इस्फहान

मध्य पूर्व में महायुद्ध का 32वां दिन : इजरायल की इस्फहान पर भीषण बमबारी, ईरान ने दागी मिसाइलें और अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया

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एजेंसी, इस्फहान। मध्य पूर्व में जारी विनाशकारी संघर्ष आज अपने 32वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी 2026 को ईरान के विरुद्ध शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। एक महीना बीत जाने के उपरांत भी हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और खाड़ी देशों में लगातार धमाकों की गूंज सुनाई दे रही है।

मंगलवार की अलसुबह ईरान ने इजरायल की राजधानी यरुशलम को निशाना बनाया, जिसके जवाब में इजरायल ने तेहरान पर हवाई हमले किए, जिससे वहां के कई हिस्सों में बिजली ठप हो गई। इस बीच, लेबनान में जारी जमीनी कार्रवाई के दौरान चार इजरायली सैनिकों की मौत की खबर है। आइए जानते हैं पिछले 24 घंटों के बड़े घटनाक्रम:

इस्फहान में सैन्य ठिकानों पर प्रहार ईरान की समाचार एजेंसी ने स्थानीय सुरक्षा अधिकारी अकबर सालेही के हवाले से पुष्ट किया है कि शुरुआती जांच में इस्फहान प्रांत के कुछ फौजी ठिकानों पर हमलों की बात सामने आई है। हालांकि, निशाना बनाए गए विशिष्ट स्थानों का खुलासा नहीं किया गया है। अभी हताहतों की संख्या और संपत्ति के नुकसान का आकलन किया जा रहा है। ज्ञात हो कि इस्फहान ईरान के रक्षा उद्योग और परमाणु कार्यक्रम का मुख्य केंद्र है, जहां बदर और शिकारी जैसे महत्वपूर्ण वायु सेना के अड्डे स्थित हैं।

परमाणु केंद्रों पर सीधा हमला अमेरिका और इजरायल ने अब ईरान के परमाणु ढांचे को नष्ट करने के लिए अभियान तेज कर दिया है। संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के पांच प्रमुख परमाणु स्थलों- अराक, अरदकान, इस्फहान, नतांज और बुशहर को निशाना बनाया गया है। इसे ईरान की सामरिक क्षमता पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप के रुख में बदलाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अब तक ईरान को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने की चेतावनी दे रहे थे, युद्ध के 32वें दिन कुछ नरम पड़ते दिखाई दिए। उन्होंने संकेत दिया है कि ईरान के विरुद्ध चल रहे इस सैन्य अभियान को अगले चार से छह सप्ताह के भीतर समाप्त किया जा सकता है। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका अब ऊर्जा के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर नहीं है, इसलिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाए बिना भी इस युद्ध को विराम दे सकते हैं।

ईरान का पलटवार और अमेरिकी ड्रोन का पतन ईरान ने भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए यरुशलम में कम से कम दस स्थानों पर भीषण धमाके किए, जिसकी पुष्टि इजरायली सेना ने की है। इसके अतिरिक्त, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उनकी वायु सेना ने इस्फहान के आसमान में उड़ रहे अमेरिका निर्मित एमक्यू-9 रीपर नामक लंबी दूरी के जासूसी ड्रोन को मार गिराया है।

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खाड़ी देशों में फैलता तनाव ईरान के जवाबी हमलों की तपिश अब पड़ोसी देशों तक पहुंच रही है। ईरान ने सऊदी अरब के अल-खारज प्रांत में ड्रोन हमला किया, जिसे वहां की सुरक्षा प्रणाली ने हवा में ही नष्ट कर दिया, हालांकि इसके मलबे से कुछ घरों को क्षति पहुंची है। वहीं, दुबई के तट पर खड़े कुवैत के एक विशाल तेल टैंकर पर भी ईरानी हमला हुआ, जिससे जहाज में आग लग गई।

क्षेत्रीय देशों पर प्रभाव अब तक ईरान ने इस क्षेत्र के नौ देशों- बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी ठिकानों और इजरायली संपत्तियों को निशाना बनाया है। यहां तक कि साइप्रस में स्थित ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर भी ड्रोन से हमला किया गया है।

भारत के लिए बढ़ती मुश्किलें मध्य पूर्व के इस संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत में एलपीजी और प्राकृतिक गैस की कमी का खतरा गहराने लगा है, जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।

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