एजेंसी, अम्मान। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को जॉर्डन की अपनी यात्रा के ठोस नतीजों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन, संस्कृति और डिजिटल नवाचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग का “सार्थक विस्तार” हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को शाह अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा पर जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुंचे।
प्रधानमंत्री मोदी की चार दिवसीय तीन देशों की यात्रा का पहला पड़ाव जॉर्डन है। इसके बाद वह इथियोपिया और ओमान भी जाएंगे। भारत और जॉर्डन ने सोमवार को द्विपक्षीय संबंधों और मित्रता को बड़ा प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से संस्कृति, नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा पेट्रा और एलोरा के बीच ‘ट्विनिंग’ (जुड़वां) व्यवस्था के क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। मंगलवार को सोशल मीडिया पर किए गए कई पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये उपलब्धियां भारत-जॉर्डन साझेदारी के ‘‘सार्थक विस्तार’’ को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि नयी और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग ‘‘स्वच्छ विकास, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु जिम्मेदारी के प्रति साझा प्रतिबद्धता’’ को प्रतिबिंबित करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जल संसाधन प्रबंधन और विकास में सहयोग से दोनों देश संरक्षण, दक्षता और तकनीक से जुड़ी सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा कर सकेंगे, जिससे दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सांस्कृतिक सहयोग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रा और एलोरा के बीच ट्विनिंग समझौता ‘‘विरासत संरक्षण, पर्यटन और शैक्षणिक आदान-प्रदान के नए अवसर’’ खोलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 2025-2029 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के नवीनीकरण से दोनों देशों के लोगों के बीच परस्पर संबंध और मजबूत होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के डिजिटल नवाचारों को जॉर्डन के साथ साझा करने से वहां के डिजिटल परिवर्तन को समर्थन मिलेगा और समावेशी शासन को बढ़ावा मिलेगा। मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में विदेश मंत्रालय में सचिव (दक्षिण) नीना मल्होत्रा ने बताया कि शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक में आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के लिए मजबूत समर्थन व्यक्त किया और आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘‘कट्टरपंथ उन्मूलन’’ के क्षेत्र में शाह अब्दुल्ला के नेतृत्वकारी प्रयासों की सराहना की। मोदी की जॉर्डन यात्रा भारत और अरब देश के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रही है। यह प्रधानमंत्री की जॉर्डन की पहली पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा है। इससे पहले, फरवरी 2018 में वह फलस्तीन जाते समय जॉर्डन से होकर गुजरे थे। भारत और जॉर्डन के बीच मजबूत आर्थिक संबंध हैं, जिसमें नयी दिल्ली अम्मान का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का मूल्य 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर है। जॉर्डन भारत को उर्वरकों, विशेष रूप से फॉस्फेट और पोटाश का प्रमुख आपूर्तिकर्ता भी है। इस अरब देश में 17,500 से अधिक लोगों का एक सशक्त भारतीय समुदाय भी रहता है, जो वस्त्र, निर्माण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में कार्यरत है। जॉर्डन के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण में इथियोपिया जाएंगे।

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भारत और जॉर्डन के संबंधों में गर्मजोशी को दर्शाते हुए अरब देश के युवराज अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को स्वयं वाहन चलाकर जॉर्डन संग्रहालय लेकर गए। युवराज पैगंबर मोहम्मद के 42वीं पीढ़ी के सीधे वंशज हैं। प्रधानमंत्री मोदी जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा पर सोमवार को जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुंचे थे। जॉर्डन प्रधानमंत्री की चार दिवसीय यात्रा का पहला पड़ाव है। इस यात्रा के दौरान वह इथियोपिया और ओमान भी जाएंगे। अम्मान के रस अल-ऐन इलाके में स्थित जॉर्डन संग्रहालय देश का सबसे बड़ा संग्रहालय है। इसमें जॉर्डन की कुछ सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहरों का प्रदर्शन किया गया है। वर्ष 2014 में निर्मित यह संग्रहालय प्रागैतिहासिक काल से लेकर वर्तमान समय तक क्षेत्र की सभ्यतागत यात्रा को दर्शाता है। संग्रहालय में 15 लाख वर्ष पुरानी जानवरों की हड्डियां और चूना प्लास्टर से बनीं 9,000 वर्ष पुरानी ऐन गजल मूर्तियां हैं जिन्हें दुनिया की सबसे प्राचीन निर्मित मूर्तियों में शामिल किया जाता है।
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