मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की हालिया हैदराबाद यात्रा और वहां आयोजित ‘इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम की सफलता ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में एक नए अध्याय की शुरुआत की है। यह सिर्फ एक सरकारी आयोजन नहीं था, बल्कि यह मुख्यमंत्री और उनकी दूरदर्शी भाजपा सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसके मूल में राज्य के विकास और जनता के लिए रोजगार सृजन की भावना निहित है। जिस तरह से दक्षिण भारत, विशेषकर हैदराबाद के निवेशकों ने मध्यप्रदेश में पैसा लगाने के लिए बेकरारी दिखाई है, वह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस पूरी घटना में डॉ. यादव और उनकी सरकार नायक बनकर उभरे हैं, जिन्होंने अपनी नीतियों और व्यक्तिगत संवाद से निवेशकों का विश्वास जीता है।
हैदराबाद में मिला 36,600 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश प्रस्ताव, जिससे करीब 27,800 रोजगार सृजित होने की संभावना है, यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश अब सिर्फ कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा, बल्कि यह देश के प्रमुख औद्योगिक गंतव्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिस गर्मजोशी और खुलेपन के साथ उद्योगपतियों को संबोधित किया, वह प्रेरणादायक है। उन्होंने पन्ना के हीरे और हैदराबाद के मोतियों का ज़िक्र करते हुए दोनों राज्यों की साझेदारी को ‘हीरा-मोती की जोड़ी’ बताया। यह केवल एक अलंकारिक भाषा नहीं थी, बल्कि यह मध्यप्रदेश सरकार के मन में दक्षिण के निवेशकों के प्रति मौजूद गहरे सम्मान और उनकी महत्ता को दर्शाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात डॉ. यादव का यह आश्वासन था कि “जरूरी हुआ तो इन नीतियों की परिधि के बाहर जाकर भी उद्योगपतियों को हरसंभव सहयोग देंगे।” यह एक ऐसा साहसिक और अभूतपूर्व वक्तव्य है जो नौकरशाही की पुरानी बंदिशों को तोड़ता है और व्यवसाय करने में आसानी की भावना को चरितार्थ करता है। यह वचन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री की उस दृढ़ इच्छाशक्ति को दिखाता है जो राज्य के हित में बड़े और त्वरित निर्णय लेने को तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिन 18 निवेश नीतियों का उल्लेख किया, वे राज्य सरकार की दूरदर्शिता का प्रमाण हैं। ये नीतियां केवल कागजी दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि ये एक ऐसा गतिशील ढांचा प्रदान करती हैं जो निवेशकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप है। विविध क्षेत्रों में मिले निवेश प्रस्ताव यह साबित करते हैं कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था बहुआयामी विकास के लिए तैयार है। ग्रीनको ग्रुप के प्रेसिडेंट महेश कोली का अनुभव एक सशक्त ‘सक्सेस स्टोरी’ है। कंपनी ने पिछले दस सालों में 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया और अब अगले 5 सालों में 25,000 करोड़ रुपये के और निवेश की योजना बना रही है। यह महज एक कंपनी नहीं, बल्कि यह ‘ब्रांड मध्यप्रदेश’ पर विश्वास का एक जीता-जागता उदाहरण है। मुख्यमंत्री द्वारा ग्रीनको के कॉर्पोरेट हेडक्वार्टर का दौरा करना यह दिखाता है कि वह केवल कागजों पर हस्ताक्षर करने में विश्वास नहीं रखते, बल्कि वह निवेश की सफलता को अपनी आंखों से देखना और समझना चाहते हैं।


