एजेंसी, जबलपुर। मध्यप्रदेश में इंदौर और भोपाल के बाद जबलपुर को ‘मेट्रोपॉलिटन सिटी’ बनाने की मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा से महाकौशल की राजनीति और अर्थनीति में नई हलचल है। मेट्रोपोलिटन सिटी का मतलब सिर्फ एक ठप्पा नहीं, बल्कि विकास का एक पूरा ईको-सिस्टम है। जबलपुर की तस्वीर कैसे बदलने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर जोनिंग, ग्रीन एरिया, रेजिडेंशियल और कमर्शियल क्षेत्रों को संतुलित करने के प्रयास होंगे।
अर्बन एक्सपर्टस के अनुसार इससे शहर का विस्तार होगा। यहां उद्योग और व्यवसाय के विस्तार के भी रास्ते खुलेंगे। इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे। रेल व एयर कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरेगा और चिकित्सा व स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार होगा। तीर्थ क्षेत्र, पर्यटन सुविधाओं का भी विस्तार हो सकेगा। स्वास्थ्य और शिक्षा: बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल चेन और अंतरराष्ट्रीय स्कूल/यूनिवर्सिटीज महानगरों को अपनी प्राथमिकता में रखते हैं। जबलपुर ‘एजुकेशन और मेडिकल हब’ के रूप में और मजबूती से उभरेगा। आइटी कंपनियां, हेल्थकेयर, रिटेल और स्टार्टअप का प्रवेश होगा। शहर की सीमाएं बढ़ने से बाहरी इलाकों की जमीनों की कीमतें बढ़ेंगी और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश आएगा।
यह है मेट्रोपॉलिटन सिटी का दर्जा
तकनीकी तौर पर 10 लाख से अधिक की आबादी वाले क्षेत्रों ईको महानगर घोषित किया जाता है। इसके तहत शहर के आसपास के उप-नगरों और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर एक ‘मेट्रोपॉलिटन एरिया’ बनाया जाता है।
यूनिफाइड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी
महानगर बनने के बाद जबलपुर को एकीकृत परिवहन प्रणाली मिलेगी। इसमें मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की सम्भावनाओं को बल मिलेगा और सिटी बस सेवा का विस्तार उप-नगरों तक होगा।
फंडिंग में उछाल
महानगर का दर्जा मिलने से केंद्र सरकार की ‘अमृत’ और अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाले ग्रांट में भारी बढ़ोतरी होगी।
बेहतर हाउसिंग और टाउनशिप
जबलपुर विकास प्राधिकरण जेडीए को बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए अधिक शक्तियां और बजट मिलेगा। इससे सुनियोजित कॉलोनियां और हाई-राइज बिल्डिंग्स का रास्ता खुलेगा।
औद्योगिक और आइटी हब का विकास
डिफेंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में खमरिया, विजय नगर, कटंगी रोड जैसे क्षेत्रों में इंडस्ट्रीयल पार्क का विकास। मेट्रोपॉलिटन सिटी केवल शहरी विस्तार नहीं, बल्कि बहु-आयामी विकास मॉडल है। इससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी। पर्यावरण को संतुलित रखते हुए आर्थिक, सामाजिक विकास पर काम किया जा सकेगा। -महेशचंद्र चौधरी, सेवानिवृत्त अधिकारी, भारतीय प्रशासनिक सेवा।


