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संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर ऐतिहासिक चर्चा : पीएम मोदी ने बताया महिला सशक्तिकरण का नया युग

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के विशेष सत्र को देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की गरिमा और उनकी भागीदारी को बढ़ाना सरकार की मुख्य प्राथमिकता है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर संस्कृत श्लोक साझा करते हुए संदेश दिया कि भारत की बेटियां अपनी शक्ति से पूरे विश्व को रोशन करेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि माताओं-बहनों का सम्मान ही वास्तव में राष्ट्र का सम्मान है।

महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष को चेतावनी

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने सभी दलों से एकजुट होकर इसका समर्थन करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस संवेदनशील विषय को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। पीएम मोदी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग इस कदम का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में इसकी बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास गवाह है कि महिलाओं के अधिकारों का विरोध करने वालों को जनता ने कभी माफ नहीं किया है।

संसद में पेश हुए तीन महत्वपूर्ण विधेयक

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में तीन प्रमुख बिल पेश किए: संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 और परिसीमन बिल 2026। इन प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा में सदस्यों की कुल संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का सुझाव है। इसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि यह बदलाव देश में लैंगिक समानता लाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

परिसीमन और जनगणना पर तीखी बहस

सदन में परिसीमन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और सांसद धर्मेंद्र यादव ने सवाल उठाया कि जनगणना से पहले परिसीमन की प्रक्रिया क्यों शुरू की जा रही है। उन्होंने इसमें पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटे की मांग की। जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसमें जातिगत गणना भी शामिल होगी। शाह ने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है, लेकिन राजनीतिक दल अपनी इच्छा से किसी भी वर्ग को टिकट देने के लिए स्वतंत्र हैं।

कम आबादी वाले राज्यों की चिंता

एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे संघवाद के ढांचे के खिलाफ बताया। उन्होंने चिंता जताई कि नए परिसीमन से उन राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है। उन्होंने प्रक्रियात्मक नियमों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। सदन में इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बीच-बचाव कर सदस्यों को मर्यादा में रहने की सलाह देनी पड़ी।

दिवंगत हस्तियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

कार्यवाही शुरू होने से पहले सदन ने महान गायिका आशा भोंसले के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। अध्यक्ष ओम बिरला ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही पूर्व सांसद मोहसीना किदवाई, अब्बू हासिम खान चौधरी और हरि नारायण राजभर के निधन पर भी शोक व्यक्त किया गया। सदन के सभी सदस्यों ने मौन रखकर दिवंगत आत्माओं को सम्मान दिया।

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