ग्लोबल इन्वेस्टर समिट लगातार सकारात्मक परिणाम दिखा रही है। फल स्वरुप मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में नई-नई परियोजनाओं की आधारशिलाएं स्थापित हो रही हैं । वहीं नए उद्योगों और विभिन्न प्रकार के नवाचारों की शुरुआत होने लगी है। इसी तरह के अनेक कार्यक्रमों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और अपनी कार्य प्रणाली से यह प्रमाणित करते चले जा रहे हैं की ग्लोबल इन्वेस्टर सबमिट को केवल औपचारिकता भर ना माना जाए । वह मध्य प्रदेश शासन का एक ईमानदार प्रयास था जिसके परिणाम आने शुरू हो गए हैं। इसके चलते मध्य प्रदेश के उद्योगपतियों, युवाओं और सभी नागरिकों का भविष्य बेहतर होने जा रहा है। एक प्रकार से देखा जाए तो मध्य प्रदेश शासन की यह मंशा धरातल पर सकारात्मक परिणाम दे रही है । यदि हम गौर करें तो पाएंगे कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिति में जितने भी एमओयू साइन हुए वह धीरे-धीरे जमीनी स्तर पर साकार होने शुरू हो गए हैं। पूर्व में भी स्वयं मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव अनेक उद्योगों एवं अन्य क्षेत्रों में विकास की आधारशिलाएं रख चुके हैं। वर्तमान में भी उनका यह क्रम बना हुआ है । इससे यह स्पष्ट हो चला है कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिति लगातार रंग दिखा रही है । अपने ही प्रयासों के चलते मुख्यमंत्री ने मंदसौर के सीतामऊ क्षेत्र में अनेक सौगातें दीं। वहां उन्होंने कृषि उद्योग समागम में 3812 करोड़ के निवेश प्रस्ताव वाली 11 औद्योगिक इकाइयों के निर्माण की आधारशिला रखी। जाहिर है इससे कृषि के क्षेत्र में तरक्की तो होगी ही, औद्योगिक विकास भी होगा। इससे भी ज्यादा खुशी की बात यह है कि जैसे-जैसे यह इकाइयां पूर्णता को प्राप्त होती जाएंगी, वैसे-वैसे स्थानीय युवाओं को रोजगार प्राप्त होने लगेंगे । उम्मीद जताई रही है कि फिलहाल जिन प्रोजेक्ट्स की मुख्यमंत्री ने आधारशिला रखी है, उसके माध्यम से लगभग 7000 लोगों को रोजगार मिलने जा रहा है। जाहिर है इसके चलते 7000 परिवारों में खुशियां अवतरित होने जा रही हैं । यहां याद दिला दें कि जो निर्माण कार्य शुरू हो रहे हैं, इनके करार 24 और 25 फरवरी को भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में ही संपादित किए गए थे। उस वक्त राजनीतिक स्तर पर विरोधी राजनीतिक दल यह प्रतिपादित करने में लगे हुए थे कि इस तरह की आयोजन तो हर साल राजधानी में और प्रांत के अनेक महानगरों में आयोजित किए जाते हैं। इन पर करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाया जाता है। लेकिन नतीजों के रूप में जमीन पर कुछ भी दिखाई नहीं देता। लेकिन इस बात को लेकर मध्य प्रदेश के नागरिक संतुष्ट हैं कि 24 और 25 फरवरी को भोपाल में जो ग्लोबल इन्वेस्टर समेत संपन्न हुई, वह औपचारिकता की सीमाओं से आगे निकलकर जमीनी स्तर पर साकार होने लगी है। ऐसे ही अनेक प्रयास समय-समय पर सामने आते रहते हैं। अब जो चीज सामने आई है उनके मुताबिक गरोठ विधानसभा के दुधाखेड़ी में 400 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि पूजन और लोकार्पण किया जा चुका है। इनमें 223 करोड़ की शामगढ़ सुश्री सूक्ष्म योजना, 60 करोड़ की शाखा की माइक्रो सिंचाई परियोजना शामिल है। इसी के साथ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि प्रदेश में संतरा केला सहित कई उत्पादन बड़ी मात्रा में होते हैं। पहले से उनकी ब्रांडिंग हो रही है। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में पैदा होने वाला संतरा तो मंदसौर के नाम से ही बिकने लगा है। केले की भी अच्छी खासी मांग है। मसाले के खरीददार तो दूसरे प्रदेशों से आते हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिया कि ऐसे सभी उत्पादों का सरकार खुदके स्तर पर ब्रांडिंग करेगी। एक तरह से देखा जाए तो मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने किसानों की और उद्योगपतियों की तरक्की के लिए कमर कस ली है। इससे केवल इन दोनों वर्गों का ही विकास नहीं होगा, बल्कि मध्य प्रदेश के सभी नागरिकों की तरक्की अपेक्षित है। मध्य प्रदेश समेत देश की अधिकांश राज्यों में स्थानीय स्तर पर जुगाड़ बड़े पैमाने पर प्रचलन में है। इससे एक और नए-नए तरीके प्रयोग में आते हैं, वहीऊ बेकार पड़े सामानों से भी नए-नए नवाचार आकार लेने लगते हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि इस तरह के कार्य सृजनात्मक श्रेणी में आते हैं। इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। कभी-कभी छोटे स्तर पर की गई जुगाड़ बड़े आविष्कारों की जननी बन जाती है। अतः इस तरह के प्रयासों और प्रयोगों को सरकार अपने स्तर पर प्रोत्साहित करने जा रही है। कुल मिलाकर सरकार की मंशा आम के आम गुठलियों के नाम खड़े करने में दिखाई दे रही है। इससे समाज के प्रत्येक वर्ग का उत्थान संभावित है।


