विकसित प्रदेश की संकल्पना और सीएम का लोक-कल्याणकारी विजन : मध्यप्रदेश की राजनीति और विकास के फलक पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दो वर्ष का कार्यकाल एक ऐसी आधारशिला के रूप में उभरा है, जहां परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम दिखाई देता है। नए साल 2026 के आगमन के साथ ही सूबे के मुखिया ने प्रदेश की 9 करोड़ जनता के लिए जो परिकल्पना पेश की है, वह केवल सरकारी घोषणाओं का पुलिंदा नहीं, बल्कि एक समावेशी और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का रोडमैप है। डॉ. यादव का नेतृत्व आज उस दिशा में अग्रसर है, जहां समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का ईमानदार प्रयास साफ झलकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित चार स्तंभों—महिला, किसान, युवा और गरीब—को आधार मानकर जिस तरह मध्यप्रदेश सरकार ने मिशन मोड में काम शुरू किया है, वह प्रदेश की प्रगति को एक नई गति देने वाला है। साल 2024 को महिला वर्ष और 2025 को रोजगार एवं उद्योग वर्ष के रूप में समर्पित करने के बाद अब 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाने का संकल्प लेना यह दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकताएं कितनी सुस्पष्ट और जनकेंद्रित हैं।
मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं और जब प्रदेश का अन्नदाता सशक्त होगा, तभी समूचे राज्य की समृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी। डॉ. मोहन यादव ने कृषि को केवल जीवनयापन का साधन न मानकर उसे एक उन्नत उद्यम में बदलने का जो बीड़ा उठाया है, उसके केंद्र में ‘कृषि वर्ष 2026’ की संकल्पना है। इस संकल्प के तहत सिंचाई के रकबे को वर्तमान 56 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। ‘नदी जोड़ो अभियान’ के माध्यम से प्रत्येक गांव और प्रत्येक खेत तक पानी पहुँचाने की यह प्रतिबद्धता आने वाले समय में प्रदेश की कृषि विकास दर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। इसके साथ ही, किसानों को बिजली के बिलों के भारी-भरकम बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए सोलर पंपों को बढ़ावा देना एक क्रांतिकारी कदम है। जब किसान अपनी बिजली खुद पैदा करेगा, तो न केवल उसकी उत्पादन लागत कम होगी, बल्कि वह ऊर्जा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनेगा। यह दूरगामी सोच बताती है कि मुख्यमंत्री केवल आज की समस्याओं का समाधान नहीं कर रहे, बल्कि भविष्य के समृद्ध मध्यप्रदेश की नींव रख रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन में केवल खेती-किसानी ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन को सुगम बनाने वाली बुनियादी सुविधाओं पर भी गहरा जोर है। मध्यप्रदेश में ‘सुगम परिवहन सेवा’ का पुनरुद्धार इस दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। दशकों से राज्य में एक सुव्यवस्थित सरकारी परिवहन तंत्र की कमी महसूस की जा रही थी, जिसका सबसे अधिक खामियाजा गरीब और मध्यम वर्ग को भुगतना पड़ता था। सड़कों के जाल बिछने के बाद अब उन सड़कों पर सस्ती और सुलभ सरकारी बस सेवा उपलब्ध कराना मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह सेवा न केवल गांवों और शहरों के बीच की दूरी कम करेगी, बल्कि आम आदमी के आर्थिक बोझ को भी कम करेगी। इसके साथ ही, इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट को एग्रीकल्चर ग्रोथ रेट के साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ाना डॉ. यादव की आर्थिक सूझबूझ का परिचायक है। उनका मानना है कि जब तक कृषि आधारित उद्योगों का विकास नहीं होगा, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अपेक्षित उछाल नहीं आएगा।
डॉ. मोहन यादव का व्यक्तित्व एक ऐसे राजनेता का है जो सादगी और शुचिता के पक्षधर हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन के निर्णयों से समाज के सामने एक उदाहरण पेश किया है। शादियों में होने वाले फिजूलखर्च और दिखावे के खिलाफ उनका रुख न केवल उपदेशात्मक है, बल्कि उन्होंने इसे अपने परिवार में लागू करके दिखाया है। अपने बेटों की शादी सादगी और सामूहिक विवाह सम्मेलन के माध्यम से संपन्न कराना यह संदेश देता है कि सामाजिक कुरीतियों को केवल भाषणों से नहीं, बल्कि आचरण से बदला जा सकता है। उनके परिवार द्वारा मां नर्मदा की परिक्रमा को प्राथमिकता देना हमारी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति उनके अगाध सम्मान को प्रकट करता है। नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है और मुख्यमंत्री का यह अध्यात्मिक जुड़ाव प्रदेश की प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के प्रति उनकी निष्ठा को भी रेखांकित करता है। उनके लिए नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि प्रदेश की अस्मिता और समृद्धि का प्रवाह है।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी मुख्यमंत्री के संकल्प अभूतपूर्व हैं। हर जिले में मेडिकल कॉलेज बनाने का लक्ष्य और बजट को दोगुना करना यह सुनिश्चित करेगा कि प्रदेश का कोई भी नागरिक बेहतर इलाज के अभाव में परेशान न हो। स्वास्थ्य सेवाओं का यह विकेंद्रीकरण मध्यप्रदेश के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में दर्ज होगा। इसके साथ ही, विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम ‘सिंहस्थ’ की तैयारियां भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश की प्रबंधकीय क्षमता और सांस्कृतिक वैभव को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर है। डॉ. यादव की देखरेख में उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों का जो कायाकल्प हो रहा है, वह भविष्य के पर्यटन और विकास की नई इबारत लिखेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि मध्यप्रदेश की 9 करोड़ जनता में अद्भुत प्रतिभा, तकनीकी योग्यता और बौद्धिक क्षमता है। वे प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों और मानव पूंजी के सही मेल से भारत को विश्व पटल पर एक ताकत बनाने के प्रधानमंत्री के स्वप्न में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे रहे हैं। उनका यह दृष्टिकोण कि मध्यप्रदेश को विकसित भारत के संकल्प के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है, प्रदेशवासियों में एक नया आत्मविश्वास पैदा करता है। कुल मिलाकर, आगामी वर्षों के लिए डॉ. मोहन यादव की यह कार्ययोजना न केवल बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता और आर्थिक स्वावलंबन का एक संपूर्ण पैकेज है। 2026 का ‘कृषि वर्ष’ और ‘सुगम परिवहन सेवा’ का आगाज निश्चित रूप से एक स्वर्ण युग की शुरुआत होगी, जिससे मध्यप्रदेश न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में अपनी जगह और भी मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री का यह ‘लोक-नीति’ और ‘अध्यात्म’ का समन्वय मध्यप्रदेश को एक नई पहचान दिलाने की ओर अग्रसर है।
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