
कर्म प्रधान विश्व रचि राखा ।
जो जस करहि सो तस फल चाखा।।
उपरोक्त पंक्तियों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पर एकदम सटीक बैठती हैं । क्योंकि डॉक्टर मोहन यादव ही वह शख्स हैं, जिन्होंने एक मध्यम वर्गीय परिवार का सदस्य रहते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहकर राजनीति की शुरुआत की। इसके बाद अनेक छोटे बड़े पदों पर रहते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी में दायित्वों का निर्वहन किया। इसके बाद आप मध्य प्रदेश की कैबिनेट में मंत्री भी बने और अब सूबे के मुख्यमंत्री होने का महत्वपूर्ण कर्तव्य निभा रहे हैं। खास बात यह है कि उन्हें ये पद और रुतबा सहज ही प्राप्त नहीं हुए। इसके लिए डॉक्टर मोहन यादव ने शिक्षा के साथ-साथ राजनीति एवं समाज सेवा के क्षेत्र में काफी पसीना बहाया है। यदि शिक्षा की बात करें तो श्री यादव ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से विज्ञान स्नातक (बीएससी) की डिग्री प्राप्त प्राप्त कर रखी है। उन्होंने अपनी शैक्षणिक रुचियों को आगे बढ़ाया और उसी विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से एलएलबी, मास्टर ऑफ आर्ट्स (एमए), मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) और डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की डिग्री पूरी की।
पेशे से वकील भी रहे डॉक्टर मोहन यादव के पास एमबीए, पीएचडी और राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री है। उल्लेखनीय है कि उन्होंने अपना पहला चुनाव 1982 में जीता था, जब उन्होंने उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय में छात्र संघ का चुनाव लड़ा था। उक्त चुनाव के दौरान वे संयुक्त सचिव चुने गए थे। इसके दो साल बाद वे डॉ मोहन यादव इसी महाविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए। डॉक्टर मोहन यादव ने 1990-92 में इसके राष्ट्रीय सचिव बनने से पहले, उज्जैन शहर और राज्य स्तर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में कई पदों पर कार्य किया । यूं तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा में उनका रुझान शुरू से ही रहा। लेकिन वर्ष 1990 के बाद तो वह खुलकर संघ कार्य करने लगे। इसी दौरान उन्होंने उज्जैन सह खंड कार्यवाह के रूप में अपनी संगठनात्मक क्षमताओं को दिखाया और उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उनके बेहद नजदीकी सूत्रों के अनुसार 2013 में, उन्होंने चुनावी राजनीति में प्रवेश किया और उज्जैन दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा। उन्होंने 2013 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में उज्जैन दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की।
2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में वे पुनः इसी विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए । खास बात यह रही कि वर्ष 2020 में, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट सदस्य के रूप में शपथ ली । वे 2023 तक एमपी के उच्च शिक्षा मंत्री थे। 2023 के मध्य प्रदेश राज्य विधानसभा चुनावों में, वह एक बार फिर उज्जैन दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़े और जीते। यदि डॉक्टर मोहन यादव के बतौर मुख्यमंत्री कार्य प्रणाली पर गौर करें तो उल्लेखनीय कार्य यह है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मोहन यादव ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर निर्धारित सीमा और समय के बाद लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी । इसके बाद श्री यादव ने यह भी कहा कि धार्मिक नेताओं के साथ समन्वय करके लाउडस्पीकर हटाने का काम आगे भी जारी रखा जाएगा। डॉ मोहन यादव के मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए पहले निर्णयों में से एक खाद्य सुरक्षा अधिनियम और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य के भीतर मांस, मछली और अंडे जैसे मांसाहारी भोजन की खुली बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना है। उनके अन्य चर्चित कार्यों की बात करें तो असामाजिक तत्वों द्वारा अपराध किए जाने पर उनके घरों पर ठीक उसी प्रकार बुलडोजर चलाए गए जैसे अभी तक केवल उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ योगी द्वारा ही चलाए जाते रहे हैं।
वर्तमान में डॉक्टर मोहन यादव ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को जमीन पर साकार करने में लगे हुए हैं। मालूम ही है कि इस समारोह के दौरान उन्होंने देश और विधि के उद्योगपतियों, व्यवसाइयों और पूंजीपतियों को बड़े पैमाने पर मध्य प्रदेश में पैसा लगाने के लिए राजी किया। अभी तक संपन्न हुए अनुबंधों के मुताबिक यह आश्वस्त हुआ जा सकता है कि जल्दी ही हमारे प्रदेश में कई नए बड़े उद्योग स्थापित होने जा रहे हैं। जिनके माध्यम से एक ओर खजाने को भारी राजस्व मिलेगा जो विकास कार्यों के काम आने वाला है। जबकि बेरोजगारों को बड़े स्तर पर नौकरियां प्राप्त होने की राह बन रही है। प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयां देकर जनता का विश्वास हासिल करने वाले डॉक्टर मोहन यादव को उनके जन्मदिन की अनेक शुभकामनाएं।


