एजेंसी, लखनऊ, नई दिल्ली। सऊदी अरब के अजीजिया क्षेत्र में पवित्र धार्मिक यात्रा पर गए भारतीय मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए की गई व्यवस्थाओं में भारी अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस दयनीय स्थिति को लेकर पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व प्रांतीय मंत्री अनीस मंसूरी ने अत्यंत तीखी नाराजगी और गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने वहां की जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए बताया कि मक्का शहर के विभिन्न विश्राम गृहों, विशेष रूप से ‘आसफ अल कुरैशी’ नामक होटल के भीतर स्थिति अत्यंत नारकीय बनी हुई है। यहां के एक-एक सीमित आकार के कक्ष में जबरन 8 से लेकर 16 तक श्रद्धालुओं को एक साथ रहने के लिए विवश किया गया है। अत्यंत खेद का विषय यह है कि इतने अधिक लोगों के ऊपर दैनिक उपयोग के लिए मात्र 1 ही शौचालय की व्यवस्था की गई है। चारों ओर फैली गंदगी और दूषित जलापूर्ति का गंदा पानी अब यात्रियों के रहने वाले कमरों तक प्रवेश कर रहा है। विश्राम गृहों की यांत्रिक लिफ्ट पूरी तरह से बंद पड़ी हैं और बुनियादी साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं है, जिसके कारण वयोवृद्ध यात्रियों का जीवन पूरी तरह से बेहाल और कष्टमय हो चुका है। पूर्व मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि वहां गए परिवारों को भी प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण एक-दूसरे से पूरी तरह पृथक कर दिया गया है, जिससे श्रद्धालु मानसिक रूप से अत्यंत परेशान हैं।
मक्का (अज़ीज़िया) में हिंदुस्तानी हाजियों के साथ इंतिहाई बदइंतज़ामी! आसफ़ अल क़ुरैशी हॉस्टल की हालत शर्मनाक, लगभग ₹4 लाख लेने के बावजूद फैमिली अलग, एक रूम में 16 लोग, लिफ़्ट ख़राब, 16 लोगों पर एक गंदा वॉशरूम। रूम के अंदर वॉशरूम का गंदा पानी खड़ा है। यह नाकाबिल-ए-बर्दाश्त है।… pic.twitter.com/Yf4AfweYHp
— mohd Asif Abbas (@MOHDASIFABBAS3) May 1, 2026
भारी-भरकम धनराशि वसूलने के बाद श्रद्धालुओं के साथ संगठित अन्याय का आरोप
राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने प्रशासनिक तंत्र पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु से यात्रा के नाम पर लगभग 400000 रुपये की एक बहुत बड़ी धनराशि वसूल की गई है। इतनी बड़ी राशि लेने के पश्चात भी देश के नागरिकों को परदेस में ऐसी बदतर और अमानवीय स्थितियों में धकेल दिया जाना सीधे तौर पर एक संगठित आर्थिक शोषण को दर्शाता है। उन्होंने अतीत के घटनाक्रम का स्मरण कराते हुए बताया कि विगत अप्रैल मास की 22 तारीख को जब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित विशेष स्मारक गृह से यात्रियों के प्रथम जत्थे को विदा किया गया था, तभी उन्हें इस बात की आशंका हो गई थी कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक तंत्र के अधीन कार्य करने वाली राष्ट्रीय एवं प्रांतीय समितियां यात्रियों के लिए अत्यंत विकट परिस्थितियां उत्पन्न करेंगी। पूर्व मंत्री ने अत्यंत कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि यह संपूर्ण अव्यवस्था किसी साधारण चूक का परिणाम नहीं, बल्कि एक सोची-समझी नीति का हिस्सा प्रतीत होती है। इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने देश के प्रधान मंत्री से इस अत्यंत संवेदनशील विषय पर तत्काल संज्ञान लेने और व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की पुरजोर मांग की है, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष उच्च स्तरीय विधिक जांच कराई जा सके और दोषी पाए जाने वाले विश्राम गृहों तथा उत्तरदायी संस्थाओं के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
व्यवस्थाओं में सुधार न होने पर जन-आंदोलन की चेतावनी
पसमांदा मुस्लिम समाज के प्रमुख ने शासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पवित्र नगरी में निवास कर रहे भारतीय नागरिकों को अविलंब सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित नहीं किया गया और उन्हें तय मानकों के अनुरूप अनिवार्य सुविधाएं प्रदान नहीं की गईं, तो उनका संगठन इस घोर अन्याय और तानाशाही के विरुद्ध व्यापक स्तर पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन प्रारंभ करने के लिए विवश होगा। इस बीच, प्रशासनिक अव्यवस्था के इस बड़े विवाद के समानांतर ही पवित्र यात्रा की अंतिम चरण की उड़ानें भी निरंतर संचालित होती रहीं। शनिवार को प्रांतीय राजधानी लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दो विशेष वायुयानों के माध्यम से कुल 824 यात्री मदीना शहर के लिए सफलतापूर्वक रवाना हुए। समय सारणी के अनुसार, भोर में 3:25 बजे उड़ान भरने वाले प्रथम वायुयान में 398 यात्री सवार थे, जिनमें 212 पुरुष और 186 महिला श्रद्धालु सम्मिलित थीं। इस जत्थे में मुख्य रूप से लखनऊ के 94, सांस्कृतिक नगरी वाराणसी के 58, मऊ के 49, गोरखपुर के 32 और सीतापुर जनपद के 25 नागरिक शामिल थे। यात्रियों की सहायता के लिए इस 13वीं उड़ान में शासन द्वारा मनोनीत तीन विशेष प्रांतीय निरीक्षक भी साथ गए हैं।
अंतिम उड़ानों का विस्तृत विवरण और विभिन्न जनपदों के यात्रियों की सहभागिता
इसी क्रम में, शनिवार की रात्रि 10:05 बजे प्रस्थान करने वाले 14वें विमान ने 228 पुरुष और 198 महिला यात्रियों को लेकर सऊदी अरब के लिए उड़ान भरी। इस अंतिम जत्थे में वाराणसी जनपद के 112, बरेली के 45, औद्योगिक नगर कानपुर के 23, लखनऊ के 22, गोरखपुर के 21 और प्रयागराज के 20 श्रद्धालु सम्मिलित थे। राष्ट्रीय एकात्मकता के प्रतीक के रूप में इस विशेष उड़ान में देश की राजधानी दिल्ली के 3, छत्तीसगढ़ राज्य के 2 और बिहार प्रांत के भी 2 यात्रियों को स्थान दिया गया। इस जत्थे को यात्रा के दौरान तकनीकी और व्यावहारिक सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से तीन अन्य प्रांतीय निरीक्षकों को भी मदीना भेजा गया है। इसके अतिरिक्त, देश की मुख्य राजधानी दिल्ली के उड़ान केंद्र से भी शनिवार को दो विशेष अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन किया गया, जिसके माध्यम से केवल 147 प्रांतीय यात्री मदीना के लिए रवाना हो सके, जिनमें 81 पुरुष और 66 महिलाएं शामिल थीं, जबकि उस विमान की शेष सीटों पर अन्य राज्यों के श्रद्धालुओं ने यात्रा की।
चालू वर्ष के कुल यात्रियों के आधिकारिक आंकड़े
यदि चालू वर्ष 2026 की इस संपूर्ण पवित्र यात्रा के संचित आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो प्रशासनिक नियंत्रण कक्ष से प्राप्त अंतिम प्रतिवेदन के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्य उड़ान केंद्र लखनऊ से अंतिम विमान के प्रस्थान करने तक कुल 14 उड़ानों के माध्यम से 5921 नागरिकों को भेजा जा चुका है। वहीं, देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के केंद्र से 5971, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से 140 तथा राजस्थान की राजधानी जयपुर से 4 यात्रियों सहित कुल मिलाकर 12036 भारतीय श्रद्धालुओं को इस वर्ष पवित्र यात्रा के लिए सऊदी अरब भेजा गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि भारत में उड़ानों का संचालन पूरी तरह से निर्बाध रहा है, परंतु अब संपूर्ण ध्यान विदेशों में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक सुविधाएं सुनिश्चित कराने पर केंद्रित हो गया है।
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