नई दिल्ली| भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 31 अक्टूबर 1984 की सुबह 9:09 बजे सफदरजंग स्थित उनके निवास पर उनके बॉडीगार्ड्स ने गोलियों से भून डाला। इसकी खबर आते ही पूरे देश में सन्नाटा सा पसर गया। हर इंसान अवाक रह गया था कि इतनी मजबूत महिला की कोई हत्या कर सकता है। 31 अक्टूबर यानी कल उनकी शहादत को 39 साल पूरे हो जाएंगे। इस रिपोर्ट में हम आयरनलेडी के नाम से मशहूर इंदिरा गांधी से जुड़े कुछ रोचक और प्रेरक तथ्यों पर चर्चा करेंगे। इंदिरा गांधी से जुड़ा ऐसा ही एक तथ्य भारत के पहले महिला थाने से जुड़ा हुआ है। इसके अलावे और भी कुछ ऐसे ही तथ्यों पर हम यहां बात करेंगे।
इंदिरा गांधी ने किया था पहले महिला थाने का उद्घाटन
क्या आपको पता है कि 50 साल पहले भारत के पहले महिला थाने का उद्घाटन किसने किया था? यह भारत ही नहीं एशिया का पहला महिला थाना था जिसने हाल ही में 50 साल पूरे कर लिए। यह महिला पुलिस थाना केरल के कोझीकोड में शुरू किया गया था। इस महिला थाने का उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। केरल पुलिस ने अपनी वेबसाइट पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा है कि 1973 में 23 अक्टूबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने थाने की पहली सब इंस्पेक्टर एम. पद्मिनीअम्मा को उद्घाटन रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने के लिए एक कलम भी गिफ्ट में दी थी। पद्मिनीअम्मा वर्ष 1995 में एसपी के पद से रिटायर हुई थीं। थाने की गोल्डन जुबली के मौके पर पद्मिनीअम्मा ने 23 अक्टूबर 1973 के उस ऐतिहासिक क्षण को गर्व के साथ याद किया। पद्मिनीअम्मा ने तिरुवनंतपुरम इस माके पर कहा कि कोझिकोड में वनिता (महिला) पुलिस स्टेशन के पीछे का विचार प्रगतिशील और मानवीय दोनों था। इंदिरा गांधी अपने जीते जी अपने दृढ़ फैसलों की वजह से समाज में मिसाल बन गईं। भारतीय समाज में मजबूत महिलाओं को इंदिरा गांधी के नाम से ताने भी मारे जाते हैं।
किन फैसलों के चलते वह बन गईं आयरनलेडी
इंदिरा गांधी भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री होने का तमगा आजतक हासिल है। भारतीय राजनीति में उनके दमदार फैसलों के लिए उन्हें जाना जाता है। इंदिरा गांधी के कार्यकाल को बैंकों के राष्ट्रीयकरण, हरित क्रांति और महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक सुधारों द्वारा चिह्नित किया जाता है। 1966 में भारत में सिर्फ 500 बैंक शाखाएं थीं। आम आदमी को बैंकों का लाभ नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में इंदिरा ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण का फैसला लिया। कांग्रेस ने जब सक्रिय राजनीति में शामिल हुई तो पार्टी के कई नेताओं को यह समझ में आ गया था कि उन्हें रोक पाना मुश्किल होगा और यही वजह है कि इंदिरा गांधाी को पद से हटाने की तैयारी होने लगी। ऐसे में इंदिरा ने पार्टी का विभाजन करने का फैसला लिया। इंदिरा गांधी बेहद मजबूत फैसले लेने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने भारत में बंगाली शरणार्थी को भारत में आने से रोकने के लिए पाकिस्तान पर हमला करके पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराया और बांग्लादेश के निर्माण में सहयोग दिया। इसके अलावा उनके द्वारा देश पर थोपा गए आपातकाल की चर्चा तो आज तक होती है।
हत्या से ठीक एक दिन पहले की थी इंदिरा ने अपनी मौत…
इंदिरा गांधी अपनी मौत से एक रोज पहले यानी 30 अक्टूबर 1984 को ओडिशा के भुवनेश्वर के परेड ग्राउंड में एक चुनावी सभा को संबोधित किया था। इंदिरा का भाषण उनके सूचना सलाहकार एचवाई शारदा प्रसाद तैयार करते थे। भुवनेश्वर की सभा के लिए भी भाषण शारदा प्रसाद ने ही लिखा था लेकिन पता नहीं क्या हुआ अचानक उन्होंने लिखित भाषण छोड़कर अपने मन की बात कहने लगी। भाषण के दौरान उनके तेवर बदल गए। उन्होंने कहा, मैं आज यहां हूं और शायद कल यहां ना रहूं। मैं रहूं या न रहूं लेकिन देश की चिंता करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। मेरा जीवन लंबा रहा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा में बिताया है। मैं अपनी आखिरी सांस तक ऐसा करती रहूंगी और जब मैं मरूंगी तो मेरे ख़ून का एक-एक क़तरा भारत को मजबूत करने में लगेगा।’ उनके इस भाषण से लोग चकित रह गए थे। खुद उनकी ही पार्टी के लोग इसे लेकर असमंजस में थे कि आखिर इंदिराजी ने ऐसे शब्द क्यों कहे थे। अगले ही दिन यानी 31 अक्टूबर 1984 को उनके दो बॉडीगॉर्ड सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने अपने सर्विस वेपन्स से उन्हें गोली मार दी थी जिसके कुछ ही क्षणों बाद उनकी मौत हो गई थी। दरअसल, यह सच ही कहा जाता है कि नियती आपके कंधे पर सवार होकर बहुत कुछ करवाती है। इंदिरा गांधी द्वारा अंतिम भाषण में कहे गए शब्द नियती ने ही उनसे कहलवाए हों। सच यह है कि इस खबर को सुनकर हर कोई सकते में था। बहुत से लोगों के आंसू भी छलक उठे थे। यह सच है कि भारतीय राजनीति में उनकी जगह आजतक कोई नहीं ले पाया है।


