ISRO ने GSLV-F-12 से नेविगेशन सेटेलाइट NVS-01 लांच किया, अंतरिक्ष से अब सब पर होगी नजर

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श्रीहरिकोटा| भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में जीएसएलवी-एफ-12 से NVS-01 नेविगेशन सेटेलाइट लांच किया। जीएसएलवी की यह 15वीं उड़ान है। ये सेटेलाइट उन 5 सेकेंड जनरेशन सेटेलाइट्स का हिस्सा है जिसे आने वाले दिनों में लांच किया जाएगा। इस नाविक NVS-01 नेविगेशन सेटेलाइट से सशस्त्र बलों को काफी मदद मिलेगी। भारतीय सेना की शाक्ति बढ़ जाएगी। यह नया सेटेलाइट IRNSS-1G की जगह स्थापति होगा। नाविक NVS-01 नेविगेशन सेटेलाइट से संचार में शोध करने में भी मदद मिलेगी। NVS-01 नेविगेशन सेटेलाइट जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल (जीएसएलवी-एफ-12) की मदद से स्थापित किया गया है। इसका वजन लगभग 2232 किलोग्राम है।

1999 में कारगिल वॉर के दौरान भारत सरकार ने घुसपैठ करने वाले पाकिस्तानी सैनिकों की पोजीशन जानने के लिए अमेरिका से मदद मांगी थी। तब अमेरिका ने जीपीएस सपोर्ट देने से मना कर दिया था। इसके बाद से ही भारत अपना नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम बनाने में जुट गया था। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लांच पैड से सुबह 10:42 बजे जीएसएलवी ने उड़ान भरी। लांच के करीब 18 मिनट बाद रॉकेट से पेलोड अलग हो जाएगा। इसने एनवीएस-1 सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में डिप्लॉय किया गया। इसके बाद इंजीनियरों ने सेटेलाइट को सही ऑर्बिट में प्लेस करने के लिए ऑर्बिट-रेजिंग मैनुवर परफॉर्म किए गए। NVS-01 इंडियन कॉन्स्टेलशन सर्विस (NavIC) के साथ नेविगेशन के लिए दूसरी जनरेशन की अपने तरह की पहली संटेलाइट है। 2,232 किग्रा वजन की इस सेटेलाइट में स्वदेशी एटॉमिक घड़ी लगाई गई है। ये घड़ी ऑर्बिट रेजिंग प्रोसीजर को और भी बेहतर और बारीकी से बता सकेगी। साथ ही यह भारत और इसके आसपास के क्षेत्रों में यूजर्स को स्थिति, वेलोसिटी और समय की जानकारी देगी।

जोमैटो और स्विगी जैसे फूड डिलीवरी और ओला-उबर जैसी सर्विसेज नेविगेशन के लिए जीपीएस का इस्तेमाल करती हैं। NavIC इन कंपनियों के लिए नेविगेशन सब्सक्रिप्शन कॉस्ट को कम कर सकता है और एक्यूरेसी बढ़ा सकता है। NavIC से अमेरिका के जीपीएस पर निर्भरता कम होगी और इंटरनेशनल बॉर्डर सिक्योरिटी ज्यादा बेहतर होगी। चक्रवातों के दौरान मछुआरों, पुलिस, सेना और हवाई/जल परिवहन को बेहतर नेविगेशन सिक्योरिटी मिलेगी। NavIC टेक्नोलॉजी ट्रैवल और टूरिज्म इंडस्ट्री को मदद कर सकती है। इसके जरिेए टूर को ज्यादा इनफॉर्मेटिव और इंटरैक्टिव बनाकर गेस्ट का एक्सपीरियंस और ज्यादा बेहतर बनाया जा सकता है। आम लोग लोकेशन के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

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