सीएम मोहन द्वारा एमपी के स्वर्णिम विकास का प्रभाव बिहार में

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​बिहार विधानसभा चुनाव के रण में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बिहार दौरा, और बगहा, सिकटा तथा सहरसा में एनडीए प्रत्याशियों के समर्थन में उनके प्रखर उद्बोधन, केवल चुनावी सभाएं नहीं थे; वे बिहार की जनता के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश थे। उनके भाषणों का सार यह था कि जनता के हाथों में मौजूद ‘वोट की ताकत’ एक साधारण हथियार नहीं, बल्कि ‘सुदर्शन चक्र’ है, जिसका उपयोग उन्हें राजनीतिक अशुद्धियों को समाप्त करने और राज्य में सुशासन एवं विकास के दौर को जारी रखने के लिए करना चाहिए। ​मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिस तरह से बिहार की गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और मेधा का उल्लेख किया, वह दर्शाता है कि वह इस भूमि के महत्व को गहराई से समझते हैं। भगवान गौतम बुद्ध की यात्रा, तीर्थंकर महावीर की मोक्षस्थली, माता सीता की जन्मभूमि और ‘राम के ससुराल’ के रूप में बिहार की पहचान, तथा यहां के लोगों की अद्भुत मेधा—चाहे वह आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर या उद्यमी के रूप में हो—को रेखांकित कर उन्होंने बिहारियों के स्वाभिमान को नई ऊंचाई दी। ​उनका यह कथन कि “बिहार और यहां के लोग जो भी करते हैं, वो सबसे बेहतर करते हैं,” एक मुख्यमंत्री की ओर से बिहार की जनता के लिए एक सच्चा सम्मान है। ​डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे गरीबों के उत्थान और देश के समावेशी विकास के मॉडल को सशक्त ढंग से प्रस्तुत किया। महादलित और ओबीसी आयोग की सौगात हो या गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए रोटी, पक्का मकान, गैस चूल्हा, बिजली और पानी का इंतजाम, यह सब ‘गरीबी से निकले एक प्रधानमंत्री’ की उस संवेदनशीलता का परिणाम है, जिसने हर गरीब की तकलीफ को महसूस किया। उन्होंने ‘भाजपा की श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता के समान गरीबों की मदद के लिए तत्परता’ के उपमान से यह स्पष्ट किया कि भाजपा की सेवा भावना दिखावटी नहीं, बल्कि आत्मिक है। ​सबसे महत्वपूर्ण उनका यह तर्क था कि जहां कांग्रेस एक परिवारवादी पार्टी है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ‘देश को अपना परिवार मानते हैं’। उन्होंने स्वयं के एक साधारण परिवार से मुख्यमंत्री बनने का उदाहरण देकर यह प्रमाणित किया कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के नारे में अवसर की समानता का सच्चा लोकतांत्रिक विज़न समाहित है। ​उन्होंने विपक्ष के पाखंड को भी बेनकाब किया। आपातकाल का विरोध करने वाले नेताओं का कांग्रेस के ‘शहजादे’ के साथ खड़ा होना और कांग्रेस द्वारा भगवान श्रीराम की राह में रोड़े अटकाना—इन दोनों बिंदुओं पर डॉ. यादव का प्रहार अत्यंत तीखा और सामयिक था। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण को ‘सारी दुनिया के दीपावली मनाने’ के साथ जोड़कर उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना को मजबूती प्रदान की। ​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बिहार दौरा यह संदेश देता है कि एनडीए का गठबंधन न केवल सुशासन, सड़कें, स्कूल और अस्पताल दे रहा है, बल्कि गुंडाराज को समाप्त करके ‘सूरज डूबने से पहले घर लौटने’ की मजबूरी को खत्म कर, जनता को सुरक्षा और सम्मान भी दे रहा है। ​बिहार के विकास के लिए, देश को मजबूत बनाने के लिए, और तुष्टिकरण तथा परिवारवाद की राजनीति को सबक सिखाने के लिए, डॉ. यादव का यह आह्वान अत्यंत स्पष्ट और प्रभावशाली है: बिहार की जनता को अपने ‘सुदर्शन चक्र’ (वोट) से देश का अपमान करने वालों और विकास में बाधा डालने वालों का अंत कर, एनडीए प्रत्याशियों को जिताना होगा। डॉ. मोहन यादव ने जो विज़न प्रस्तुत किया है, वह बिहार को उसके स्वर्णिम भविष्य की ओर ले जाने का दृढ़ संकल्प है।

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