नई दिल्ली: मणिपुर में जारी हिंसा पर अमेरिका ने चिंता जाहिर की है। भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा है कि वहां के हालातों पर हमें कोई रणनीतिक चिंता नहीं है, हमें लोगों की चिंता है। अगर भारत मदद मांगता है तो हम उसके लिए तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि ये भारत का आंतरिक मसला है। हम जल्द से जल्द शांति की उम्मीद करते हैं। दरअसल, कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान एक पत्रकार ने अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी से मणिपुर पर सवाल पूछा था। इसके जवाब में गार्सेटी ने ये बातें कही। उन्होंने यह भी कहा कि मणिपुर के बच्चों और वहां मर रहे लोगों पर चिंता जाहिर करने के लिए किसी का भारतीय होना ही जरूरी नहीं है।
अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी के बयान पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि हमें पसंद नहीं है कि कोई दूसरा हमारे मामलों में दखलंदाजी करे। अमेरिका में गन से होने वाली हिंसा में कई लोग मारे जाते हैं। नस्लीय दंगे होते हैं। लेकिन हमने कभी उन्हें इस पर लेक्चर नहीं दिया। नए राजदूत को भारत-अमेरिका के रिश्तों के इतिहास की जानकारी रखनी चाहिए। मनीष तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को मणिपुर जाना चाहिए था। हम इस मुद्दे को संसद में भी उठाएंगे।
कोलकाता में पत्रकार के सवाल पर गार्सेटी ने ये भी कहा है कि भारत के नॉर्थ-ईस्ट में पिछले कुछ सालों में काफी तरक्की हुई है। शांति किसी भी इलाके के लिए काफी बेहतर चीजें लाती है। अगर मणिपुर में हिंसा खत्म होती है और शांति स्थापित होती है तो हम वहां निवेश करेंगे। हम नए प्रोजेक्टस भी लाने के लिए तैयार हैं। गार्सेटी ने लोकतंत्र पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र काफी मुश्किल है, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की हिफाजत करना काफी मुश्किल काम है।


