
विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा नेताओं की उपस्थिति विभिन्न धार्मिक, सामाजिक मंचों पर रही। संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत नागपुर में, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू एवं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महेश्वर में आम जनता से रूबरू हुए। इन तीनों ही नेताओं के वक्तव्य, उनकी भाव भंगिमाओ पर गौर करें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा का प्रमुख लक्ष्य राष्ट्रवाद एवं सामाजिक सद्भाव के रूप में सामने दृष्टव्य है। सबसे पहले संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत के वक्तव्यों पर गौर करना उचित रहेगा। उन्होंने देश की सैन्य शक्ति बढ़ने और उसके मजबूत होने पर संतुष्टि जताई है। इसी के साथ अपनी अपेक्षाओं को भी मुखर किया है। भारत की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले की अपेक्षा अब ज्यादा सम्मान के साथ सुना जाता है। सकारात्मक और नकारात्मक वैश्विक घटनाओं के बीच भी बड़े-बड़े देश भारत एवं भारतीय सरकार से बड़ी-बड़ी अपेक्षाएं करने लगे हैं। इस अवस्था को लेकर श्री मोहन भागवत प्रसन्न एवं संतुष्ट नजर आए। उन्होंने अपने भाषण में भारत की इस अवस्था को गौरवशाली भी कहा यह देश के लिए गर्व की बात है। इसी प्रकार देश के राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी राजधानी दिल्ली में आयोजित एक रामलीला मंच पर नजर आए। दोनों ने बुराई के प्रतीक रावण के पुतले को आग दिखाई। वहीं यह स्पष्ट कर दिया कि जिस प्रकार भारत का गौरवशाली अतीत पूरे विश्व को मार्गदर्शित करता रहा है, आगे भी यह देश अपने पूर्वजों का सम्मान वैश्विक स्तर पर स्थापित करता रहेगा। देश के इन दोनों सर्वोच्च नेताओं ने भी भारतीय संस्कृति, संस्कार और पुरातन परंपराओं के प्रति सम्मान का प्रदर्शन किया। दोनों ही नेताओं ने जन-जन तक यह संदेश पहुंचाया कि हमें किसी भी विदेशी संस्कृति से प्रभावित होने की मजबूरी नहीं है। क्योंकि वर्तमान सरकार के नेतृत्व में भारत एक बार फिर अपने गौरवशाली अतीत की ओर तेजी से बढ़ रहा है और अब वह वैश्विक स्तर पर एक नेता के रूप में स्थापित होता जा रहा है। विश्व का मार्गदर्शन करने के लिए जिस आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है वह वर्तमान भारत के पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। तीसरी पायदान पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के विचारों को भी रखना होगा। उन्होंने विजयदशमी का पर्व महारानी अहिल्याबाई द्वारा स्थापित राजधानी केंद्र महेश्वर में मनाया। अब तक परंपरा रही है, जिसके मुताबिक अधिकांश मुख्यमंत्री राजधानी मुख्यालय भोपाल पर विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजन करते दिखाई देते रहे हैं। हालांकि गैर भाजपा सरकारों के दौरान शस्त्र पूजन के विधान को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया। लेकिन जब से मध्य प्रदेश की कमान भाजपा के मुख्यमंत्रियों के हाथों में रही है और अब डॉक्टर मोहन यादव इस दायित्व को भली भांति निभा रहे हैं, तब इस पुरातन परंपरा को पूरी तन्मयता के साथ निभाया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत डॉ मोहन यादव महेश्वर पहुंचे। वहीं पर शस्त्र पूजन किया और मध्य प्रदेश की जनता के नाम यह संदेश पहुंचा कि बात राजधानी की हो अथवा विकास की, अब भारतीय गौरव को और इतिहास की महान विभूतियों को आगे रखकर ही विकसित मध्य प्रदेश की परिकल्पना में विकास के रंग भरे जा सकेंगे। इस अवसर पर अनेक विकास की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करते हुए मुख्यमंत्री आम आदमी तक यह संदेश पहुंचाने में भी कामयाब रहे कि हम अपने त्यौहारों और आधुनिक भारत के बीच संतुलन बनाए रखेंगे। नूतन पुरातन को एक साथ लेकर आगे बढ़ेंगे और भारतीय विकास में सबसे बड़े सहभागी बनेंगे। यही वह नीति है जिसके तहत संकल्प दोहराया गया कि अब महाकाल लोक की तर्ज पर ही अहिल्या लोक का भी पुनर्निर्माण होगा। वहां के मंदिरों और नर्मदा नदी के घाटों का जीर्णोद्धार होगा। सड़कों का नया जाल बिछाया जाएगा। सबसे बड़ी परिकल्पना यह सामने आई कि लोकमाता अहिल्याबाई की स्मृति में इंदौर बटालियन का नामकरण किया जाएगा। उन्हीं के सम्मान में युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए नए कौशल उन्नयन कार्यक्रम आगे बढ़ाए जाएंगे। यहां मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक दायित्ववान स्वयंसेवक भी नजर आए। उन्होंने संघ की विचारधारा को सामने रखते हुए स्पष्ट किया कि यदि हमारे अस्त्र शस्त्र मजबूत हैं और हम उन्हें चलाने में पारंगत हैं तभी राष्ट्र की समुचित सुरक्षा की कल्पना की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि स्वयं मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान शस्त्र चालान का प्रदर्शन करते नजर आते रहे हैं। उन्हें दंड और तलवार चालन में पारंगत माना जाता है। इस प्रकार नागपुर, दिल्ली और महेश्वर से प्रस्तुत हुए संदेश में भारतीय संस्कारों और उसकी मजबूती के लिए सामाजिक सद्भाव का संदेश जन-जन तक भेजा गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि मध्य प्रदेश सहित देश के नागरिक विजयदशमी पर्व की संपन्नता के साथ ही यह संकल्प ले पाए होंगे कि अब हमें जातियों के नाम पर नहीं बंटना नहीं है। एकता के साथ राष्ट्र को विकास और सुरक्षा के पथ पर आगे बढ़ाना है और विश्व का नेतृत्व कर्ता बनना है।


