एजेंसी, भोपाल/ इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नव संवत्सर और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर इंदौर के इस्कॉन मंदिर परिसर स्थित तालाब में गंगा जल अर्पित कर “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तीसरे चरण की शुरुआत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना के साथ गौ-पूजन भी किया। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया यह अभियान प्रदेश के सभी जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण के लिए चलाया जाएगा, जिसका समापन 30 जून 2026 को होगा।
अभियान का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में जल का स्थान अत्यंत पवित्र है और बिना पानी के जीवन की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष यह अभियान गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक कुल 139 दिनों तक चलेगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि मध्य प्रदेश नदियों का मायका है, जहाँ से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं। नर्मदा मैया का जल न केवल मध्य प्रदेश बल्कि गुजरात को भी जीवन दे रहा है, वहीं हमारी नदी जोड़ो परियोजनाओं का लाभ राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों को भी मिल रहा है।
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इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार ने 2500 करोड़ रुपये की राशि प्रस्तावित की है, जिससे प्रदेश की सभी विधानसभाओं, शहरों और गांवों में पुराने कुओं, बावड़ियों, तालाबों और नदियों के जीर्णोद्धार का कार्य किया जाएगा। इंदौर को विकास की सौगात देते हुए मुख्यमंत्री ने अमृत 2.0 परियोजना के तहत करीब 22 करोड़ रुपये के कार्यों का भूमि-पूजन किया, जिसमें बिलावली, लिम्बोदी और छोटा सिरपुर तालाबों का कायाकल्प शामिल है। उन्होंने आम जनता को जल की एक-एक बूंद बचाने की शपथ भी दिलाई।
मुख्यमंत्री ने लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर और सम्राट विक्रमादित्य जैसे महान शासकों का स्मरण करते हुए कहा कि उनके द्वारा निर्मित प्राचीन जल संरचनाओं को सहेजना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि इंदौर में अब तक 21 बावड़ियों का पुनरुद्धार किया जा चुका है। भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 की बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति पराक्रम और उत्सव की संस्कृति है, जहाँ ऋतुओं और तिथियों के वैज्ञानिक आधार पर त्योहार मनाए जाते हैं। ‘जल है तो कल है’ के मूल मंत्र के साथ इस अभियान को एक जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया गया है।


