लोन नहीं चुकाया तो जब्त हो जाएगी प्रॉपर्टी, आरबीआई ने दिया प्रस्ताव
एजेंसी, लखनऊ, नई दिल्ली। क्या आपने बैंक से लोन लिया है और उसे चुका नहीं पा रहे हैं? या फिर आप एक निवेशक हैं जो बैंकिंग सेक्टर पर नजर रखते हैं? तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों और एनबीएफसी के लिए कर्ज वसूली यानी लोन रिकवरी से जुड़े नए नियमों का एक बड़ा मसौदा पेश किया है। अब तक बैंक अक्सर कानूनी दांव-पेंच में फंसे रहते थे, लेकिन अब भारतीय रिजर्व बैंक के नए प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई कर्ज एनपीए (डूब चुका कर्ज) हो जाता है, तो बैंक वसूली के लिए गिरवी रखी गई जमीन या मकान जैसी अचल संपत्तियों को सीधे अपने कब्जे में ले सकेंगे। इन्हें तकनीकी भाषा में एसएनएफए कहा जाएगा।
The RBI plans to tighten how banks handle assets seized during loan recovery and reduce NPAs.
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— DNA (@dna) May 6, 2026
लेकिन रुकिए! यहां बैंकों के लिए कुछ सख्त शर्तें भी हैं-
बैंक इन संपत्तियों के मालिक बनकर हमेशा के लिए नहीं बैठ सकते। उन्हें कब्जा लेने के 7 साल के भीतर हर हाल में उस प्रॉपर्टी को बेचना होगा।
आरबीआई का मानना है कि संपत्तियों को सही समय पर और पारदर्शी तरीके से बेचने से बैंकों को अपना ज्यादा से ज्यादा पैसा वापस मिलेगा।
यह नियम केवल तभी लागू होंगे जब वसूली के बाकी तमाम रास्ते बंद हो चुके हों।
इस खेल में किसी भी तरह की ‘सेटिंग’ या गड़बड़ी को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक कड़ा नियम रखा है। बैंक यह संपत्ति वापस उसी उधार लेने वाले व्यक्ति या उससे जुड़े किसी भी शख्स को नहीं बेच पाएंगे। यानी, डिफॉल्टर अब अपनी ही संपत्ति को कम दाम में वापस खरीदने का खेल नहीं खेल सकेंगे।
आरबीआई ने इस ड्राफ्ट पर आम जनता और विशेषज्ञों से 26 मई तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। साफ है कि बैंकिंग सिस्टम को साफ-सुथरा बनाने और बैंकों का फंसा हुआ पैसा निकालने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
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