हमारे जीवन में और हमारे आसपास अनेक घटनाएं घटती रहती हैं, जो समय के साथ आई गई हो जाती है । किंतु कुछ घटनाएं ऐसी भी देखने को मिलती हैं जिनके माध्यम से समाज सरकार और जिम्मेदारों का मानवीय व्यवहार समझ में आता है। यह घटनाएं खुद भी अपने आप में मिसाल बनती हैं और सिखाती हैं कि इस दुनिया में संवेदनाओं के बगैर मानवीय जीवन पशुवत ही है। जबकि यह संवेदनाएं मानवीय व्यवहार में समाहित होकर अनेक व्यक्तियों को विशिष्ट और समाज को परोपकारी बना देती हैं। ऐसी ही एक घटना गुजरात में देखने सुनने को मिली तो मध्य प्रदेश सरकार का दुखी हो जाना हृदय को स्पर्श कर गया। गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास एयर इंडिया विमान हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। 242 यात्रियों को अहमदाबाद से लंदन लेकर जा रहा ये विमान रनवे से उड़ान भरते ही कुछ उंचाई पर जाकर आग के गोले में बदल गया और एक मेडिकल हॉस्टल बिल्डिंग पर जाकर गिर गया। हादसे के बाद अहमदाबाद प्रशासन तुरंत एक्शन में आया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। जैसी यह समाचार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को मिला, उन्होंने तत्काल अपने सभी समारोह और राजनीतिक कार्यक्रम निरस्त कर दिए। यहां तक कि मध्य प्रदेश के भाजपा कार्यालय में भी गजब का सन्नाटा देखने को मिला। जिन्हें इस घटना के बारे में मालूम नहीं था उन्होंने जब विश्व के सबसे बड़ी राजनीतिक दल के कार्यालय में सूनापन देखा तो यह सवाल करने से खुद को रोक नहीं पाए कि भाजपा कार्यालय में यह सन्नाटा क्यों छाया हुआ है। वहां असीन प्रदेश कार्यालय मंत्री डॉक्टर राघवेंद्र शर्मा द्वारा बताए जाने पर मालूम हुआ कि गुजरात में एक हवाई दुर्घटना घट गई है, जिसके चलते अनेक यात्रियों के प्राण संकट में हैं। इसी हादसे के चलते सरकार और भाजपा के आज के सभी कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए हैं। कहने को सरकार और संगठन का यह निर्णय एक सामान्य राजनीतिक औपचारिकता भर दिखाई देता है। लेकिन गौर से देखा जाए तो हम पाएंगे कि यह निर्णय मानवीय संवेदनाओं से उत्प्रोत है और आम जनता की लाभ हानि एवं उसके दुख सुख से जुड़ा हुआ है। हालांकि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव कार्यक्रमों को निरस्त करने के निर्णय से किनारा भी कर सकते थे। क्योंकि हवाई दुर्घटना मध्य प्रदेश के क्षेत्र में ना घटते हुए गुजरात के आसमान में घटित हुई थी। लेकिन यह निर्णय मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के मानवीय स्पंदन को दर्शाता है जो आम आदमी के हितार्थ उसके हृदय में धड़क रहा है। यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि राजनीतिक दलों और सरकारों को आम आदमी के सुख-दुख से बहुत ज्यादा लेना देना शेष नहीं रह गया है। यह बात प्रमाणित करने के लिए हाल ही में घटित कर्नाटक के हादसे को याद करना आवश्यक हो जाता है। सभी को ज्ञात होगा कि जब क्रिकेट में जीत का जश्न मनाने के लिए कर्नाटक की सड़कों पर क्रिकेट प्रेमियों का हम उमड़ा तो वहां की सरकार इस मौके का सियासी फायदा उठाने से खुद को रोक नहीं पाई। तुरत फुरत तय किया गया कि बेंगलुरु के स्टेडियम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल द्वारा विजेता क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों का सार्वजनिक अभिनंदन किया जाएगा। जब यह कार्यक्रम संपन्न हो रहा था, इसी दौरान क्रिकेट प्रेमियों का जमावड़ा अनियंत्रित हो गया और कार्यक्रम स्थल के आसपास जानलेवा भगदड़ मच गई। इसमें अनेक लोगों को जान से हाथ धोना पड़ गया और सैकड़ो लोग घायल हो गए। इस घटना का सबसे अधिक मार्मिक और निंदनीय पहलू यह रहा कि कार्यक्रम स्थल के बाहर भगदड़ मचती रही। लोग एक दूसरे पर गिरते रहे। पैरों के नीचे दबकर कुचलकर मौतें होती रहीं । एक के बाद एक घायल लोग अस्पताल पहुंचाये जाते रहे । सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई और सरकार की बद इंतजामी खुलकर सामने आ गई। लेकिन वहां की सरकार ने अभिनंदन समारोह को नहीं रोका। जब दूसरे दिन इस अभिनंदन समारोह और जानलेवा हादसे के समाचार प्रकाशित हुए, तब जागरूक पत्रकारों ने इस बात की कड़े शब्दों में निंदा की। यह निंदा इस बात के लिए थी कि बाहर भगदड़ मचती रही। पुलिस असहाय सी खड़ी होकर मूक दर्शक बनी रही। क्रिकेट प्रशंसक एक दूसरे पर गिरते पढ़ते रहे। यह भी सूचना आम हो गई कि इस भगदड़ में अनेक लोग काल कवलित हो चुके हैं। फिर भी सरकार द्वारा अभिनंदन समारोह को नहीं रोका गया। इसे समझ में आता है कि कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं को केवल अपने सियासी नफा नुकसान से मतलब होता है। मानवीय संवेदनाएं है तो जैसे इनके आसपास से होकर गुजरी तक नहीं होतीं। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सरकार है, जिसने पड़ोसी राज्य में घटित एक हवाई दुर्घटना के मद्दे नजर अपने सभी शासकीय और राजनीतिक कार्यक्रम, समारोह, प्रवास निरस्त कर दिए हैं। इससे यह उम्मीद बनती है कि भारतीय राजनीति में मानवीय संवेदनाओं का अभी पूरी तरह से अंत नहीं हुआ है। भाजपा का यह हृदय स्पर्शी व्यवहार हमारी राजनीतिक सुचिता को जीवंत बनाए रखेगा।


