मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आयोजित एमएसएमई सम्मेलन 2025 में शामिल होकर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम सेक्टर एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम उठाया है। प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में नई ऊर्जा का संचार करते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह सिद्ध कर दिया कि उनकी सरकार ‘आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। यह सम्मेलन प्रदेश की औद्योगिक प्रगति को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बना, जिसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चेतन्य काश्यप की उपस्थिति ने इस पहल के महत्व को और बढ़ाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह दौरा केवल एक औपचारिक उपस्थिति नहीं थी, बल्कि यह प्रदेश के लाखों उद्यमियों और युवाओं के सपनों को साकार करने की दिशा में एक ठोस प्रयास था। इसी कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एमएसएमई विकास नीति के अंतर्गत एक अभूतपूर्व पहल करते हुए, प्रदेश के 48 जिलों की 700 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को सिगंल क्लिक के माध्यम से ₹200 करोड़ से अधिक की अनुदान राशि अंतरित की। यह डिजिटल माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खाते में राशि पहुँचाना न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार कितनी तत्परता से छोटे उद्योगों के विकास में सहयोग कर रही है। यह अनुदान राशि इन इकाइयों को प्रतिस्पर्धा में बने रहने, विस्तार करने और नए रोज़गार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण मदद करेगी। स्टार्टअप्स को ₹1 करोड़ से अधिक की सहायता राशि : युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत प्रदेश के 80 से अधिक स्टार्टअप्स को ₹1 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का वितरण किया। यह वित्तीय सहायता मध्य प्रदेश के इनोवेशन और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि प्रदेश के युवा न केवल रोज़गार की तलाश करें, बल्कि रोज़गार प्रदाता बनें। औद्योगिक विस्तार और बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ₹113.78 करोड़ की लागत के 03 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों का वर्चुअली शिलान्यास करके औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का संकेत दिया। साथ ही, एमएसएमई विभाग के औद्योगिक क्षेत्रों में विभिन्न उद्यमों को 200 से अधिक भूखण्डों के आवंटन का आशय पत्र वितरित करना प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विस्तार के प्रति सरकार के सकारात्मक रवैये को दर्शाता है। रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा : सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में 350 से अधिक हितग्राहियों को ऋण उपलब्ध कराया जाना और कार्यक्रम में 100 से अधिक हितग्राहियों को हितलाभ वितरण करना यह सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव केवल बड़ी परियोजनाओं पर ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर छोटे और मध्यम वर्ग के उद्यमियों को सशक्त बनाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। तकनीकी सहयोग और भविष्य की ओर कदम : सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग एवं ओएनडीसी के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होना प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों को राष्ट्रीय और वैश्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह एमओयू स्थानीय उत्पादों को बड़े बाज़ार तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होगा, जो ‘लोकल फॉर वोकल’ की अवधारणा को बल देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा बालाघाट और टीकमगढ़ के उद्यमियों और उद्योग संघों से वर्चुअली संवाद करना यह दर्शाता है कि वह दूरदराज के क्षेत्रों के उद्योगों की समस्याओं और संभावनाओं को जानने के लिए तत्पर हैं। लिखने का आशय यह है कि एमएसएमई सम्मेलन 2025 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए एक ‘मील का पत्थर’ साबित हुआ है। वित्तीय सहायता, बुनियादी ढांचे का विस्तार, तकनीकी एकीकरण (ओएनडीसी के साथ एमओयू), और युवा स्टार्टअप को प्रोत्साहन—ये सभी पहलें एक ऐसे समावेशी और प्रगतिशील औद्योगिक मॉडल की नींव रखती हैं जो प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाने की क्षमता रखती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शिता और सक्रिय पहल निश्चित रूप से मध्य प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में एक नए स्वर्णिम युग का सूत्रपात करेगी।


