एजेंसी, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष के लिए 2.81 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त खर्च की मंजूरी हेतु लोकसभा में प्रस्ताव रखा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अनुदान की अनुपूरक मांगों का दूसरा हिस्सा सदन के पटल पर रखा। इस प्रस्ताव के अनुसार, कुल 2,81,289.26 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च की मंजूरी मांगी गई है, जिसमें से लगभग 2.01 लाख करोड़ रुपये नकद खर्च के लिए हैं और शेष राशि मंत्रालयों की बचत या अन्य प्राप्तियों से पूरी की जाएगी।
लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के संकल्प पर मचा बवाल बजट मांगों के बीच लोकसभा में उस वक्त तीखा टकराव देखने को मिला जब विपक्ष ने अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए सदन में एक संकल्प पेश कर दिया। इस प्रस्ताव के समर्थन में 50 से अधिक सांसद अपनी सीटों पर खड़े हुए, जिसके बाद पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने इसे प्रस्तुत करने की अनुमति दी। हालांकि, इस प्रक्रिया पर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि जगदंबिका पाल की नियुक्ति स्वयं अध्यक्ष ने की है, इसलिए वे इस संकल्प के दौरान पीठासीन अधिकारी की भूमिका नहीं निभा सकते। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उपाध्यक्ष का पद खाली होने पर आपत्ति जताई। दूसरी ओर, भाजपा सांसदों और सरकार ने विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया।
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राज्यसभा में मतदाता सूची विवाद: विपक्ष ने किया वॉकआउट सदन की कार्यवाही के दौरान राज्यसभा में भी भारी शोर-शराबा हुआ। विपक्षी दलों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर तुरंत चर्चा की मांग की। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि कई राज्यों में लोगों के नाम मतदाता सूचियों से जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। जब सभापति ने इस पर चर्चा की अनुमति नहीं दी, तो विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया। सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष के इस व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि चुनाव सुधारों पर पहले ही लंबी चर्चा हो चुकी है और विपक्ष केवल संसदीय परंपराओं में बाधा डाल रहा है।


