
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव इस बात का उल्लेख हमेशा करते हैं कि डबल इंजन की सरकार अंततः आम जनता के लिए फायदेमंद होती है। क्योंकि जब केंद्र और प्रदेश मिलकर काम करते हैं तब योजनाएं आम आदमी के भले को ध्यान में रखकर प्रदेश सरकार बनती है। जबकि उन्हें जमीनी स्तर पर पूरा करने के लिए धन एवं संसाधन केंद्र सरकार द्वारा मुहैया कराए जाते हैं। कई योजनाओं में विचार और दर्शन केंद्र सरकार का होता है, जबकि संसाधन और आर्थिक स्तर पर सारे इंतेजामत प्रदेश सरकार द्वारा किए जाते हैं। इस प्रकार केंद्र और प्रदेश की दोनों सरकारें मिलकर जब किसी क्षेत्र का विकास करती हैं तो वहां की जनता को लाभ होता ही है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की बात को बारीकी से समझा जाए तो उनका यह भाव मध्य प्रदेश के विकास को लेकर दृष्टिगोचर होता है। उदाहरण के लिए- वर्तमान सरकार ने कर्ज देने वालों की 8 साल पुरानी सभी देनदारियां चुकता कर दी हैं। यानी कि मध्य प्रदेश सरकार ने 8 साल और उसके पहले प्रदेश के विकास के लिए जो भी कर्ज उठाया था उसे अब पूरी तरह चुकता किया जा चुका है। यह बहुत बड़ी बात है, क्योंकि अब तक नेताओं और सरकारों की ओर से विकास के नाम पर कर्ज उठाने की खबरें तो सुनने और पढ़ने को मिलती हैं। लेकिन यह कभी पता नहीं लगता कि कोई सरकार लिया हुआ कर्ज चौका भी रही है। लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव जब इस स्तर का दावा करते हैं तो यह बेहद सुखद राजनीतिक एहसास है। यह ठीक वैसा है जैसे प्रकृति द्वारा रेगिस्तान में पानी की उपलब्धता कर दिया जाना। सरकार के इस पहलू की अर्थशास्त्रियों द्वारा भी खुले मन से प्रशंसा की जा रही है। क्योंकि यह वर्ग भी ऐसा मानता है कि शायद ही कोई सरकार ऐसी हो जो विकास के नाम पर कर्ज उठाने के बाद उसे समय पर चुकता करने के बारे में सोचती भी हो। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार न केवल ऐसा सोच रही है बल्कि करके भी दिख रही है, तो यह अपने आप में बड़ी बात है। जब सरकार की नीयत ईमानदार हो तो फिर विकास के लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। यही परिदृश्य मध्य प्रदेश में भी है। अभी हाल ही में जानकारी मिली है कि मध्य प्रदेश सरकार ने अपने यहां की लघु एवं सूक्ष्म औद्योगिक इकाइयों को बीते साल लगभग 5 हजार 225 करोड़ रुपए विभिन्न मदों में सहायता के रूप में उपलब्ध कराए हैं। इसका आशय केवल इतना सा है कि हमारे प्रदेश के छोटे और मझौल उद्योगपति हतोत्साहित न हों और भारत की तरक्की में बराबर के भागीदार बनें। जहां तक कर्मचारियों की बात है तो यह खुलासा हम पिछले लेख में ही कर चुके हैं कि उनके लिए बजट में 16% तक की वृद्धि की जा चुकी है। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है। बल्कि 10 – 15 वर्ष से भी पुराने भत्तोंौ की राशि बढ़ाने का निर्णय भी अपने आप में अभूतपूर्व है। ज्ञात हो कि इससे सरकार के खजाने पर 15000 करोड़ का भार आने वाला है। फिर भी सरकार उनकी भलाई के लिए कटिबद्ध नजर आती है। यह बहुत बड़ी बात है। जाहिर है कर्मचारियों का भावनात्मक सहयोग सरकार को पहले की अपेक्षा और अधिक बड़े पैमाने पर मिलने की संभावनाएं बन रही हैं। अब मध्य प्रदेश की सरकार वह प्रयोग करने जा रही है जो किसी ने सोचा भी नहीं होगा। जहां तक मुख्यमंत्री की बात है तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि नीमच और मंदसौर में औषधि कृषि के लिए उद्यानिकी इंडस्ट्रील संपन्न होने जा रहा है। यह इसलिए क्योंकि मध्य प्रदेश में अभी तक 22 लाख 72000 हैकटेयर कृषि भूमि पर उद्यानिकी फैसले पैदा की जा रही हैं। आने वाले समय में इन्हें कम से कम डेढ़ गुना तो करना ही है। जाहिर है इससे किसानों ने की आय बढ़ेगी साथ में पैदावार और कृषि व्यापार बढ़ाने से सरकार को भी भारी राजस्व प्राप्त होने जा रहा है। जिसका लाभ अंततः विकास के रूप में आम आदमी को ही मिलेगा। सरकार की इस बात के लिए भी तारीफ की जानी चाहिए। क्योंकि उसने रीवा के सुंदर शजा आम और रतलाम के लहसुन को जी टैग प्राप्त कर दिया है। जबकि खरगोन की मिर्च, जबलपुर का मटर, बुरहानपुर के केले, शिवानी का सीताफल, बरमान नरसिंहपुर के बैंगन, बैतूल के गगरिया आम, इंदौर के मालवीय आलू, रतलाम की बालम ककड़ी, जबलपुर का सिंघाड़ा, धार की खुरासानी इमली और इंदौर के मालवी गराडू को जी टैग दिलाने की भी प्रक्रिया को सरकार ने प्रचलन में बनाए रखी है। उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही इस बारे में सफलता मिलेगी जिसका क्षेत्रीय किसानों को बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ होने वाला है। साथ में इन पैदावारों को लेकर संबंधित जिलों की प्रतिष्ठा राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होने जा रही है। आजकल नक्सलवाद के खात्में को लेकर देश भर में चर्चा है। खासकर छत्तीसगढ़ में लगातार मारे जा रहे नक्सलवादियों की खबरों से समाचार पत्रों के पेज रंगे हुए हैं। साथ में मध्य प्रदेश की चर्चा भी बड़े पैमाने पर हो रही है। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मध्य प्रदेश सरकार की रणनीति का ही परिणाम है कि नक्सलवादियों को इस तरफ घुसने का रास्ता ही नहीं मिल रहा है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ क्षेत्र में नक्सलवादियों की घेराबंदी संभव हो पा रही है। सुरक्षा की दृष्टि से मध्य प्रदेश शासन का यह कदम भी काबिले तारीफ है। इस परिदृश्य को देखकर कहा जा सकता है कि मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार एक और विकास के मोर्चे पर नए कीर्तिमान स्थापित करती जा रही है वहीं दूसरी ओर उसने सुरक्षा के मामले में भी कोई समझौता नहीं किया है और जीरो टॉलरेंस की नीति सामने रखकर नक्सलवाद जैसी समस्याओं को निपटाने और निपटान का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। वैसे भी यह अपने आप में स्थापित सत्य है कि जो प्रदेश सुरक्षा की दृष्टि से शांति और सद्भावना का गढ़ बनता है, वहां विकास अन्य राज्यों की अपेक्षा तेज गति से हो पाता है। मध्य प्रदेश में ऐसा ही देखने को मिल रहा है।


