डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन का शुभारंभ, 15 करोड़ की लागत से बनेगा ‘ग्लोबल साइंस सिटी’

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एजेंसी, उज्जैन। खगोल शास्त्र और आधुनिक विज्ञान के संगम के साथ उज्जैन अब वैश्विक पटल पर ‘ग्लोबल साइंस सिटी’ के रूप में अपनी नई पहचान बनाने जा रहा है। शुक्रवार को उज्जैन के तारामंडल परिसर में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस विशेष अवसर पर उन्होंने 15 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले विज्ञान केंद्र का लोकार्पण किया। सम्मेलन में खगोल शास्त्र, वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर देश के जाने-माने वैज्ञानिकों और विद्वानों ने मंथन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और वरिष्ठ विचारक सुरेश सोनी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि उज्जैन केवल धर्म की नगरी नहीं, बल्कि सदियों से विज्ञान और खगोल गणना का भी प्रमुख केंद्र रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीनविच मीन टाइम के अस्तित्व में आने से बहुत पहले दुनिया में समय की गणना उज्जैन की शून्य देशांतर रेखा से होती थी। डॉ. यादव ने शिव को काल का अधिष्ठाता बताते हुए कहा कि विज्ञान भी मानता है कि समय और अंतरिक्ष अविभाज्य हैं, जिसे हमारे शास्त्रों ने युगों पहले ‘महाकाल’ के रूप में परिभाषित कर दिया था। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी सिंहस्थ 2028 तक उज्जैन को वैज्ञानिक विरासत के केंद्र के रूप में पुनर्जीवित किया जाएगा। इसी कड़ी में डोंगला स्थित वेधशाला के महत्व और उज्जैन को काल गणना का वैश्विक मानक बनाने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के अंतर्गत 701.86 करोड़ रुपये की लागत वाले 19.80 किलोमीटर लंबे 4-लेन बायपास और सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज इकाई के विस्तार कार्य का भूमिपूजन भी किया। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस अवसर पर ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27’ की वेबसाइट का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन अब ‘ज्ञान भारतम्’ योजना के जरिए इसे फिर से स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि समय की गणना के लिए अब ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ को वैश्विक पहचान मिलनी चाहिए।

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सम्मेलन में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत ने कहा कि भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के लिए आधुनिक विज्ञान को समावेशी और आत्मनिर्भर बनाना होगा। उन्होंने वैदिक ज्ञान को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्राचीन स्वरूप बताते हुए युवाओं से वैज्ञानिक सोच अपनाने की अपील की। विचार गोष्ठी में विशेषज्ञों ने बताया कि कर्क रेखा अब उज्जैन से शिफ्ट होकर डोंगला में आ गई है, जहां 21 जून को सूर्य की छाया शून्य हो जाती है। इस तीन दिवसीय आयोजन में देशभर के 1000 से अधिक विद्यार्थी, शोधार्थी और खगोलशास्त्री हिस्सा ले रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य उज्जैन की प्राचीन वैज्ञानिक गरिमा को वापस दिलाना है।

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