एजेंसी, नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को नई दिल्ली में ‘नक्सल मुक्त भारत’ मोदी के नेतृत्व में लाल आतंक को समाप्त करने का दृढ़ संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि मैं फिर कह रहा हूं कि 31 मार्च 2026 तक इस देश से हथियारी नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। अमित शाह ने कहा कि मैंने बयान दिया था कि 31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा, लेकिन सवाल ये है कि इस देश में नक्सलवादी समस्या क्यों पनपी, क्यों बढ़ी, क्यों विकसित हुई, इसका वैचारिक पोषण किसने किया? और जब तक भारत का समाज इस सिद्धांत का, नक्सलवाद के विचार का वैचारिक पोषण, लीगल समर्थन और वित्तीय पोषण करने वाले समाज में बैठे हुए लोगों को समझ नहीं लेता है और उन लोगों को हम वापस नहीं लाते हैं तब तक नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई समाप्त नहीं होगी। हमें इस विचार के आगे बहुत कुछ करने की जरूरत होगी।
हम किसी को मारना नहीं चाहते लेकिन…
अमित शाह ने नक्सलाइट को चेतावनी देते हुए कहा ”आज भी मैं कहना चाहता हूं कि हथियार छोड़ दीजिए, हम किसी को भी मारना नहीं चाहते हैं”। मगर हथियार लेकर निर्दोष आदिवासियों को मारना चाहते हैं तो मेरी सरकार का धर्म है इनको बचाना। 2014 में 126 नक्सलाइट जिले थे, अब सिर्फ 18 नक्सलाइट जिले ही बचे हैं। मोस्ट इफेक्टेड जिले की अगल कैटेगरी होती है, वो 36 थे, जो अब सिर्फ 6 बचे हैं। ये बताता है कि इनका क्षेत्र कितना सिकुड़ गया।
31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा
अमित शाह ने कहा कि मैं विश्वास के साथ सकता हूं कि 31 मार्च 2026 तक इस देश से हथियारी नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा। 2025 में सुरक्षा बलों ने अब तक 270 नक्सलियों को ढेर किया। अगर ये लोग हथियार नहीं छोड़ेंगे तो आगे भी हमें एक्शन लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
देश तीन मुख्य आंतरिक सुरक्षा हॉटस्पॉट से जूझ रहा था
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने तो देश तीन मुख्य आंतरिक सुरक्षा हॉटस्पॉट से जूझ रहा था- जम्मू-कश्मीर क्षेत्र, नॉर्थ-ईस्ट और वामपंथी उग्रवाद वाला इलाका। ये इलाके लगभग चार-पांच दशकों से अशांति का कारण बने हुए थे, जिनमें हजारों लोगों की जान गई और शांति व स्थिरता भंग हुई। इसके अलावा, भारत के बजट का एक बड़ा हिस्सा, जो गरीबों की भलाई पर खर्च किया जा सकता था, इन इलाकों में पैदा हुई चुनौतियों से निपटने में लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि मोदी के सत्ता में आने के बाद सर कार ने इन हॉटस्पॉट को मुख्य प्राथमिकता के तौर पर पहचाना और इन इलाकों की समस्याओं को हल करने के लिए एक लंबी अवधि की, अच्छी तरह से परिभाषित रणनीति लागू की।
अमित शाह ने बताया- नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र में क्राइम कंट्रोल कैसे हुआ
अमित शाह ने आगे कहा कि एक समय भारत के बाकी हिस्सों से अलग-थलग माना जाने वाला नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र अब कई तरह के परिवहन साधनों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आज उत्तर-पूर्व ट्रेन से जुड़ा, रेलवे से जुड़ा, वाटरवेज से जुड़ा। साथ ही साथ आज दिल्ली और नॉर्थ-ईस्ट के बीच में दिलों की दूरी भी दूर करने का काम हमारी सरकार ने किया। आज नॉर्थ-ईस्ट विकास और शांति के राह पर बढ़ रहा है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर से धारा 370 समाप्त कर उसे विकास के रास्ते पर लाने का काम हुआ। उन्होंने आगे कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में सुरक्षा कर्मियों की मृत्यु में 2004-2014 की तुलना में 2014-2024 में 70 प्रतिशत की कमी आई है। 2004-2014 की तुलना में 2014-2024 में नागरिकों की मृत्यु में 85 प्रतिशत की कमी आई है। 12 महत्वपूर्ण शांति समझौते करके देश के दुश्मनों द्वारा हाथ में सप्लाई किए हुए ऑटोमेटिक हथियार लेकर घूमने वाले 10,500 युवाओं को सरेंडर कराकर मेनस्ट्रीम में लाने का काम भाजपा की सरकार ने किया।
अनुच्छेद 370 का प्रभाव दिख रहा है: अमित शाह
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाया गया। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के विरुद्ध एक सुनियोजित नीति के तहत काम किया गया। मैं इसके परिणाम साझा करना चाहता हूं… सुरक्षाकर्मियों की मृत्यु में 65% और नागरिकों की मृत्यु में 77% की कमी आई है। आज वहां हर कानून लागू है। आजादी के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव हुए। एक समय वहाँ से सांसद 10,000 वोटों से चुने जाते थे क्योंकि चुनावों का बहिष्कार होता था। ज़िला और तालुका पंचायत अध्यक्ष चुनावों में 99.8% मतदान हुआ।


