एजेंसी, नई दिल्ली। हरिवंश राज्यसभा सांसद : राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने एक बार फिर उच्च सदन के सदस्य के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें उनके कक्ष में पद की शपथ दिलाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है, जिसके बाद अब वह साल 2032 तक सदन का हिस्सा बने रहेंगे।
हरिवंश जी ने पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में अमूल्य योगदान दिया है। वे एक सम्मानित बुद्धिजीवी और विचारक हैं। उन्होंने अपने गहन विचारों और अंतर्दृष्टि से पिछले कुछ वर्षों में सदन की कार्यवाही को समृद्ध किया है। मुझे प्रसन्नता है कि माननीय राष्ट्रपति जी ने उन्हें राज्यसभा के लिए…
— Narendra Modi (@narendramodi) April 10, 2026
राष्ट्रपति ने किया सदन के लिए चयन
हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था। इस बार उनकी पार्टी जदयू की ओर से उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया गया था, जिसके बाद राष्ट्रपति ने रिक्त सीट को भरने के लिए उनके नाम पर मुहर लगाई। यह स्थान पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद से खाली था। 69 वर्षीय हरिवंश अब मनोनीत सांसद के रूप में देश की सेवा करेंगे। गौरतलब है कि राष्ट्रपति कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से 12 सदस्यों को सदन के लिए चुनते हैं।
पीएम मोदी ने पहले ही दिए थे संकेत
हरिवंश की सदन में वापसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही इशारा कर दिया था। मार्च में सांसदों के विदाई समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था कि हरिवंश की राजनीतिक यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है और वह आगे भी जनहित के कार्यों में सक्रिय रहेंगे। प्रधानमंत्री के उसी संकेत के बाद अब उन्हें मनोनीत सांसद बनाकर दोबारा सदन में लाया गया है।
उपसभापति पद की दोबारा जिम्मेदारी मिलने की संभावना
हरिवंश नारायण सिंह के मनोनीत सदस्य बनने के साथ ही यह माना जा रहा है कि वे फिर से उपसभापति का पद संभाल सकते हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार, मनोनीत सांसद भी इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुनाव लड़ सकता है और वोट भी डाल सकता है। चूंकि वह 2018 से 2024 तक इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा चुके हैं, इसलिए संभावना है कि सरकार उन्हें दोबारा इस पद पर नियुक्त कर सकती है।
पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर
मूल रूप से पत्रकार रहे हरिवंश नारायण सिंह ने राजनीति में आने के बाद जेडीयू के जरिए अपनी पहचान बनाई। उन्होंने दो बार राज्यसभा के उपसभापति के रूप में सदन की कार्यवाही का प्रभावी संचालन किया है। हालांकि, पिछले कुछ समय से उनके और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच कुछ राजनैतिक दूरियां भी चर्चा का विषय रही हैं। इसी शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने भी राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी शपथ पूरी की।
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