एजेंसी, भोपाल। इंदौर के भागरीथपुरा में दूषित पेयजल से 35 लोगों की मौत के मामले में कांग्रेस ने गुरुवार को सदन में जमकर हंगामा और नारेबाजी की। वे प्रदेश नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के त्याग पत्र की मांग कर रहे थे। विपक्ष के सदस्यों ने आसंदी के सामने आकर प्रदर्शन किया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने पांच मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित की। इसके बाद दोपहर दो बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई है। प्रश्न काल में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने भागीरथपुरा का मामला उठाया। सिंघार ने कहा कि जब सदन में 45 मिनट कुत्तों पर चर्चा कराई जा सकती है तो फिर जिस मामले में इतने इंसानों की जान गई है, उसे पर चर्चा क्यों नहीं। उन्होंने कहा, सरकार असंवेदनशील हो रही है। यह मृत्यु नहीं हत्याएं हैं।
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छिंदवाड़ा में कफ सीरप का मामला हो या भागीरथपुरा का, मंत्री भी इनके जिम्मेदार हैं। इन्हें नैतिकता के आधार पर त्याग पत्र देना चाहिए। सत्ता पक्ष की ओर से मंत्री प्रहलाद पटेल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीता शरण शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि इस विषय पर सदन में चर्चा ही नहीं होनी चाहिए, क्योंकि न्यायिक आयोग गठित हो चुका है। कानूनी प्रक्रिया चल रही है। नियम भी यही है कि ऐसे मामलों पर चर्चा नहीं कराई जा सकती है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, मैंने आश्वासन दिया था कि इस विषय पर चर्चा कराऊंगा, इसलिए प्रश्न तक ही सीमित रहें और यह भी ध्यान रखें कि न्यायिक मर्यादा का उल्लंघन ना हो।
सांप-बिच्छू के काटने से मौत पर चार लाख तो भागीरथपुरा में दो लाख क्यों
सिंघार ने पूछा, दूषित जल के मामले में कितनी मौतें हुई है तो मंत्री की ओर से बताया गया कि 22 प्रश्न दिनांक तक और उसके बाद दो अन्य मौतें हुई हैं। दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। इस पर उमंग ने कहा कि सांप-बिच्छू के काटने से मौत हो जाने पर चार-चार लाख रुपये दिए जाते हैं, लेकिन इस मामले में राशि तक नहीं बढ़ा कर दी गई। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सदन को बताया 21 दिसंबर 2025 के से उत्तर दिनांक तक एक्यूट डायरियल डिजीज के कारण 20 मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि हुई है। 495 व्यक्ति अस्पताल में भर्ती किए गए और वर्तमान में चार मरीज उपचार करा रहे हैं।


