मुख्यमंत्री की टेक – आज का भारत अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचान चुका है।
भारत के हृदय प्रदेश मध्य प्रदेश और सांस्कृतिक चेतना के केंद्र उत्तर प्रदेश के बीच हाल ही में वाराणसी में संपन्न हुआ सहयोग सम्मेलन केवल दो राज्यों का मिलन मात्र नहीं था, बल्कि यह बदलते भारत की उस नई कार्यसंस्कृति का परिचायक था जहां विकास की राजनीति ने दशकों पुराने विवादों और वैचारिक बाधाओं को पीछे छोड़ दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वक्तव्य इस बात की तस्दीक करते हैं कि आज का भारत अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचान चुका है। उनका यह कथन कि भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और शीघ्र ही तीसरी पायदान पर होगा, केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों भारतीयों के पुरुषार्थ का परिणाम है जो वैश्विक चुनौतियों के बीच भी देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर देख रहे हैं। यह विकास यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा के स्थान पर ‘सहयोग’ और ‘सह-अस्तित्व’ की भावना को प्राथमिकता दी जा रही है।
डॉ. यादव ने जिस ‘लाल सलाम’ पर प्रहार किया, वह दरअसल उस अवरोधक विचारधारा की ओर संकेत था जिसने दशकों तक विकास की गति को थामे रखा और नक्सलवाद जैसी समस्याओं से देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को चोट पहुंचाई। आज जब वह कहते हैं कि इस ‘लाल सलाम’ को अब देश ‘आखिरी सलाम’ बोल रहा है, तो इसका अर्थ यह है कि अब हिंसा और अस्थिरता की राजनीति के लिए भारत में कोई स्थान नहीं बचा है। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने नक्सलवाद की जो पीड़ा झेली है, उससे मुक्ति का मार्ग केवल सुशासन और विकास के माध्यम से ही संभव हो पाया है। वर्तमान नेतृत्व की कुशलता इसी में है कि उन्होंने उन जटिलताओं को सुलझाया है जिन्हें पूर्ववर्ती सरकारों ने अपनी राजनीतिक सुविधा के लिए उलझाए रखा था। केन-बेतवा लिंक परियोजना इसका सबसे जीवंत उदाहरण है। दशकों से पानी के बंटवारे को लेकर उलझा यह विवाद आज समाधान की ओर है और बुंदेलखंड की प्यासी धरती के लिए वरदान साबित हो रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इस परियोजना में 90 प्रतिशत का योगदान देना सहकारी संघवाद की उस भावना को पुष्ट करता है, जहां दिल्ली और राज्यों की राजधानियां एक ही लक्ष्य के लिए मिलकर काम करती हैं।
आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक सेतुओं का निर्माण इस सम्मेलन का एक अत्यंत भावुक और प्रभावी पक्ष रहा। चित्रकूट में भगवान राम के वनवास के 11 वर्ष और तुलसीदास जी की अमर रचनाओं के माध्यम से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के जो गहरे संबंध रहे हैं, वे हमारी साझा विरासत का आधार हैं। अयोध्या में श्री रामलला के राज्याभिषेक और काशी विश्वनाथ धाम के नव्य-भव्य स्वरूप ने न केवल धार्मिक आस्था को संबल दिया है, बल्कि धार्मिक पर्यटन के माध्यम से अर्थव्यवस्था के नए द्वार भी खोले हैं। उज्जैन के महाकाल लोक और काशी के बीच प्रबंधन और जीआई टैग को लेकर हुआ एमओयू यह बताता है कि हमारे प्राचीन नगर अब आधुनिक प्रबंधन के साथ तालमेल बिठाकर विश्व पटल पर अपनी नई पहचान बना रहे हैं। यह आदान-प्रदान न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक विनिमय को भी एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का उद्यमियों को मध्य प्रदेश में निवेश के लिए दिया गया आमंत्रण और विशेष रूप से चिकित्सा क्षेत्र में दी गई रियायतें एक दूरदर्शी सोच को दर्शाती हैं। मात्र एक रुपये में 30 एकड़ जमीन और 300 बेड के मेडिकल कॉलेज की स्थापना का प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसके साथ जुड़ी यह शर्त कि डॉक्टरों को पांच से छह साल तक प्रदेश में सेवा देनी होगी, ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी को दूर करने का एक ठोस समाधान है। यह दर्शाता है कि सरकार केवल उद्योग नहीं लगा रही, बल्कि एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रही है जहां निवेश का लाभ सीधे आम आदमी के स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुंचे। सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में मुरैना की 2000 मेगावाट की परियोजना भी हरित ऊर्जा की दिशा में दोनों राज्यों के साझा संकल्प का प्रतीक है, जिससे किसानों के जीवन में खुशहाली आएगी।
70 हजार करोड़ रुपये के निर्यात के साथ मध्य प्रदेश जिस तरह नई उड़ान भर रहा है, वह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है। उत्तर प्रदेश के ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) और जीआई उत्पादों की सफलता के साथ मध्य प्रदेश के संसाधनों का मेल एक ऐसी आर्थिक शक्ति पैदा करेगा जो पूरे उत्तर और मध्य भारत की तस्वीर बदल सकती है। यह सम्मेलन स्पष्ट संदेश देता है कि जब राज्यों के बीच जल, जमीन और विचारधारा के विवाद खत्म होते हैं, तो विकास की गंगा निर्बाध बहने लगती है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की अगुवाई में आज देश जिस सुरक्षा और सुशासन के वातावरण में सांस ले रहा है, उसमें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का यह अटूट मेल न केवल आर्थिक समृद्धि लाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत की नींव भी रखेगा। यह समय विवादों का नहीं, बल्कि संवाद और सहयोग का है, और वाराणसी की धरती से निकली यह गूंज पूरे देश के लिए एक प्रेरणा पुंज का कार्य करेगी।
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