मुख्यमंत्री यादव के “अभ्युदय” में विकास, संस्कृति और सुशासन

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​मध्य प्रदेश के 70वें स्थापना दिवस का राज्योत्सव, जिसे ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ नाम दिया गया, वह केवल एक वार्षिक समारोह नहीं, बल्कि राज्य के गौरव, संकल्प और सुनहरे भविष्य का एक जीवंत दस्तावेज़ बनकर उभरा है। भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम को आधार बनाकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिस दूरदर्शिता और प्रशासनिक संकल्प का परिचय दिया है, वह न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि प्रदेश के तेज गति से आगे बढ़ने का स्पष्ट संकेत भी है। ​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ समारोह ने इस बार एक नया आयाम ग्रहण किया। यह आयोजन प्रदेश की समृद्ध विरासत और आधुनिक विकास के बीच एक अद्भुत संगम साबित हुआ। तीन दिवसीय इस उत्सव में मध्य प्रदेश की जनजातीय एवं लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां (जैसे करमा, भगोरिया, बधाई) हुईं। 500 से अधिक कलाकारों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की जीवन यात्रा पर आधारित ‘विश्ववंद’ नामक भव्य प्रस्तुति और सुप्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल की उपस्थिति ने सांस्कृतिक माहौल को शिखर पर पहुंचा दिया। साथ ही, 2000 ड्रोन शो जैसे नवाचार ने आधुनिकता का स्पर्श दिया, जिससे यह आयोजन भव्य और अविस्मरणीय बन गया। डॉ. यादव ने स्वयं कलाकारों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया, जो उनकी संस्कृति के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है। ​प्रदर्शनी में भविष्य की झलक: मुख्यमंत्री ने ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जिसमें ‘विकसित मध्यप्रदेश 2047’ के विजन को प्रमुखता से दर्शाया गया। इस प्रदर्शनी में राज्य के गौरवशाली अतीत (विक्रमादित्य काल), पारंपरिक कला और वर्तमान की औद्योगिक प्रगति की झांकी प्रस्तुत की गई। यह पहल दर्शाती है कि मुख्यमंत्री अतीत की नींव पर भविष्य की मजबूत इमारत खड़ी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ​अपने संबोधन और नए संकल्पों के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘विकसित मध्यप्रदेश 2047’ के लिए एक स्पष्ट आर्थिक और सामाजिक रोड मैप प्रस्तुत किया, जो उनकी प्रगतिशील सोच का परिचायक है। डॉ. यादव ने बताया कि राज्य औद्योगिक विकास के नए पैमाने गढ़ रहा है, जहां औद्योगिक विकास दर उल्लेखनीय 24 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश और इसके माध्यम से 6 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देने की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकल्प दोहराया। इसके साथ ही, निवेशकों और नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए तीन नई डिजिटल पहलों की शुरुआत, उनकी सुशासन और डिजिटलीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को साबित करती है। ​कृषक खुशहाली और जल प्रबंधन: कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने सिंचाई का रकबा 52 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजनाओं के विस्तार पर जोर, किसानों को व्यापक स्तर पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का उनका मास्टरप्लान है। जैविक खेती के प्रोत्साहन और ऑनलाइन मंडी व्यवस्था के माध्यम से अन्नदाताओं की आय बढ़ाने का उनका प्रयास सराहनीय है। ​सामाजिक न्याय का ध्येय: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का मूल मंत्र है: गरीब के चेहरे पर मुस्कान, किसान की खुशहाली, नारी का सम्मान और युवाओं का उज्ज्वल भविष्य। उन्होंने पीपीपी मॉडल के तहत 9 नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए रियायती दर पर भूमि उपलब्ध कराने जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक क्षेत्रों में भी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया।
​नेतृत्व का प्रभाव और सामूहिक संकल्प
​डॉ. मोहन यादव ने ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ को महज एक सरकारी आयोजन न रहने देकर, इसे सामूहिक परिश्रम, नवाचार और संकल्प का मंच बना दिया। उनका यह बयान कि ‘विकसित मध्यप्रदेश 2047 का लक्ष्य केवल शासन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि हर नागरिक का संकल्प है’, जनता को विकास यात्रा में भागीदार बनाने की उनकी रणनीति को दर्शाता है। उन्होंने अपनी सरकार की ‘संकल्प शक्ति’ से बीते दो वर्षों में असंभव माने जाने वाले कार्यों को पूरा करने का दावा किया, जो उनके निर्णायक और परिणाम-उन्मुख नेतृत्व को स्थापित करता है।
​निश्चित रूप से, ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ समारोह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शिता, सुशासन के प्रति समर्पण और प्रदेश को विकास, सुशासन और संस्कृति का संगम बनाने के दृढ़ संकल्प को रेखांकित करता है। यह आयोजन एक आत्मनिर्भर और विकसित मध्यप्रदेश की ओर बढ़ते कदमों का शुभ संकेत है।

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