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मध्य प्रदेश में खुशहाली की नई बयार मोहन शासन का किसान हितैषी विजन

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मध्य प्रदेश में खुशहाली की नई बयार
मोहन शासन का किसान हितैषी विजन

मध्य प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था के केंद्र में हमेशा से ‘अन्नदाता’ रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश की जनता के नाम संबोधन में की गई घोषणाएं न केवल किसानों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं, बल्कि यह राज्य को कृषि क्षेत्र में एक नए स्वर्ण युग की ओर ले जाने का संकल्प भी है। इस वर्ष को ‘किसान वर्ष’ के रूप में समर्पित करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आगामी समय में सरकारी नीतियों का केंद्र बिंदु ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना होगा।

​मुख्यमंत्री की घोषणाओं में सबसे महत्वपूर्ण पहलू गेहूं उपार्जन के लक्ष्य को बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन करना है। यह निर्णय उस समय आया है जब किसानों को अपनी उपज के सही प्रबंधन और समर्थन मूल्य की चिंता होती है। लक्ष्य में यह भारी वृद्धि दर्शाती है कि सरकार किसानों से दाना-दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही, किसानों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए स्लॉट बुकिंग की तिथि को 9 मई तक बढ़ाना और सप्ताह में 6 दिन (शनिवार सहित) खरीदी केंद्र खोलना प्रशासनिक संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। अक्सर देखा जाता है कि समय सीमा कम होने के कारण छोटे किसान बिचौलियों के जाल में फंस जाते हैं, लेकिन समय वृद्धि और कार्य दिवसों के विस्तार से हर पात्र किसान को अपनी बारी का लाभ मिल सकेगा।
​ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधार सीधे तौर पर किसान की लागत घटाने वाले हैं। मात्र 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने का निर्णय ऐतिहासिक है। कृषि में निवेश की शुरुआत बिजली और पानी से होती है; ऐसे में नाममात्र के शुल्क पर कनेक्शन देना सीमांत किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके साथ ही, दिन में बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्णय किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा। रात के अंधेरे में खेतों की सिंचाई करना न केवल कठिन होता है, बल्कि जोखिम भरा भी होता है। दिन में बिजली मिलने से किसान सुरक्षित रहकर और बेहतर प्रबंधन के साथ खेती कर सकेंगे।
​भू-अर्जन (जमीन अधिग्रहण) के नियमों में किसानों के हित में किए गए बदलाव यह सुनिश्चित करते हैं कि विकास की प्रक्रिया में किसान पीछे न छूटे। मुख्यमंत्री का यह कहना कि ‘किसान अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं’, केवल एक जुमला नहीं बल्कि उनकी नीतियों में परिलक्षित होता है। जब किसान की जेब में पैसा आता है, तो उसका सीधा असर बाजार की क्रय शक्ति पर पड़ता है, जिससे पूरी प्रदेश की जीडीपी को गति मिलती है।
​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में डॉ. मोहन यादव का यह ‘मध्य प्रदेश मॉडल’ एक मील का पत्थर साबित होगा। ‘किसान वर्ष’ के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका ध्येय केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसान की आय और सम्मान को बढ़ाना भी है। यदि इन योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर इसी तत्परता से होता है, तो निश्चित रूप से मध्य प्रदेश कृषि कर्मण क्षेत्र में अपनी बादशाहत बरकरार रखते हुए देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरेगा। यह संबोधन एक समृद्ध, सशक्त और खुशहाल किसान के भविष्य की आधारशिला है।

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