पहले मैं और मेरा परिवार, गुंजाइश बची रहे तो फिर नाते रिश्तेदार। इन सब का विकास होना चाहिए तब कहीं जाकर राजनेता वर्ग को आम जनता की याद आती है। यही वजह है कि देश प्रदेश के अधिकांश नेताओं को आम जनता द्वारा सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता। लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की कार्य प्रणाली इस परिदृश्य से एकदम अलग है। अभी हाल ही में जब मुख्यमंत्री दुबई एवं स्पेन की यात्रा से वापस स्वदेश लौटे तब उन्होंने आते ही रीवा जिले का रुख किया वहां पर उस श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए जो उनके ससुर जी के दिवंगत को जाने पर आयोजित की गई थी। यहां स्पष्ट कर दें कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के ससुर जी का देहांत चार-पांच दिन पूर्व ही हो चुका था। यह भी नजदीकी सूत्रों से ज्ञात हुआ कि डॉक्टर मोहन यादव अपने ससुर जी को पिता के समान ही सम्मान देते रहे हैं। इस दृष्टि से चर्चाएं चल रही थीं कि उनके निधन होते ही मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विदेशी दौरा छोड़कर वापस स्वदेश लौट आएंगे और अपने ससुर की अंत्येष्टि में भाग अवश्य लेंगे। इसके बाद तय किया जाएगा कि उन्हें विदेश यात्रा पर जाना है या नहीं, और यदि जाना है तो कब जाना है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इस गमी की सूचना मिल जाने पर मुख्यमंत्री ने विदेश से ही अपने पिता समान ससुर जी के निधन पर संवेदनाएं व्यक्ति कीं अपना दुख व्यक्त किया और फिर राष्ट्र कार्य हेतु संलग्न बने रहे। अब जब विदेश का दौरा पूरा हो चुका है, मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश के विकास की रूपरेखा जमा कर, वहां बसे भारतीयों को मध्य प्रदेश में निवेश करने के लिए आश्वस्त करके भारत वापस लौट आए हैं। तब उन्होंने अपनी ससुराल की ओर रुख किया। देरी से पहुंचने पर सभी से क्षमा याचना की। उसके तुरंत बाद भोपाल के लिए रवाना हो गए। यहां उन्होंने स्टेट हैंगर पर प्रदेश भर से इकट्ठे हुए मीडिया का सामना किया और अपनी विदेश यात्रा की सफलता के बारे में व्यापक रूप से ब्यौरा प्रस्तुत किया। सरसरी तौर पर देखा जाए तो यह एक छोटी सी घटना है। अमूमन ऐसा होता रहता है, जब व्यक्ति अपने व्यवसाय, व्यापार, नौकरी आदि की दृष्टि से विदेश में होता है। तब परिवार में किसी के दिवंगत हो जाने से मौके पर उपस्थित नहीं हो पाता। क्योंकि यदि वह अपना काम धाम छोड़ कर आया तो उसे भारी आर्थिक हानि हो सकती है, अथवा काम धंधे पर आंच आ सकती है। उन सभी परिस्थितियों से बचे रहने के लिए कई बार व्यक्ति अपने नजदीकी रिश्तेदारों के सुख-दुख में शामिल होने से वंचित हो जाता है। लेकिन यह घटना उस समय विशिष्ट हो जाती है जब यह पता चले कि व्यक्ति अपने व्यवसाय, व्यापार अथवा नौकरी पेशा की दृष्टि से विदेश नहीं गया है। उसका लक्ष्य वहां मध्य प्रदेश की जनता का हित करना है और यहां नए-नए उद्योग स्थापित करके युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। यानि यह स्वहित की बजाय परहित का कार्य है, जिसमें कम से कम नेताओं की रुचि तो कम ही रहती है। शायद यही वजह रही कि वल्लभ भवन से लेकर श्यामला हिल्स यही चर्चा रही कि अपने ससुर जी के देहांत पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विदेशी दौरा छोड़कर यहां लौट आएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव उन विरले लोगों में से एक हैं जिनके लिए अपनी जनता का हित ही सर्वोपरि है। यही वजह है कि अंतर मन से दुखी होने के बाद भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विदेशी दौरे में व्यस्त बने रहे। वहां उन्होंने अधिकांश भारतीय उद्योगपतियों, व्यवसाइयों से मुलाकात की। खासकर मध्य प्रदेश से गए भारतीयों के साथ उन्होंने आत्मीय मुलाकातें कीं। उन्हें मध्य प्रदेश में आर्थिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया। आपने भरोसा दिलाया कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार उनके आर्थिक और औद्योगिक उद्यमों को अपना पूरा समर्थन उपलब्ध कराएगी और हर संभव सहयोग करेगी। इन्हीं ईमानदार प्रयासों का परिणाम है कि भारी तादाद में देसी और विदेशी उद्योगपतियों, व्यवसायियों ने मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर आर्थिक निवेश करने का केवल भरोसा ही नहीं दिया बल्कि लिखित आश्वासन भी दिए हैं।
यही ब्यौरा मुख्यमंत्री ने स्टेट हैंगर पर मीडिया के सामने रखा और बताया कि अभी तक जितने भी विदेशी दौरे मुख्यमंत्री के नाते मेरे द्वारा किए गए, उनमें से यह दौरा सर्वाधिक सफल रहा है। मैं आश्वस्त हूं कि निकट भविष्य में वह सभी उद्योगपति और व्यवसायी भारत प्रवास पर आ रहे हैं, जिनसे मेरी मुलाकात हुई है। उनके द्वारा यहां मौका मुआयना करने के बाद औद्योगिक और व्यावसायिक स्तर पर निवेश किया जाना प्रस्तावित है। अंतर मन से दुखी होने के बावजूद और अपने निकटतम स्वजन की मृत्यु उपरांत भी देश सेवा में लगे रहने का यह जुनून डॉक्टर मोहन यादव को विशिष्ट आभामंडल प्रदान करता है।


