एजेंसी, कोलकाता/नई दिल्ली। बंगाल अधिकारी तबादला : पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी तनातनी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने चुनावी राज्य में 1,000 से अधिक प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने भविष्य के लिए इस कानूनी सवाल को खुला रखा है कि क्या चुनाव आयोग को प्रशासनिक बदलाव करने से पहले संबंधित राज्य सरकार से सलाह लेनी चाहिए।
अखिल भारतीय सेवाओं की स्थिति पर अदालत की चिंता
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि जिस उद्देश्य के लिए अखिल भारतीय सेवाओं का गठन किया गया था, वह विफल हो रहा है। सीजेआई ने इस बात पर भी जोर दिया कि पक्षों के बीच विश्वास की कमी के कारण मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करनी पड़ी।
1,100 अधिकारियों का रातोंरात हुआ था तबादला
याचिका की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि इतिहास में पहली बार किसी राज्य के मुख्य सचिव का इस तरह से तबादला किया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही लगभग 1,100 अधिकारियों को रातोंरात स्थानांतरित कर दिया गया, जो प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित करता है।
यौन शोषण के आरोपी सॉफ्टवेयर कंपनी मालिक को अग्रिम जमानत
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक को अग्रिम जमानत दे दी है। आरोपी पर अपनी एक महिला कर्मचारी का यौन उत्पीड़न करने और उसे व उसके पति को झूठे आपराधिक मामले में फंसाने की साजिश रचने का आरोप है।
सुप्रीम कोर्ट ने दी आरोपी को राहत
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कोच्चि में सॉफ्टवेयर कंपनी चलाने वाले 50 वर्षीय वेणु गोपालकृष्णन को जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया है। पीठ ने हाई कोर्ट के पुराने आदेश को रद्द करते हुए कहा कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी राहत का हकदार है। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि आरोपी अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग न करे और गवाहों या सबूतों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ न करे।
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