एजेंसी, हॉन्गकॉन्ग। हॉन्गकॉन्ग के ‘ताई पो’ जिले में बुधवार को एक बड़े रिहायशी कॉम्प्लेक्स में आग लग गई। यह 77 साल में लगी सबसे भीषण आग बताई जा रही है। आग इतनी तेज थी कि 24 घंटे बाद भी 8 में से सिर्फ 5 इमारतों पर काबू पा लिया गया, 3 इमारतों की ऊपरी मंजिलों में आग अभी भी जल रही है। इस हादसे में अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 76 गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं, 280 लापता हैं। ये कॉम्प्लेक्स आठ इमारतों का था, जिनमें हर इमारत 35 मंजिलों की थी। इसमें करीब दो हजार अपार्टमेंट थे। जांच में पता चला कि लिफ्ट की खिड़कियों को ढकने के लिए इस्तेमाल किया गया स्टायरोफॉम में आग तेजी से फैली। इसी वजह से आग इतनी तेजी से फैल गई। मामले में पुलिस ने ठेकेदार समेत तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
एक्सपर्ट्स बोले- आग के पीछे बांस के अलावा कई वजहें
हॉन्गकॉन्ग के ताइपो इलाके में वांग फुक कोर्ट नाम की 40 साल पुरानी इमारत में लगी आग के पीछे मरम्मत के लिए लगी बांस को वजह बताया जा रहा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बांस की स्कैफोल्डिंग आग की इकलौती वजह नहीं थी। असल में प्लास्टिक की जाली (नेट), फायर-रिटार्डेंट न होने वाली शीट और खिड़कियों में इस्तेमाल होने वाला स्टायरोफॉम के कारण आग तेजी से फैली। चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हॉकिंग की आर्किटेक्ट रफाएला एंड्रिजी ने कहा,“बांस में प्राकृतिक नमी होती है, इसलिए वह आसानी से नहीं जलता। अगर बांस सूखा भी हो तो भी प्लास्टिक की जाली और दूसरे सिंथेटिक चीजों की तुलना में बहुत धीरे जलता है। ताइपो की आग में ज्यादातर नेट और इंजीनियरिंग सामग्री ही जिम्मेदार लग रही है।”
हॉन्गकॉन्ग चीफ सेक्रेटरी बोले- बांस की जगह स्टील का इस्तेमाल करें
वहीं, बांस स्कैफोल्डिंग एसोसिएशन के सदस्य टिम्मी सो ने कहा,“जली हुई तस्वीरों में भी बांस अभी पीला दिख रहा है, यानी वह पूरी तरह नहीं जला। आग नेट और स्टायरोफॉम से फैली।” वहीं, आग की घटना के बाद हॉन्गकॉन्ग चीफ सेक्रेटरी एरिक चैन ने निर्माण में बांस की जगह स्टील स्कैफोल्डिंग पर पूरी तरह स्विच करने की बात कही। उन्होंने कहा, “बांस लचीला जरूर है, लेकिन आग से बचाव में स्टील बेहतर है।” इससे पहले हॉन्गकॉन्ग सरकार मार्च 2025 में नया नियम लाई थी, जिसके मुताबिक सभी सरकारी ठेकों में 50% काम स्टील स्कैफोल्डिंग से करना अनिवार्य होगा।
एक इमारत से दूसरी इमारत तक फैली आग
तेज हवा और जलते हुए मलबे की वजह से लपटें एक इमारत से दूसरी इमारत तक फैलती चली गईं। जब आग भड़की, तो कई लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी क्योंकि मरम्मत की वजह से खिड़कियां बंद थीं। आग बुझाने पहुंची टीम को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई मंजिलों पर तापमान इतना ज्यादा था कि फायर फाइटर्स उन जगहों तक पहुंच भी नहीं पा रहे थे। इसी दौरान एक फायर फाइटर की मौत भी हो गई।
आग में कई बुजुर्ग घायल, जापान-जर्मनी ने शोक जताया
हांगकांग के नेता जॉन ली ने सभी सार्वजनिक आवासों की जाँच का आदेश दिया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शोक जताते हुए नुकसान कम करने के लिए पूरी कोशिश करने को कहा। पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि कितने लोग लापता हैं और कितने को सुरक्षित निकाला जा चुका है। आग के समय ज्यादातर बुजुर्ग अपने घरों में आराम कर रहे थे, जिसके कारण वो समय पर बाहर नहीं निकल पाए। इसमें ज्यादातर बुजुर्ग घायल हुए हैं। हादसे पर जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका सहित कई देशों ने संवेदनाएं जताई हैं। वहीं मैकडॉनाल्ड्स ने फ्री में 1000 फूड पैकेट देने का ऐलान किया है।
महिला बोली- बहुत मुश्किलों के बाद बेटा पैदा हुआ था, अब नहीं रहा
शेल्टर होम के बाहर एक महिला फूट-फूटकर रो रही थी। उसने कहा कि उसका बच्चा अब इस दुनिया में नहीं रहा। उसने बताया कि वह अपने ससुर-सास का भी कुछ पता नहीं लगा पा रही। दमकलकर्मियों ने उन्हें बताया था कि उनके फ्लैट में एक बच्चे और एक वयस्क को पाया गया, लेकिन दोनों मर चुके थे। अपना सिर पकड़कर महिला ने रोते हुए कहा, “मैं क्या करूं! मेरा बच्चा बहुत मुश्किलों के बाद पैदा हुआ था… और अब वह चला गया।”
हादसे में एक फायर फाइटर की भी मौत
हांगकांग में लगी भीषण आग में एक फायर फाइटर हो वाई-हो की मौत हो गई। हो पिछले 9 साल से फायर सर्विसेज डिपार्टमेंट में थे और शा टिन फायर स्टेशन में तैनात थे। आग लगने पर वह दोपहर 3:01 बजे मौके पर पहुचे थे और ग्राउंड फ्लोर पर आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे। 3:30 बजे के बाद उनका संपर्क टीम से टूट गया। आधे घंटे बाद शाम 4 बजे हो ग्राउंड फ्लोर पर मिले। उनका चेहरा जला हुआ था। उन्हें तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
1948 में लगी थी भीषण आग, 176 लोग मारे गए थे
हांगकांग में अब तक की सबसे भयानक आग 27 फरवरी 1918 को लगी थी। यह आग हैप्पी वैली रेसकोर्स में लगी थी। आग लगने के बाद वहां की ग्रैंडस्टैंड (बैठने वाला बड़ा ढांचा) गिर गया और 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद एक और बड़ी आग 22 सितंबर 1948 को लगी। यह आग डेस वोइक्स रोड वेस्ट पर स्थित विंग ऑन के एक गोदाम में हुए धमाके के बाद फैली। इस हादसे में 176 लोगों की मौत हुई और 69 लोग घायल हुए। यह दोनों हादसे आज भी हांगकांग के इतिहास के सबसे दर्दनाक आग हादसों में गिने जाते हैं। इससे पहले 1948 में पांच मंजिला गोदाम में विस्फोट हुआ था। इसमें 176 लोग मारे गए थे । इसके बाद 1962 में शुई पो इलाके में लगी आग में लगभग 44 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, नवंबर 1996 में कोवलून में गार्ले बिल्डिंग में आग लगने से 41 लोग मारे गए थे और 81 घायल हुए थे।


