.डी देशमुख समेत अन्य ने भी सहयोग किया था। परिजन और अन्य उसको लेने के लिए अमृतसर रवाना हो गए हैं। बताया जा रहा है कि, 31 जनवरी 2026 को पाकिस्तान ने सात भारतियों को रिहा किया है। उसमें एमपी के प्रसन्नजीत भी शामिल हैं।
पढ़ाई में तेज था, अचानक मानसिक संतुलन बिगड़ा और पहुंच गया पाकिस्तान
प्रसन्नजीत पढ़ाई में बहुत तेज था। कर्ज लेकर उसके पिता लोपचंद ने पढ़ने के लिए जबलपुर के गुरू रामदास खालसा इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी से बी-फार्मेसी करने भेजा था। साल 2011 में उसने पढ़ाई पूरी कर एमपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन कराया। इसके बाद वो आगे की पढ़ाई भी करना चाहता था। इसपर उसे दोबारा पढ़ने भेजा गया, लेकिन मानसिक स्थिति खराब होने से वो पढ़ाई छोड़कर घर आ गया। इसके बाद घर से भाग गया। 8 माह बाद बिहार से लौटकर आया और बहन संघमित्रा के घर रहने लगा। यहां से एक बार फिर वो भाग गय, लेकिन, इस बार जब उसकी खबर लगी तो वो पाकिस्तान की जेल में बंद था।
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2021 में पाकिस्तान से आई खबर
पाकिस्तान के लाहौर जेल से साल 2021 में जम्मू कश्मीर के कटवा में रहने वाले कुलदीप रिहा होकर प्रसन्नजीत के पाकिस्तान जेल में होने की जानकारी दी। कुलदीप के एक फोन काल ने प्रसन्नजीत के परिवार को उसके जीवित होने का जहां प्रमाण दिया, वहीं परिजन में खासकर उसकी बहन संघमित्रा खोबरागड़े में प्रसन्नजीत को वापस वतन लाने की एक उम्मीद जागी। उसने शासन-प्रशासन को कई बार आवेदन किए और आखिरकार, संघमित्रा का अपने छोटे भाई को सकुशल घर लाने का सपना सच हो गया। पाकिस्तान से रिहा होने के बाद प्रसन्नजीत पंजाब के अमृतसर स्थित रेडक्रास भवन के मंजीठा थाना पहुंच चुके हैं। उन्हें लाने उनकी बहन आज वहां पहुंच रही हैं।


