मध्य प्रदेश के ब्रांड एंबेसडर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव

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मध्य प्रदेश में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है जब उसके मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव देश के विभिन्न प्रांतो का दौरा कर रहे हैं और वहां बसने वाले उद्योगप तियों, बड़े व्यवसाइयों को यहां निवेश करने हेतु प्रेरित कर रहे हैं। मध्य प्रदेश की स्थापना के बाद यहां अनेक मुख्यमंत्री बने लेकिन अधिकांश लोग अपनी राजनीतिक उठापटक में ही उलझे रहे। अधिकां श मुख्यमंत्रियों का एक ही उद्देश्य बना रहा । वह यह कि जनता को अच्छी भली लगने वाली योजनाओं को बनाते जाओ, उन्हें लागू करते जाओ। फिर भले ही करोड़ों रुपए खर्च कर देने के बाद भी उपरोक्त योजनाओं के परिणाम विपरीत क्यों ना आ रहे हों। इसे समझने के लिए हमें सबसे पहले यह समझना होगा कि जनहित और जनरंजन में काफी अंतर होता है।जन हित वह है जिसमें आम आदमी शासकीय योजनाओं से लाभान्वित होता है। उसकी सामाजिक आर्थिक हालात सुधरती है। जबकि जनरंजन वह व्यवस्था है जिसके तहत व्यक्ति को शासकीय योजनाएं और सरकार अच्छे तो लगते हैं, समाज को यह आभास भी होता है कि सब कुछ बेहतर हो रहा है। लेकिन सही मायने में ऐसा होता नहीं है। अफसोस की बात यह है कि विभिन्न प्रदेशों के अधिकांश मुख्यमंत्री जन रंजन में ही लगे रहे । यही वजह है कि मध्य प्रदेश को इतने सालों में जिन बुलंदियों को स्पर्श कर लेना चाहिए था वह फिलहाल उससे दूर बनी हुई हैं। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के अनवरत प्रयासों को देखकर यह भरोसा होता है कि उन्होंने प्रदेश के विकास का एवं आम आदमी के उत्थान का ताना-बाना तैयार कर रखा है। इस आधार पर वे लगातार विभिन्न प्रदेशों और महानगरों के दौरे कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है देश भर के छोटे बड़े और मझोले उद्योगपतियों व्यवसाइयों को हमारे यहां उपलब्ध संसाधनों से परिचित कराना, सरकार की सकारात्मक कार्य प्रणाली को उनके सामने रखना, 1- 2 -1 चर्चाओं के बाद संतुष्टि होने पर उन्हें मध्य प्रदेश में आर्थिक निवेश करने हेतु प्रेरित करना। इन प्रयासों की निकट भविष्य में बेहतर परिणाम आने की पुरजोर संभावनाएं हैं। यदि ऐसा होता है तो हमें भरोसा रखना चाहिए कि मध्य प्रदेश का भविष्य उज्जवल है। यहां उद्योग व्यापार पर्यटन आदि ऊंची छलांग लगाने वाले हैं । इससे सरकार और जनता को आर्थिक फायदा तो होगा ही, युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होने जा रहे हैं। एक बात स्पष्ट रूप से जानने की आवश्यकता है कि किसी भी राज्य की तरक्की तभी सुनिश्चितता को प्राप्त होती है जब वहां का व्यक्ति रोजगार से लगा रहे, उद्योगपति और व्यवसा यी आर्थिक लाभ से संतुष्ट बने रहें । बड़े महानगर इसका सबसे उत्कृष्ट उदाहरण हैं । मुंबई दिल्ली बेंगलुरु इंदौर आदि ऐसे महानगर हैं जहां युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर भारी पैमाने पर उपलब्ध हैं। इसके चलते पहले वहां पढ़ने पढ़ाने की गरज से युवाओं का पहुंचना होता है और फिर जब वे शिक्षित एवं प्रशिक्षित हो जाते हैं तब उन्हें स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध हो जाता है। इससे वहां रहने वाले लोगों की आर्थिक क्षमता मजबूत होती है और सामाजिक आर्थिक विकास लगातार आगे बढ़ने लगता है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गहन अध्ययन के बाद इस सत्यता को समझा है। यही वजह है कि उन्होंने शासन और प्रशासन समेत विभिन्न विभागों के पारंपरिक कार्यो को गतिमान बनाए रखते हुए यह संकल्प ले रखा है कि हमें अपने प्रदेश को आर्थिक रूप से इतना मजबूत कर लेना है, जिसके चलते यहां से बेरोजगार लोगों का पलायन बंद हो । उन्हें यहीं पर रोजगार मिले, युवा लोग अपने स्वयं के धंधे रोजगार स्थापित करें। वह इतनी तरक्की करें कि दूसरों से नौकरी मांगने की बजाय वे खुद बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने वाले उद्योगपति अथवा व्यवसा यी बन जाएं। जाहिर है जब कोई प्रदेश इस स्तर पर सोचता है, लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मेहनत करता है तो फिर परिणाम भी सकारात्मक ही आते हैं। जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव स्वयं आर्थिक निवेश अपने यहां लाने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं, तो फिर हमें उम्मीद करनी चाहिए कि सूबे की नौकरशाही भी उनके कदम से कदम मिलाकर निवे शकों का भरोसा बनाए रखेगी। यदि ऐसा हो सका तो हम उम्मीद कर सकते हैं कि हमारे यहां के जो शिक्षित और गैर शिक्षित बेरोजगार दूसरे प्रांतों के महानगरों में जाकर तरक्की के सपने देखते हैं। उनकी सोच में व्यापक बदलाव आएगा और उन्हें अपने ही रिहायसी क्षेत्रों में शिक्षा रोजगार नौकरी और सकारात्मक आर्थिक माहौल प्राप्त हो सकेगा।

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