विकास और सेवा के दो साल

मोहन यादव के दो वर्ष : उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य की योजनाएं

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मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव के दो वर्ष का कार्यकाल मध्य प्रदेश के लिए विकास, सुशासन और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। 13 दिसंबर को यह सफर दो साल पूरे कर चुका है, जिसमें सरकार ने कई चुनौतियों का सामना किया और उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, साथ ही आगामी तीन वर्षों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी तैयार किया है। ​मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में राज्य को नक्सलवाद से लगभग मुक्त करने को बताया है। यह एक ऐसी समस्या थी जिसने दशकों से मंडला, बालाघाट और डिंडौरी जैसे क्षेत्रों को प्रभावित कर रखा था। उन्होंने पिछली सरकारों के समय हुई दुखद घटनाओं, जैसे कि तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासनकाल में एक मंत्री की हत्या का हवाला देते हुए, मौजूदा सरकार की कड़े और प्रभावी कदम उठाने की रणनीति को रेखांकित किया। बीते एक वर्ष में 10 नक्सलवादियों को मार गिराना और तीन बार राज्य के बाहर जाकर आत्मसमर्पण करना, इस रणनीति की सफलता का प्रमाण है। गृह मंत्री जी के मार्गदर्शन और संसाधनों के सही उपयोग से मध्य प्रदेश इस गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती से पार पाने में सफल रहा है। ​आर्थिक मोर्चे पर, मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य का बजट हर बार बढ़कर राज्य की संपन्नता और सक्षमता को दर्शा रहा है। औद्योगिक विकास दर (इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट) में वृद्धि हुई है, और जीआईएस (ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट) के माध्यम से लाखों करोड़ के निवेश प्रस्ताव आ रहे हैं, जो राज्य की प्रगति के उत्साहवर्धक चिन्ह हैं। माइनिंग टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में भारत सरकार से पुरस्कार प्राप्त करना सुशासन की दिशा में उठाए गए कदमों को प्रमाणित करता है। ​चुनौतियों के संबंध में डॉ. यादव ने एक कार्यकर्ता के रूप में अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का उल्लेख किया और कहा कि उनके लिए प्रधानमंत्री जी का गुजरात मॉडल सबसे आदर्श रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य को चरणबद्ध रूप से हर समस्या से बाहर लाया गया है। वर्तमान में, मध्य प्रदेश तेज गति से आगे बढ़ने वाले राज्यों में शामिल है। शिक्षा के क्षेत्र में जीईआर (सकल अनुपात दर) में सबसे आगे होना, पहले से ही मजबूत कृषि विकास दर, और बिजली-पानी की सरप्लस उपलब्धता राज्य की मजबूत नींव को दर्शाती है। एमएसएमई, हेवी और लघु-कुटीर तीनों क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश की दिशा में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। ​मुख्यमंत्री ने रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न सरकारी विभागों में बड़े पैमाने पर पदों को मंजूरी दी है। उनके कार्यकाल में लगभग 60 हजार से ज्यादा पद विभिन्न विभागों में दिए जा चुके हैं, जिसमें बिजली विभाग में लगभग 50 हजार, हेल्थ डिपार्टमेंट में 42 हजार, और पुलिस में 22,500 अधिकारी और पुलिसकर्मियों की भर्ती शामिल है।

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उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और शुद्धता पर जोर दिया और दावा किया कि राज्य में किसी भी परीक्षा के पेपर आउट नहीं हुए हैं। भविष्य में, सभी प्रकार के पदों के लिए एक ही एग्जाम से भर्ती की एक नई डिज़ाइन पर भी काम किया जा रहा है। ​बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के संदर्भ में, उन्होंने बताया कि 6 लाख करोड़ के काम विभिन्न इंडस्ट्रीज में चालू हो चुके हैं, जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा, दो लाख करोड़ के लोकार्पण और भूमिपूजन के लिए गृह मंत्री जी को निमंत्रण दिया गया है। सागर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से खाद कारखाने का निर्माण और चालू होना, जो इसी साल की फसल के लिए खाद उपलब्ध करा रहा है, एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 30 हजार करोड़ का एक नया पार्क भी मंजूर किया गया है, जिससे लगभग 30 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। ​कृषि के क्षेत्र में, सिंचाई का रकबा लगातार बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री ने खाद की सरप्लस उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय उर्वरक मंत्री से डबल खाद प्राप्त करने का उल्लेख किया। उन्होंने एसएमएस से घर पहुंच सेवा के माध्यम से खाद पहुंचाने की भविष्य की योजना का भी खुलासा किया। इसके अतिरिक्त, राज्य में मेट्रो प्रोजेक्ट का लोकार्पण होने वाला है, जिसके लिए नगरीय विकास मंत्री मनोहर लाल खट्‌टर स्वयं आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मास्टर प्लान के साथ मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया है। ​सुशासन के पैरामीटर्स को लागू करते हुए, मुख्यमंत्री ने कानून का राज स्थापित करने पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि जब एक मंत्री के सगे भाई को पुलिस ने गिरफ्तार किया, तो यह दर्शाता है कि उनकी सरकार में जो गलत करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, जबकि कांग्रेस शासन में ऐसे मामलों पर मुकदमा तक नहीं होता था। उन्होंने पुलिस बल के अच्छे कामों पर पीठ थपथपाने और कमी-कमजोरी होने पर कड़ाई से पेश आने की नीति अपनाई है। ​आने वाले तीन सालों की योजना के तहत, उन्होंने औद्योगिक विकास दर को और मजबूत करने, कृषि विकास दर के साथ सिंचाई का रकबा बढ़ाने, सोलर पावर कनेक्शन जल्दी दिलाने, गरीबों और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और नारी सशक्तिकरण की योजना लाने का संकल्प लिया है। ​व्यक्तिगत मोर्चे पर, मुख्यमंत्री ने सामाजिक समरसता और दिखावे से बचने के अपने आदर्शों को साझा किया। उन्होंने अपने बड़े बेटे की शादी 50 लोगों के बीच करने और छोटे सर्जन बेटे की शादी सामूहिक विवाह में करने के निर्णय का उल्लेख किया। उनका मानना है कि दिखावे में खर्च करने से गरीब और मध्यमवर्गीय पर अनावश्यक बोझ पड़ता है। उन्होंने लोगों से अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने और माता-पिता/परिजनों के निधन पर मौत-मैयत पर बड़ा खर्च न करने की अपील की, जिससे सामाजिक समरसता और आर्थिक संतुलन बना रहे। ​कुल मिलाकर, डॉ. मोहन यादव का दो वर्ष का कार्यकाल नक्सलवाद के उन्मूलन, औद्योगिक प्रगति, सुशासन और सामाजिक उत्थान की दिशा में एक मजबूत नींव रखने वाला रहा है। आगामी तीन वर्षों में, इन उपलब्धियों को और गति देने और राज्य को हर क्षेत्र में बेहतर से बेहतर बनाने का संकल्प लिया गया है।

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