एजेंसी, भोपाल। मध्यप्रदेश महिला आयोग में प्रशासनिक फेरबदल : मध्यप्रदेश शासन ने महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रशासनिक निर्णय लेते हुए प्रांतीय महिला आयोग में उच्च स्तरीय नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा की है। राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, पूर्व जनप्रतितिधि रेखा यादव को आयोग के सर्वोच्च पद अर्थात अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया गया है। इसके साथ ही, एक अन्य पूर्व विधायक साधना स्थापक को आयोग के मुख्य सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। शासकीय आदेश के अंतर्गत, इन दोनों ही महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर आसीन होने वाले पदाधिकारियों का विधिक कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से लेकर आगामी 3 वर्ष की समयावधि के लिए निर्धारित किया गया है। इस निर्णय के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चाएं प्रारंभ हो गई हैं।
मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए छतरपुर की वरिष्ठ नेत्री रेखा यादव को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति से महिला सशक्तिकरण और प्रदेश की महिलाओं के हितों के संरक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद है। रेखा यादव की इस नई जिम्मेदारी पर प्रदेश भर के… pic.twitter.com/ooU24AE41G
— PEPTECH TIME – मध्यप्रदेश समाचार (@Peptechtimenews) May 3, 2026
पूर्व जनप्रतितिधियों को मिला नया दायित्व
आधिकारिक विवरण के अनुसार, महिला आयोग की नव-नियुक्त अध्यक्ष रेखा यादव पूर्व में बड़ा मलहरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और उनके इस दीर्घकालिक राजनैतिक व सामाजिक अनुभव को देखते हुए शासन ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उनके कुशल नेतृत्व में आयोग से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह प्रदेश में महिलाओं के कल्याण, उनके कानूनी अधिकारों के संरक्षण और समाज में उनकी सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए तीव्र गति से कार्य करेगा। इसी क्रम में, आयोग के सदस्य पद पर प्रतिनियुक्त की गईं साधना स्थापक भी गाडरवारा क्षेत्र से दो बार विधानसभा की सदस्य रह चुकी हैं। संसदीय राजनीति का लंबा अनुभव रखने वाली साधना स्थापक पूर्व में कांग्रेस दल से जुड़ी हुई थीं, परंतु विगत आम विधानसभा चुनावों की घोषणा से ठीक पहले उन्होंने वैचारिक परिवर्तन करते हुए भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की थी।
चार वर्षों से रिक्त पड़े थे पद, लंबित मामलों की संख्या में भारी वृद्धि
राज्य महिला आयोग के प्रशासनिक इतिहास पर दृष्टि डालें तो ज्ञात होता है कि वर्ष 2020 से ही इस महत्वपूर्ण वैधानिक संस्था में अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के पद पूरी तरह से रिक्त चल रहे थे, जिसके कारण आयोग का कामकाज लगभग ठप पड़ा हुआ था। इससे पूर्व, कमलनाथ के नेतृत्व वाली तत्कालीन प्रांतीय सरकार के कार्यकाल के दौरान शोभा ओझा को इस पद की कमान सौंपी गई थी। परंतु, राज्य में हुए अचानक सत्ता परिवर्तन के पश्चात तत्कालीन नवीन सरकार द्वारा उनका प्रशासनिक कार्यकाल समाप्त घोषित कर दिया गया था। इस शासकीय निर्णय को शोभा ओझा ने देश के उच्च न्यायालय में विधिक चुनौती दी थी, जिसके कारण यह पूरा विषय लंबे समय तक न्यायपालिका के समक्ष विचाराधीन रहा। इस लंबी कानूनी अड़चन और नेतृत्व विहीन स्थिति के परिणाम स्वरूप आयोग के समक्ष न्याय की आस में आए विभिन्न प्रताड़नाओं से जुड़े लगभग 30000 से अधिक संवेदनशील प्रकरण पूरी तरह से लंबित पड़े रहे, जिनका निवारण करना अब नई समिति के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती होगी।
विभिन्न निगमों और मंडलों में नियुक्तियों की प्रक्रिया में आई तीव्र गति
मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में यह बात लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई थी कि प्रदेश के अनेक महत्वपूर्ण निगमों, मंडलों, विकास प्राधिकरणों और कल्याणकारी आयोगों में लंबे समय से राजनैतिक नियुक्तियां नहीं की जा सकी थीं। इस प्रशासनिक गतिरोध को दूर करने के उद्देश्य से वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संगठन और शासन के मध्य व्यापक समन्वय स्थापित करते हुए अब तक विभिन्न स्वायत्त संस्थाओं के कुल 29 महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों की विधिक प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। शासकीय सूत्रों का दावा है कि शेष बचे हुए अन्य निगमों, बोर्डों और विकास प्राधिकरणों में भी रिक्त पदों को भरने की सूची अंतिम चरण में है और शीघ्र ही उनके नामों की भी आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में मनोनीत किए जाने वाले एल्डरमैन अर्थात विशिष्ट नागरिक सदस्यों की चयन सूची भी पूरी तरह से तैयार कर ली गई है, जिसकी विधिक विज्ञप्ति किसी भी समय सार्वजनिक की जा सकती है।
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