भवानीपुर

भवानीपुर मतगणना केंद्र के समीप भारी बवाल : विपक्षी दल के प्रतीकों वाली वाहनों के प्रवेश पर सत्तारूढ़ दल का तीव्र विरोध और निर्वाचन आयोग का हस्तक्षेप

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एजेंसी, कोलकाता। भवानीपुर मतगणना: पूर्वी भारत के राजनैतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील प्रांतीय राज्य पश्चिम बंगाल की मुख्य प्रशासनिक जनप्रतितिधि के गृह निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर के अंतर्गत आने वाले मतों की गिनती के मुख्य केंद्र पर रविवार को भारी राजनैतिक घमासान और हंगामा देखने को मिला। मतों की विधिक गणना प्रारंभ होने से ठीक 1 दिन पूर्व हुए इस उग्र विवाद के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा बलों पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए। कार्यकर्ताओं का दावा था कि भारतीय जनता पार्टी के दलीय प्रतीकों और ध्वजों से सुसज्जित 2 निजी वाहनों को उस अति-सुरक्षित शासकीय परिसर के भीतर प्रवेश करने की अनुमति प्रदान की गई, जहां संपूर्ण क्षेत्र की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन अर्थात मतदान यंत्रों को कड़े पहरे में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि यह संवेदनशील घटनाक्रम ऐसे समय में प्रकाश में आया है जब प्रांतीय मुख्यमंत्री ने स्वयं सखावत मेमोरियल गर्ल्स स्कूल परिसर में स्थापित इसी मुख्य केंद्र के सम्मुख बृहस्पतिवार की संपूर्ण निशा में लगभग 4 घंटे तक खुले आसमान के नीचे बैठकर तीखा धरना प्रदर्शन किया था। उस समय भी मुख्य जनप्रतितिधि ने सुरक्षित कक्ष (स्ट्रॉन्गरूम) के आस-पास अनधिकृत और संदेहास्पद व्यक्तियों के आवागमन का संगीन आरोप लगाया था। राज्य में मतदान की विधिक प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के पश्चात सत्ता प्राप्ति के लिए चल रही यह राजनैतिक खींचतान अब दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वी दलों के मध्य एक अत्यंत जटिल मनोवैज्ञानिक दबाव के युद्ध में परिवर्तित हो चुकी है। दोनों ही संगठनों के शीर्ष नेता और जमीनी कार्यकर्ता संपूर्ण सूबे में स्थापित उन सभी सुरक्षित केंद्रों की सुरक्षा प्रणालियों पर अत्यंत पैनी और निरंतर दृष्टि बनाए हुए हैं, जहां चुनाव में खड़े प्रत्याशियों का राजनैतिक भविष्य पूरी तरह से बंद है। यद्यपि मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी की भारी मतों से विजय होने का पूर्ण विश्वास प्रकट किया है, परंतु इसके समानांतर ही वे मतों की गणना में संभावित धांधली और मतदान यंत्रों के साथ तकनीकी छेड़छाड़ की अपनी पुरानी आशंकाओं को भी कई बार सार्वजनिक मंचों से दोहरा चुकी हैं।

सुरक्षा घेरे के भीतर संदिग्ध वाहनों के प्रवेश पर छिड़ा तीखा विवाद

मतगणना केंद्र की विधिक सीमा से लगभग 100 मीटर की दूरी पर दिन-रात डेरा डाले हुए सत्तारूढ़ दल के समर्थकों ने रविवार की भोर में मुख्य सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि विरोधी दल के ध्वजों से युक्त 2 संदिग्ध गाड़ियां अचानक परिसर की आंतरिक सीमा में प्रविष्ट हुईं और अत्यंत संवेदी सुरक्षा घेरे को पार करते हुए सीधे सुरक्षित कक्ष के समीप तक पहुंच गईं। प्रदर्शन कर रहे एक स्थानीय कार्यकर्ता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि घटना स्थल पर प्रतिनियुक्त किए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के सुरक्षा कर्मी बिना किसी वैध एवं आधिकारिक परिचय पत्र के किसी भी सामान्य नागरिक अथवा निजी वाहन को मुख्य द्वार के भीतर जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में, इन विशिष्ट वाहनों को, जिन्हें पिछले कई दिनों में इस मार्ग पर कभी नहीं देखा गया, अचानक आंतरिक भाग में जाने का विधिक अधिकार किस आधार पर प्राप्त हो गया? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब स्थानीय नागरिकों ने इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था का तीव्र विरोध करना प्रारंभ किया, तो केंद्रीय सुरक्षा बलों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक घटना स्थल से 100 मीटर पीछे हटने का निर्देश दे दिया। सत्तारूढ़ दल का यह भी दावा है कि वहां उपस्थित स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने जनभावनाओं को देखते हुए उन वाहनों को तुरंत क्षेत्र से बाहर निकालने का मौखिक आश्वासन दिया था, परंतु इसके बावजूद वे गाड़ियां काफी समय तक उसी प्रतिबंधित स्थान पर बिना किसी भय के खड़ी रहीं।

केंद्रीय निर्वाचन सदन का आधिकारिक स्पष्टीकरण और आरोपों का खंडन

इस पूरे संवेदनशील और बढ़ते हुए विवाद को शांत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग के एक अत्यंत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने आधिकारिक वक्तव्य जारी करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित वाहन हरीश मुखर्जी मार्ग से होकर सामान्य रूप से गुजर रहे थे। मुख्य मार्ग पर तैनात सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टुकड़ी द्वारा उन वाहनों को रोककर उनकी अत्यंत सघन और बारीक तकनीकी जांच पड़ताल की गई थी। इस सघन चेकिंग के दौरान वाहनों के भीतर से किसी भी प्रकार की कोई आपत्तिजनक, अवैध अथवा संदेहास्पद सामग्री प्राप्त नहीं हुई, जिसके पश्चात ही विधिक रूप से संतुष्ट होने पर सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे के मार्ग पर जाने की अनुमति प्रदान की थी। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री द्वारा अपने सभी क्षेत्रीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और प्राधिकृत मतदान एजेंटों से मतदान यंत्रों वाले सुरक्षित कक्षों की 24 घंटे निरंतर निगरानी करने की भावुक अपील किए जाने के पश्चात पार्टी के वरिष्ठ प्रत्याशी कुणाल घोष और नेत्री शशि पांजा ने भी बृहस्पतिवार को खुदीराम अनुशीलन केंद्र के समीप अनेक अनियमित और संदेहास्पद गतिविधियों के संचालित होने का आरोप लगाते हुए वहां एक बड़ा धरना प्रदर्शन आयोजित किया था। हालांकि, उस समय भी केंद्रीय निर्वाचन सदन ने उनके द्वारा लगाए गए इन तमाम आरोपों को पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था।

अन्य जनपदों में भी सीसीटीवी कैमरों के बंद होने पर तीखा विरोध प्रदर्शन

भवानीपुर के अतिरिक्त प्रांतीय राज्य के कई अन्य जनपदों से भी मतों की सुरक्षा को लेकर भारी राजनैतिक रस्साकशी की खबरें निरंतर प्राप्त हो रही हैं। हावड़ा क्षेत्र में सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने सुरक्षित कक्ष से बिल्कुल सटे हुए आंतरिक भूभाग पर प्रांतीय लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए जा रहे कुछ आकस्मिक मरम्मत और जीर्णोद्धार के कार्यों पर अत्यंत कड़ा विधिक विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद उत्पन्न तनाव को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने उस निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही, सत्तारूढ़ दल ने शनिवार को केंद्रीय आयोग के समक्ष एक लिखित विधिक शिकायत भी दर्ज कराई, जिसमें खुदीराम अनुशीलन केंद्र के भीतर बने मुख्य सुरक्षित कक्ष में डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलट) के लिफाफों की अनधिकृत रूप से छंटनी और हेरफेर किए जाने का संगीन आरोप लगाया गया। इसी प्रकार की अशांति के दृश्य शनिवार को पश्चिम बर्द्धमान जनपद के अंतर्गत आने वाले आसनसोल कॉलेज और उत्तर 24 परगना जिले के बारासात सरकारी कॉलेज में स्थापित किए गए मुख्य सुरक्षित केंद्रों के बाहर भी व्यापक रूप से देखने को मिले। वहां भी बड़ी संख्या में एकत्रित हुए कार्यकर्ताओं ने अत्यंत उग्र प्रदर्शन करते हुए यह गंभीर आरोप लगाया कि सुरक्षा के लिए लगाए गए आंतरिक सीसीटीवी कैमरे कई महत्वपूर्ण मिनटों तक पूरी तरह से बंद कर दिए गए थे। केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने इन सभी जनपदों से प्राप्त शिकायतों को पूरी तरह से अमान्य घोषित करते हुए स्पष्ट किया कि सभी निगरानी कैमरे बिना किसी तकनीकी बाधा के निरंतर क्रियाशील थे और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से अभेद्य है। दूसरी ओर, विपक्षी दल के मुख्य प्रवक्ता सजल घोष ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए पत्रकारों से कहा कि बंगाल की प्रबुद्ध जनता को सत्तारूढ़ दल का यह आचरण अत्यंत हास्यास्पद प्रतीत हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो दल स्वयं सदैव अनुचित साधनों, धनबल और बाहुबल की दमनकारी रणनीतियों के माध्यम से स्थानीय चुनाव जीतता रहा है, वह अब अपनी संभावित पराजय के भय से घबराकर तरह-तरह के बेबुनियाद और मनगढ़ंत आरोप मढ़ रहा है। प्रवक्ता ने तीखा प्रश्न पूछते हुए कहा कि क्या यह उग्रता उनकी आसन्न हार के डर को स्पष्ट रूप से उजागर नहीं करती है?

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