मेहनत रंग लाई मोहन सरकार की प्रदेश में निवेश का नया कीर्तिमान

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कौन कहता है आसमां में सुराख हो नहीं सकता।
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो !!

यह शेर मध्य प्रदेश शासन द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की सफलता पर एकदम सटीक बैठता है। किसी ने शायद ही उम्मीद की हो कि इस कार्यक्रम में धन की ऐसी वर्षा होगी कि भारत भर में संपन्न अभी तक की इन्वेस्टर समिटों को लेकर एक कीर्तिमान स्थापित हो जाएगा। लेकिन मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव को इस बात का पूर्वानुमान था। यह बात उनकी कार्यशैली और समिट की तैयारियों को देखकर बार-बार प्रलक्षित हो रही थी। जैसा कि सबको मालूम है, विपक्ष द्वारा इसको लेकर तरह-तरह की जुमलेबाजी की जा रही थी। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को पब्लिक का ध्यान भटकने का स्टंट मात्र बताया जा रहा था। लेकिन जैसा कि सब ने देखा, डॉक्टर मोहन यादव केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में जाकर भी अलग-अलग उद्योगपतियों से मिल रहे थे। उन्हें यह भरोसा दिला रहे थे कि भारत का हृदय प्रदेश , पहले की अपेक्षा और ज्यादा भरोसेमंद तथा असीमित संभावनाओं से परिपूर्ण है। यदि आप हमारे यहां निवेश करेंगे, तो हम विश्वास दिलाते हैं कि आप एक कदम आगे बढ़ाएंगे तो मध्य प्रदेश सरकार आपके भले के लिए चार कदम आगे आएगी। क्या उद्योगपति और क्या विदेशी सरकारों के प्रतिनिधि, सभी ने डॉक्टर मोहन यादव की बात पर भरोसा किया। यह इससे साबित हो गया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों का हुजूम उमड़ पड़ा। उम्मीदें तो पहले से ही थीं कि मध्य प्रदेश को इस मेहनत का फल अवश्य मिलेगा और निवेश के रूप में भारी भरकम धनराशि उपलब्ध होने जा रही है। लेकिन लोग उस समय आश्चर्यचकित रह गए जब बुद्धिजीवी लोग यह कहने लगे कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 में पूर्ण विकसित भारत का जो सपना देखा है, उसमें मध्य प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। यह इसलिए भी कहा गया, क्योंकि समिट संपन्न होते-होते प्रदेश की मोहन सरकार को 30.77 लाख करोड़ के एम ओ यू संबंधी प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं । उम्मीद की जा रही है कि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो निकट भविष्य में मध्य प्रदेश के लगभग पोने 22 लाख युवाओं को रोजगार मिलने जा रहा है। कहते हैं परिणाम प्राप्त करने के लिए सदैव ही मेहनत मशक्कत और रणनीति की आवश्यकता होती है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान यह सभी चीजें व्यापक परिदृश्य में सभी को देखने को मिलीं । निवेश करने की मंशा लेकर जो धनाढ्य वर्ग यहां आया था, उसे अपने व्यवहार से जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों ने यह भरोसा दिला ही दिया कि हम जो कह रहे हैं अंततः वही करके दिखाने वाले हैं। जैसा कि देखने को मिला, निवेशकों ने पर्यटन की दृष्टि से जो रुचि दिखाई, उसके अनुरूप उन्हें पूरी सुविधाओं के साथ वहां ले जाया गया और यह प्रतिपादित किया गया कि हम उनके आगमन और मध्य प्रदेश में निवेश को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं । इसी मंशा और तैयारी का नतीजा है कि विभिन्न क्षेत्रों में भारी भरकम धनराशि मध्य प्रदेश में निवेश होने जा रही है। सफलता का प्रमाण यह है कि जिन औद्योगिक घरानों से उम्मीदें की जा रही थीं वह सब यहां निवेश करने के लिए लालायित दिखाई दे रहे हैं। यहां तक कि पीडब्लूडी, विमानन, चिकित्सा शिक्षा, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, एमएसएमई, तकनीकी शिक्षा, कौशल रोजगार, विज्ञान प्रौद्योगिकी, पर्यटन, ऊर्जा, शहरी विकास आवास, खनिज, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा आदि क्षेत्रों में भारी भरकम निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। केवल इन्हीं क्षेत्रों में 24.51 लाख करोड़ का निवेश संभावित है और उम्मीद की जा रही है कि इन चुनिंदा क्षेत्रों में ही 16 लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलने जा रहा है। इनमें अदानी ग्रुप, रीजनल इंडस्ट्रीज कांक्लेव, इंटरएक्टिव क्षेत्र आदि को मिला दिया जाए तो निवेश 30 लाख से ऊपर जा रहा है और पौने 22 लाख तक रोजगार उत्पन्न होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। जैसा कि इस लेख के प्रारंभ में कहा गया है, यह सब कुछ अचानक या अपने आप प्राप्त नहीं हो गया। इसके लिए प्रदेश सरकार ने व्यापक रोड मैप में तैयार किए थे। जो नीतियां उद्योगपतियों को परेशानी पैदा करने वाली थीं उन्हें संशोधित किया गया। इसी के साथ सुविधाओं की दृष्टि से नई नीतियां तैयार की गईं । परिवहन और यात्रा के लिए एक व्यापक नीति बनाई गई। जिसमें सड़क, रेल, हवाई और जल मार्ग शामिल किए गए। साथ में कृषि क्षेत्र में किस प्रकार व्यापक लाभ हासिल किये जा सकते हैं, यह सब प्रतिपादित करने के लिए पहले से ही होमवर्क किया गया। यह सब देखने के बाद एक बात तो साफ हो गई है, वह यह कि यदि सरकार ठान ले तो वह क्या नहीं कर सकती। प्रमाण सभी के सामने है। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने अपनी मेहनत और भरोसे के बलबूते पर असंभव को भी संभव बना दिया है।

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