भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊंची उड़ान : 2027-28 तक दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा भारत, वित्त मंत्रालय ने जारी किया नया लक्ष्य

नई दिल्ली राष्ट्रीय व्यापार

एजेंसी, नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने देश की आर्थिक प्रगति को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण अनुमान साझा किया है, जिसके अनुसार भारत वित्त वर्ष 2027-28 तक विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लेगा। मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा फरवरी 2026 की मासिक समीक्षा रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के नए आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति में आए बदलावों के कारण अब इस लक्ष्य के 2027-28 तक पूरा होने की उम्मीद है। हालांकि, पूर्व में इसके जल्दी हासिल होने की संभावना थी, लेकिन मुद्रा के उतार-चढ़ाव ने समय सीमा को थोड़ा आगे बढ़ा दिया है।

समीक्षा रिपोर्ट में पश्चिम एशिया के बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर भी गहरी चिंता जताई गई है। ईरान पर अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद वहां की स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है। ईरान की जवाबी कार्रवाई और तेल ठिकानों पर हुए हमलों ने ईंधन की आपूर्ति को प्रभावित किया है। सबसे बड़ी चुनौती ‘हर्मुज जलडमरूमध्य’ के बंद होने से पैदा हुई है। यदि यह समुद्री मार्ग इसी तरह बाधित रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार और आम जनता की जेब पर पड़ेगा।

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इस संकट को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने भविष्य की रणनीतियों में बदलाव के संकेत दिए हैं। सरकार का मानना है कि अब प्राकृतिक संसाधनों और ईंधन का बड़ा भंडार सुरक्षित रखना अनिवार्य हो गया है। साथ ही, विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कर नीतियों में निरंतरता और स्पष्टता बनाए रखने पर जोर दिया गया है। भारतीय व्यापारियों को सलाह दी गई है कि वे विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाएं और अपने उत्पादों की गुणवत्ता तथा नए शोध पर विशेष ध्यान दें ताकि वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ मजबूत बनी रहे। निष्कर्ष में यह कहा गया है कि भारत आज आर्थिक रूप से एक मजबूत स्थिति में खड़ा है, लेकिन यह वक्त पुरानी उपलब्धियों पर खुश होने का नहीं बल्कि भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए तैयार रहने का है। सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियां और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ही इस वैश्विक संकट के बीच भारत के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।

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