एजेंसी, भोपाल। UCC in MP : मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। राज्य में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रदेश सरकार ने अपनी तैयारियां बेहद तेज कर दी हैं। सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को राजधानी भोपाल में एक विशेष घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश में बहुत जल्द ही समान नागरिक संहिता को पूरी तरह से लागू किया जाएगा। कानून को सर्वमान्य और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से सरकार की तरफ से एक उच्चस्तरीय समिति का गठन भी कर दिया गया है। यह नवगठित समिति राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर सभी धर्मों, समाजों और समुदायों के प्रबुद्ध लोगों से मुलाकात कर रही है और उनके विचार जानने का प्रयास कर रही है।
हमारी सरकार मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मैं प्रदेशवासियों से अपील करता हूँ कि कमेटी को अपने सुझाव अवश्य दें। #UniformCivilCode #UCC pic.twitter.com/uRkoJx4wuJ
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 1, 2026
बदलते दौर में सामाजिक और पारिवारिक मतभेदों को खत्म करने की जरूरत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस कानून की जरूरत पर बल देते हुए अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में देश और राज्य को धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक रूप से अलग-अलग कानूनों या भिन्न मतों की कोई आवश्यकता नहीं है। आज के आधुनिक दौर में हम सभी को समान नागरिक संहिता की ओर मजबूती से कदम बढ़ाने की सख्त जरूरत है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि हमारे राज्य के भीतर चाहे महिलाओं के तलाक से जुड़े हुए कानूनी मामले हों, चाहे अलग-अलग परिवारों की अपनी पारंपरिक रीति-रिवाज हों या फिर भिन्न-भिन्न धर्मों से जुड़े व्यक्तिगत कानून हों, आज के दौर में वैधानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से इनमें किसी भी प्रकार के भेदभाव या भिन्नता की कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है। सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना वक्त की मांग है।
उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्य प्रदेश बनेगा यूसीसी लागू करने वाला राज्य
यूसीसी को अपनाने वाले अन्य राज्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि देश के भीतर अभी तक कुल 3 राज्यों- उत्तराखंड, गुजरात और असम ने इस ऐतिहासिक कानून को अपने यहाँ लागू करने या अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब मध्य प्रदेश भी बहुत जल्द अपने राज्य में समान नागरिक संहिता को पूरी तरह से लागू करने जा रहा है। सीएम डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार लगातार जन-कल्याणकारी और ऐतिहासिक सुधारों से जुड़े कामों को आगे बढ़ा रही है। मध्य प्रदेश भौगोलिक और सामाजिक रूप से उन चुनिंदा अनुकूल राज्यों में से एक है, जहां इस कानून की स्वीकार्यता बहुत आसान है और इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश के हाथों में होगी विशेष समिति की कमान
इस पूरे संवेदनशील और महत्वपूर्ण कानून का मसौदा तैयार करने के लिए बनाई गई समिति के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसकी कमान देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट की एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी गई है। इस समिति में कानून, समाजशास्त्र और विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज विद्वानों व विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह उच्चस्तरीय समिति मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों का लगातार दौरा कर रही है और जमीनी स्तर पर जाकर सभी संप्रदायों के लोगों से उनके बहुमूल्य सुझाव ले रही है। समिति द्वारा विभिन्न पक्षों से बातचीत करने के बाद जो रिपोर्ट तैयार की जाएगी, उसका गहन संकलन किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस रिपोर्ट के आते ही बिना किसी देरी के मध्य प्रदेश विधानसभा में इसे पारित कराकर जल्द से जल्द राज्य में लागू कर दिया जाए।
सीएम ने जनता से की अपील, विशेष वेबसाइट पर अपने सुझाव साझा करें नागरिक
समान नागरिक संहिता के इस पूरे मसौदे को पूरी तरह पारदर्शी और जन-हितैषी बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के आम नागरिकों से भी एक विशेष अपील की है। सरकार की तरफ से यूसीसी को लेकर एक आधिकारिक वेबसाइट भी लाइव कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से आग्रह किया है कि वे इस वेबसाइट पर जाएं और कानून को लेकर अपने सकारात्मक सुझाव और विचार सरकार के साथ जरूर साझा करें। सरकार चाहती है कि इस कानून के निर्माण में राज्य के हर वर्ग और आम नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित हो सके ताकि बाद में किसी भी वर्ग को इस कानून से कोई शिकायत न रहे।
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