एजेंसी, नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इनकम टैक्स के नए नियमों की घोषणा कर दी है जो 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल और आम जनता की समझ के अनुकूल बनाना है। यह नया कानून पिछले 60 वर्षों से चले आ रहे 1961 के पुराने इनकम टैक्स एक्ट की जगह लेगा जिसे काफी पेचीदा माना जाता था।
नए टैक्स कानून में बड़े सुधार करते हुए धाराओं की संख्या को 819 से घटाकर मात्र 536 कर दिया गया है और अध्यायों की संख्या भी 47 से कम होकर 23 रह गई है। कानून की भाषा को आसान बनाने के लिए शब्दों के बोझ को भी कम किया गया है। टैक्स की गणना को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए पहली बार इसमें 39 टेबल और 40 फॉर्मूले शामिल किए गए हैं जिससे हिसाब-किताब लगाने में आसानी होगी।
KIND ATTENTION TAXPAYERS!
Income-tax Rules, 2026 have been notified and published in the e-Gazette.
The notification may be accessed on: https://t.co/ALbKiEUHut@nsitharamanoffc @officeofPCM @FinMinIndia @PIB_India pic.twitter.com/hjwVO5K21M— Income Tax India (@IncomeTaxIndia) March 20, 2026
मकान किराया भत्ता यानी एचआरए को लेकर नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत बरकरार रखी गई है लेकिन इसके नियमों को पहले से अधिक सख्त बना दिया गया है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे महानगरों में रहने वाले कर्मचारी अपने वेतन का 50 प्रतिशत तक एचआरए छूट के रूप में ले सकेंगे जबकि अन्य शहरों के लिए यह सीमा 40 प्रतिशत तय की गई है। अब इस छूट का लाभ उठाने के लिए मकान मालिक और किरायेदार के संबंधों की पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा। सरकार का मकसद फर्जी तरीके से किराया दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिशों पर लगाम लगाना और सिस्टम को साफ-सुथरा बनाना है।
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नए नियमों के अंतर्गत शेयर बाजार, कैपिटल गेन और विदेश से होने वाली कमाई पर निगरानी और कड़ी कर दी गई है। सरकार ने 150 से अधिक नए फॉर्म पेश किए हैं ताकि जानकारी देना सरल हो जाए लेकिन किसी भी तथ्य को छिपाना मुश्किल होगा। कंपनियों और ऑडिटर्स की जवाबदेही भी बढ़ा दी गई है। यदि पैन कार्ड या किसी अन्य जानकारी में गड़बड़ी पाई जाती है तो सख्त जांच की जाएगी। विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट लेने की प्रक्रिया में भी अब अधिक सावधानी बरतनी होगी। कुल मिलाकर सरकार ने एक तरफ टैक्स की प्रक्रिया को आसान बनाया है तो दूसरी तरफ टैक्स चोरी रोकने के लिए सख्ती भी बढ़ा दी है।


