शराब की क्यों?… मोहन तो दूध दही और माखन की बात ही करेंगे

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जहां कहीं भी दूध दही मक्खन, और फिर इससे आगे बढ़कर गौ माता के भले की बात होती है तो अधिकांश विपक्षी राजनेताओं के पेट में बल पड़ने लगते हैं। उनके द्वारा एक प्रकार से शाब्दिक जुगाली का दौर शुरू हो जाता है। आरोप लगाए जाते हैं कि भाजपा तथा उसके द्वारा शासित सरकारों के पास हिंदू मुसलमान, धर्म और अधर्म जैसी बातें करने के अलावा और कुछ भी शेष नहीं होता है। अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सीहोर के एक धार्मिक मंच से कह दिया की जनमानस को हर घर में दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बारे में सोचना चाहिए। जहां तक आर्थिक विसंगतियों की बात है तो सरकार इस मामले में आड़े आने वाले प्रत्येक अवरोध को हटाने के लिए तैयार बैठी है। उन्होंने अपनी सरकार की कार्यप्रणाली का महिमा मंडन करने की बजाय बहुत स्पष्ट रूप से कहा कि कुपोषण की समस्या का निराकरण महिला एवं बाल विकास मात्र से संभव नहीं है। इसके लिए तो आम आदमी को दूध की तरफ लौटना पड़ेगा। उल्लेखनीय की मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा आयोजित रुद्राक्ष महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश सरकार भारी पैमाने पर गौशालाओं का निर्माण करा रही है। इन सभी स्थानों पर गौ माता के लिए प्राकृतिक परिवेश उपलब्ध कराने की पुरजोर कोशिश हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ माता एक दुधारू पशु मात्र न होकर, जीव एवं ईश्वर के बीच अटूट संबंध की सूत्रधार है। इसलिए गाय का संरक्षण, उसका संवर्धन होना ही चाहिए। सबसे अच्छी बात यह रही कि डॉक्टर मोहन यादव ने वृद्ध गोवंश की समस्या का निराकरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अब हम गायों को पालने के लिए₹40 प्रति गाय के हिसाब से अनुदान दे रहे हैं और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश के नगर निगम क्षेत्रों में इतनी विशाल और सुविधाजनक गौशालाएं बनाने जा रही हैं। जहां पर एक बार में 10,000 गायों को सहूलियत के साथ रखा जा सकेगा। उन्होंने आम जनता का आवाहन करते हैं हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति 10 अथवा उससे भी ज्यादा गायों का पालन पोषण करता है तो मध्य प्रदेश शासन की ओर से उसे अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री के भाषण के उस हिस्से की सबसे ज्यादा तारीफ हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा कि हमने अभी तक मध्य प्रदेश के 19 धार्मिक स्थानों पर शराब की दुकानें बंद कर दी हैं । इसी के साथ आम जनता से उम्मीद की जाती है कि वह शराब की बजाय अब दूध की दुकान खोलने का मन बनाए तथा शराब की दुकानों को बंद करने की कवायद में जुट जाएं। इससे एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार धीरे-धीरे ही सही लेकिन वह शराब बंदी की ओर सधे हुए कदम उठा रही है। सरकार की यह कार्य प्रणाली विशुद्ध रूप से आम जनता के हित में ही है। क्योंकि जब मुख्यमंत्री शराब की जगह दूध की हिमायत करने लग जाएं तो यह समझ जाना चाहिए कि अब हमारा प्रदेश बदल रहा है यहां की सरकार शराब से प्राप्त होने वाली भारी भरकम राशि के दबाव में ना आकर आम आदमी के स्वास्थ्य की चिंता करने लगा है। वैसे भी यह बात किसी से छुपी नहीं है की शराब की बिक्री से जितना भी धन सरकार को प्राप्त होता है उससे ज्यादा खर्चा शराब जनित समस्याओं के निराकरण में खर्च कर देना पड़ता है। उदाहरण के लिए यह गौर करना पर्याप्त है कि शराब पीकर व्यक्ति अधिकांश उपद्रव मचाता है और अपने स्वास्थ्य एवं आर्थिक समृद्धि का अपने ही हाथों सत्यानाश कर बैठता है। इससे एक ओर परिवार बर्बाद होते हैं तो दूसरी ओर कानून और व्यवस्था के लिए नित्य नई चुनौतियां प्रकट होती रहती हैं। लिखने का आशय यह कि शराब से प्राप्त राजस्व खजाने का कल्याण नहीं करता। बल्कि जितना धन प्राप्त होता है उससे अधिक सरकार को शराब से पैदा होने वाली समस्याओं, बीमारियों और प्रतिकूल अवस्थाओं से निपटने में खर्च कर देना पड़ता है। इससे अच्छा तो यही है कि अब केवल मध्य प्रदेश में ही क्यों, यहां के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की तरह अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को भी शराब के स्थान पर दूध की दुकानें खोले जाने की वकालत करनी चाहिए। इससे व्यक्ति का स्वास्थ्य सुधरेगा। परिवारों की आर्थिक समृद्धि दोबारा फलीभूत होगी और शराब पीकर कानून व्यवस्था के लिए जो प्रतिकूल हालात उत्पन्न हो रहे हैं उन्हें काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा। इस दृष्टि से देखें तो केवल आम जनता को ही नहीं, विपक्षी दलों को भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के इस निर्णय का मुक्त कंठ से स्वागत करना चाहिए। उम्मीद की जानी चाहिए, प्रदेश भर में जल्दी ही गौशालाओं का एक बड़ा नेटवर्क हम सभी को देखने को मिलेगा। साथ में दूध की उपलब्धता उसकी आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने जा रही है। मध्य प्रदेश भाजपा की मोहन यादव सरकार अपनी मंशा में सफल साबित हो, सतपुड़ा वाणी ऐसी कामना करता है।

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