
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार महिलाओं और कन्याओं को काफी रास आ रही है। इसकी वजह यह है कि सावन के महीने की शुरुआत होते ही स्वयं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने को महिलाओं के भाई और कन्याओं के मामा के रूप में स्थापित कर दिखाया है। हाल ही में जब सिंगरौली जिले के चितरंगी और सतना जिले के चित्रकूट क्षेत्र में लाडली बहना उत्सव का शुभारंभ हुआ तो दोनों ही जगह पर डॉक्टर मोहन यादव मामा और भाई के अवतार में ही नजर आए। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने से पहले छोटी-छोटी कन्याओं को झूलों पर बिठाकर उन्हें काफी देर तक झुलाया। इस दौरान कन्याओं की माताएं भी सावन के गीत गाने से नहीं चूकीं। इसके बाद आप महिलाओं के बीच पहुंचे और पूरी तन्मयता के साथ उनसे रक्षा सूत्र बनवाते दिखाई दिए। इन कार्यक्रमों की खास बात यह रही कि औपचारिक लिहाज से तैनात संबंधित विभागों के अधिकारी मंच पर मुख्यमंत्री के आगमन की प्रतीक्षा करते रहे। उन्हें प्रतीक्षा थी कि मुख्यमंत्री मंच पर आएं और लाडली बहनों के खातों में उनकी किस्त जारी करने की सूचना देते हुए रक्षाबंधन का शगुन देने की घोषणा भी करें। जबकि डॉक्टर मोहन यादव इस सबसे बेखबर कन्याओं और महिलाओं के बीच मौजूद रहकर उनके एक पारिवारिक सदस्य के रूप में आत्मीय आनंद का अनुभव कर रहे थे। यह दृश्य बेहद भावनात्मक रहा, जब सैकड़ो की संख्या में उपस्थित महिलाएं डॉक्टर मोहन यादव को बड़े ही प्रसन्न और प्रफुल्लित मन से रक्षा सूत्र बांधती नजर आ रही थीं । वहीं डॉक्टर मोहन यादव भी महिलाओं को यथा संभव सम्मान और स्नेह देते दिखाई दे रहे थे। उन्होंने जहां भी देखा कि महिला उम्र में बड़ी है तो पूरे श्रद्धा भाव से उसके पैर छू लिए और यदि महिला अपने से छोटी लगी तो उसके सिर पर स्नेह के साथ हाथ भी फेरा। यह माहौल कुछ ऐसा था मानो ढेर सारी बहनें अपने भाई से मिलने मायके आ गई हैं या फिर भाई अपनी बहनों से रक्षा सूत्र बंधवाने के लिए उनके घर आंगन में आ गया है। विपक्षी लोग भले ही इस दृश्य को राजनीतिक दृष्टिकोण से ही देखें या फिर उन्हें इस त्यौहार में भी राजनीति दिखाई देने लगे तो और बात है। वर्ना तो आयोजन स्तर पर अनुभूति यही हो रही थी कि रक्षाबंधन समय से पूर्व ही चितरंगी एवं चित्रकूट में आ गया है। झूमते भीगते सावन के महीने में रक्षाबंधन के त्यौहार की शुरुआत हो गई है। जाहिर है इसके बाद डॉक्टर मोहन यादव मंच पर भी पहुंचे। वहां उन्होंने फिर यह बात दोहराई कि मध्य प्रदेश की बहनों को लाडली बहना योजना के पैसे निरंतर मिलते रहेंगे और एक भाई की तरफ से बहनों के लिए रक्षाबंधन के शगुन के रूप में ढाई सौ रुपए अतिरिक्त दिए जाएंगे। इस प्रकार आगामी 10 अगस्त को सभी बहनों के खाते में 1500 सौ रुपए डाले जा रहे हैं। इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्होंने यह जानकारी भी दी की प्रदेश की जो भी बहनें इस योजना से वंचित रह गई हैं, उनकी सुविधा के लिए सरकार पोर्टल खोलने जा रही है। संभव है यह नवाचार सावन के महीने में ही प्रारंभ हो जाए। बता दें कि लाडली बहना योजना से वंचित रह गईं अनेक महिलाएं सीएम हेल्पलाइन एवं अन्य शिकायती माध्यमों से इस योजना को आसान बनाने की और उन्हें इस योजना का लाभ देने की मांग कर रही हैं। यही वजह रही की मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने प्रदेश भर की महिलाओं को आश्वस्त किया कि वह अवसरवादी विपक्षी नेताओं की बातों पर कतई ध्यान ना दें। वे बोलते रहेंगे की “योजना बंद होगी योजना बंद होगी” लेकिन मैं बहनों के खाते में लगातार पैसे डालता रहूंगा। यह सब देखते हुए एक बात तो स्पष्ट हो गई कि मध्य प्रदेश की मोहन सरकार प्रदेश की आधी आबादी को लेकर बेहद संवेदनशील है और उनके हित में सजगता के साथ कदम उठा रही है। यह सब लिखना इसलिए भी उचित प्रतीत होता है, क्योंकि भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री परिवर्तित होने के बाद यह आशंकाएं उठने लगी थीं कि यह प्रदेश भविष्य में मामा और भाई रूपी मुख्यमंत्री से कहीं वंचित न हो जाए! क्योंकि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले में पहले ही काफी बड़ी लकीर खींच चुके थे। उक्त भावनात्मक परिदृश्य को देखते हुए यह शंकाएं और सवाल उठने जायज भी थे। उस पर फिर विपक्षी भी यह सवाल उठा रहे थे कि लाडली बहन योजना तो विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने की दृष्टि से प्रारंभ की गई थी। अतः चुनाव के तुरंत बाद इसे बंद होना ही है। किंतु अब इन राजनीतिक बयान बजियों पर अपने आप विराम लगता दिखाई दे रहा है। क्योंकि स्वयं डॉक्टर मोहन यादव अनेक मंचों से यह घोषणा कर चुके हैं की लाडली बहना योजना समेत महिलाओं और कन्याओं के हित में जारी अन्य योजनाएं बंद नहीं की जाएंगी। बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उनमें और अधिक सुधार होगा तथा नई योजनाएं भी चालू की जा सकेंगी। भारत का हृदय प्रदेश अपने मुख्यमंत्री को वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में भी एक भाई और मामा के रूप में देखता रहेगा। यह भरोसा इसलिए भी और अधिक दृढ़ हो चला है, क्योंकि जहां कहीं भी शासकीय, अर्ध शासकीय अथवा गैर शासकीय आयोजन होते हैं, वहां-वहां वर्तमान मुख्यमंत्री महिलाओं और कन्याओं के बीच जाना तथा उनकी राजी खुशी पूछना नहीं भूलते। लिखने का आशय यह कि मध्य प्रदेश में सत्ता और जनसाधारण के बीच एक पारिवारिक स्नेहिल संबंध स्थापना पा चुका है। जाहिर है जब जन और तंत्र के बीच संबंध भावनात्मक हों, इतने भावनात्मक कि इनका जिक्र किए जाने पर पद गौण होते चले जाते हों तथा रिश्तो का निखार स्पष्ट दिखाई देने लगता है, तो फिर आशंकाएं खत्म होती ही हैं और विकास उत्थान की नई संभावनाओं का जन्म होने लगता है। यानि आम और खास के बीच का अंतर जब विलुप्त होता है तो फिर सबके हित और लाभ भी साझा हो जाते हैं। फल स्वरुप जब विकास की गंगा अविरल बहती है तो फिर वह समान रूप से समूचे मानव समाज का एकरूपता से उत्थान करती चली जाती है। यही वह परिदृश्य है जिसका भारतीय लोकतंत्र को 70 से अधिक दशकों से इंतजार है। आशा की जानी चाहिए कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का बहनों और कन्याओं के प्रति यह स्नेहिल भाव उक्त प्रतीक्षा को पूर्ण करने में मील का पत्थर साबित होगा।


