खेल जगत में नए शिखर बना रहा खेलो एमपी यूथ गेम्म : ध्य प्रदेश की धरती आज उत्साह, ऊर्जा और संकल्प की एक नई गाथा लिख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा ओलंपिक की तर्ज पर ‘खेलो एमपी यूथ गेम्स 2026’ का शंखनाद करना न केवल राज्य के खेल इतिहास में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह प्रदेश के युवाओं के सपनों को उड़ान देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम भी है। राजधानी भोपाल में जब मुख्यमंत्री ने इस भव्य आयोजन के लोगो, टी-शर्ट, टॉर्च, एंथेम और मैस्कॉट का अनावरण किया, तो वह दृश्य केवल एक सरकारी औपचारिकता मात्र नहीं था, बल्कि वह मध्य प्रदेश को देश के ‘स्पोर्ट्स हब’ के रूप में स्थापित करने की एक दृढ़ घोषणा थी। मुख्यमंत्री का यह कहना कि मध्य प्रदेश अब खेलों का केंद्र बन चुका है, धरातल पर दिख रहे उन प्रयासों का प्रतिबिंब है, जहां वर्तमान में 11 अत्याधुनिक खेल अकादमियां युवाओं की प्रतिभा को निखारने का कार्य कर रही हैं। डॉ. यादव का दिया हुआ मंत्र “मध्यप्रदेश की जय और हम सब की विजय” इस आयोजन की आत्मा को दर्शाता है। यह नारा हमें यह सीख देता है कि जब समाज के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर श्रेष्ठता प्राप्त करने का सामूहिक प्रयास किया जाता है, तो समग्र विजय सुनिश्चित हो जाती है। यह आयोजन 13 जनवरी से 31 जनवरी तक चलने वाला एक ऐसा महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश के 10 संभागों से आए लगभग 1.50 लाख खिलाड़ी अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। इतनी विशाल संख्या में खिलाड़ियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि मध्य प्रदेश का युवा अब केवल दर्शक दीर्घा में बैठने के लिए नहीं, बल्कि मैदान पर उतरकर अपनी पहचान बनाने के लिए आतुर है।
खेलो एमपी यूथ गेम्स की सबसे बड़ी विशेषता इसकी त्रिस्तरीय और चार स्तरीय संरचना है, जो जमीनी स्तर से प्रतिभा को खोजने का काम करेगी। ब्लॉक स्तर से शुरू होकर जिला, संभाग और फिर राज्य स्तर तक पहुंचने की यह प्रक्रिया पारदर्शी भी है और समावेशी भी। अक्सर ग्रामीण अंचलों की प्रतिभाएं मंच के अभाव में दम तोड़ देती हैं, लेकिन इस प्रतियोगिता के माध्यम से ब्लॉक स्तर के खिलाड़ियों को भी अपनी चमक बिखेरने का समान अवसर मिलेगा। ब्लॉक स्तर की प्रतियोगिताएं 13 से 16 जनवरी तक, जिला स्तरीय 16 से 20 जनवरी तक, संभाग स्तरीय 21 से 25 जनवरी तक और अंतिम राज्य स्तरीय चरण 28 से 31 जनवरी तक आयोजित होना यह सुनिश्चित करता है कि प्रदेश का कोना-कोना इस खेल उत्सव से जुड़ा रहे। खेलों का वर्गीकरण भी अत्यंत सूझबूझ के साथ किया गया है। हॉकी, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स और मल्लखम्ब जैसे 11 खेलों को तीन चरणों में रखा गया है, जबकि फुटबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन और कबड्डी जैसे लोकप्रिय 10 खेलों को चार चरणों में आयोजित कर जन-जन तक खेलों की पहुंच बढ़ाई गई है। इसके अलावा, आर्चरी, शूटिंग और फैंसिंग जैसे तकनीकी रूप से उन्नत खेलों को सीधे राज्य स्तर पर आयोजित करना प्रशासनिक दक्षता का परिचय देता है।
पुरस्कारों की घोषणा केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह खिलाड़ियों के पसीने और परिश्रम का सम्मान है। राज्य स्तर पर विजेताओं के लिए लगभग 4 करोड़ रुपये की कुल पुरस्कार राशि आवंटित करना यह स्पष्ट करता है कि सरकार खिलाड़ियों के भविष्य के प्रति गंभीर है। प्रथम पुरस्कार के रूप में 31 हजार रुपये, द्वितीय के लिए 21 हजार और तृतीय के लिए 11 हजार रुपये की राशि युवाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें खेलों को करियर के रूप में चुनने की प्रेरणा देगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस आयोजन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राज्य टीम के चयन में प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे मध्य प्रदेश की भविष्य की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टीमों का आधार तैयार होगा। मध्य प्रदेश की भौगोलिक विविधता का लाभ उठाते हुए इन खेलों के लिए भोपाल, इंदौर, शिवपुरी, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, नर्मदापुरम और सागर जैसे विभिन्न शहरों का चयन किया गया है। यह विकेंद्रीकरण न केवल बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करता है। भोपाल की झीलों में कयाकिंग-कैनोइंग और रोइंग का रोमांच, उज्जैन में पारंपरिक मल्लखम्ब और कुश्ती का दम, ग्वालियर में हॉकी की विरासत और इंदौर में वेटलिफ्टिंग व टेबल टेनिस की चपलता का संगम मध्य प्रदेश की बहुआयामी खेल क्षमता को उजागर करता है।
शिवपुरी में महिला क्रिकेट और ग्वालियर में महिला हॉकी का आयोजन महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त संदेश है। खेल के मैदान में बेटियों की यह भागीदारी समाज की रूढ़िवादी सोच को तोड़ने का काम करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और खेल मंत्री विश्वास सारंग का विजन केवल पदक जीतना नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, अनुशासित और ऊर्जावान युवा पीढ़ी का निर्माण करना है। खेल व्यक्ति को हार सहना और जीत को शालीनता से स्वीकार करना सिखाते हैं। वे टीम भावना और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं। खेलो एमपी यूथ गेम्स के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार युवाओं को नशे और नकारात्मकता से दूर कर मैदान की धूल और पसीने से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रही है। जब 1.50 लाख युवा एक साथ मैदान पर उतरेंगे, तो वह केवल एक मैच नहीं होगा, वह एक नए मध्य प्रदेश के निर्माण का संकल्प होगा। यह आयोजन प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए ‘गेटवे ऑफ ओलंपिक’ साबित हो सकता है। आज जो खिलाड़ी ब्लॉक स्तर पर संघर्ष कर रहा है, वही कल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराने का सामर्थ्य रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का नेतृत्व और उनकी खेल-समर्थक नीतियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि प्रदेश का कोई भी होनहार खिलाड़ी संसाधनों के अभाव में पीछे न छूटे। मध्य प्रदेश अब केवल विकास दर या औद्योगिक उन्नति में ही आगे नहीं है, बल्कि वह खेल के मैदानों पर भी अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह आयोजन राज्य के लिए एक उत्सव है, एक चुनौती है और एक उज्जवल भविष्य का वादा है। खेलो एमपी यूथ गेम्स 2026 की यह मशाल केवल मैदानों को नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों को भी रोशन करेगी। आगामी दिनों में जब प्रदेश के अलग-अलग कोनों से जीत की गूंज सुनाई देगी, तो वह गूंज वास्तव में एक आत्मनिर्भर और अग्रणी मध्य प्रदेश की गूंज होगी। इस आयोजन की सफलता इस बात में निहित है कि यह हर युवा के मन में यह विश्वास पैदा कर रहा है कि यदि आपके पास प्रतिभा है, तो मध्य प्रदेश सरकार आपके साथ खड़ी है। निश्चित रूप से, खेलो एमपी यूथ गेम्स का यह संकल्प प्रदेश को खेल जगत के मानचित्र पर एक नए शिखर पर ले जाएगा और आने वाले समय में यहाँ से निकलने वाले सितारे पूरी दुनिया में मध्य प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।
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