भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित सरपंच महासम्मेलन केवल एक सरकारी आयोजन नहीं था, यह मुख्यमंत्री मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और जमीनी स्तर के लोकतंत्र यानी पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने के उनके अटूट संकल्प का एक ऐतिहासिक मंच था। मुख्यमंत्री ने इस मंच से जो प्रशासनिक कसावट दिखाई और जो दूरगामी आर्थिक घोषणाएँ कीं, वे स्पष्ट संकेत देते हैं कि उनकी सरकार मध्यप्रदेश को विकास के एक नए युग में ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में प्रशासनिक सुस्ती और लापरवाही के प्रति शून्य-सहनशीलता की नीति स्पष्ट कर दी। उन्होंने अधिकारियों को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि “काम न करने वाले सचिवों को हटा दिया जाएगा।” यह केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि जवाबदेही स्थापित करने का एक कड़ा और आवश्यक कदम है। यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री के लिए जनहित के कार्य सर्वोच्च हैं और नौकरशाही को अब जनता के प्रति अधिक संवेदनशील और सक्रिय होना होगा। यह निर्णय सुशासन की दिशा में एक मजबूत संकेत है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि विकास योजनाएं बिना किसी बाधा के ग्रामीण स्तर तक पहुँचें। इस महासम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सरपंचों की ‘ग्राम शक्ति’ को मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया सम्मान था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “आपको जो पावर हैं वो पावर तो बडे़-बडे़ पद वालों को भी नहीं हैं। एक सरपंच जो कर सकता है वो कोई नहीं कर सकता।” यह बयान केवल प्रशंसा नहीं है, बल्कि यह त्रि-स्तरीय शासन प्रणाली में ग्राम पंचायत की केंद्रीय भूमिका को पुनर्स्थापित करता है। मुख्यमंत्री ने सरपंचों को यह भरोसा भी दिलाया कि यदि उनके मामलों में कोई सरकारी निर्णय कठिनाई पैदा करता है, तो उसे ठीक करने का काम सरकार का है। यह सहयोगात्मक शासन का मॉडल है, जो ग्राम पंचायत और राज्य सरकार के बीच एक सेतु का काम करेगा, जिससे ग्रामीण समस्याओं का समाधान त्वरित और प्रभावी तरीके से हो सकेगा। सरपंचों को यह महसूस कराना कि वे प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदलने वाले असली नायक हैं, नेतृत्व की एक बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा कि 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा, प्रदेश के आर्थिक भविष्य के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह घोषणा दर्शाती है कि मुख्यमंत्री प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मूल जड़ों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर, उन्होंने कृषि आधारित उद्योगों को स्थापित कर लोगों को रोजगार देने की बात कही। यह एक संपूर्ण ग्रामीण आर्थिक मॉडल है। ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना। यह रणनीति कृषि को एक आकर्षक और लाभकारी उद्यम बनाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिलेगी और प्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने जिस संवेदनशीलता के साथ दिल्ली ब्लास्ट के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपनी बात रखी, वह उनके राष्ट्रवादी दृष्टिकोण को उजागर करती है। उन्होंने कहा, “हमें कल की घटना को भूलना नहीं है।” और साथ ही यह दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि हमारे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर हमें भरोसा है कि “जो भी होंगे सब ठिकाने लगेंगे।” यह बयान राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह प्रदेश के मुखिया के तौर पर उनकी राष्ट्रीय चेतना और सुरक्षा को लेकर उनकी सजगता को प्रमाणित करता हहै । सुशासन का नया अध्याय मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह महा सम्मेलन जन-केंद्रित सुशासन का एक नया अध्याय लिखता है। सरपंचों को शक्ति देना, प्रशासन में पारदर्शिता और कठोरता लाना, तथा कृषि को आर्थिक क्रांति का आधार बनाना—ये सभी कदम एक ऐसे निर्णायक और दूरदर्शी नेता की पहचान हैं जो केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि परिणाम देने में विश्वास रखते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में, मध्यप्रदेश अब ‘ग्राम शक्ति’ के बल पर विकास और समृद्धि के एक नए शिखर को छूने के लिए तैयार है।


