एजेंसी, न्यूयॉर्क/वाशिंगटन। अमेरिका की एक वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सांसद ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत संबंधी नीतियां रणनीतिक भरोसे और पारस्परिक समझ पर “गंभीर और दीर्घकालिक असर” डाल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि वॉशिंगटन को भारत-अमेरिका संबंधों में आ रहे तनाव को कम करने के लिए “असाधारण तत्परता” के साथ कदम उठाने होंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और अमेरिका-भारत साझेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कैलिफॉर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद सिंडी कमलागर-डोव ने कहा कि “…अगर ट्रंप अपनी नीति में मूलभूत बदलाव नहीं करते, तो वह ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति साबित होंगे जिन्होंने भारत के साथ दशकों में विकसित हुए विश्वास को कमजोर कर दिया। और साफ शब्दों में कहा जाए तो उन्होंने भारत को दूर कर दिया जबकि रूसी प्रभाव को मजबूत किया।” उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने ट्रांसअटलांटिक गठबंधन को कमजोर किया है और लातिन अमेरिका को जोखिम में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि यह किसी भी राष्ट्रपति की ऐसी विरासत नहीं होनी चाहिए, जिस पर उसे गर्व हो। सांसद ने कहा, “जब इतिहास में लिखा जाएगा कि भारत के प्रति ट्रंप की नाराजगी आखिर शुरू कहां से हुई, तो यह साफ होगा कि इसका अमेरिकी दीर्घकालिक रणनीतिक हितों से कोई लेना-देना नहीं है।
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यह जुड़ा है उनके नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर व्यक्तिगत जुनून से। यह भले ही सुनने में अजीब लगे, लेकिन इसके जो नकारात्मक प्रभाव सामने आएंगे, उन्हें कम आंकना बड़ी भूल होगी।” ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए क्योंकि उनके नेतृत्व में दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष खत्म हुए हैं, जिसमें मई में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम होना भी शामिल है। यह बयान भारत-अमेरिका कूटनीति के महत्वपूर्ण समय पर आया है, जब दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है। कमलागर-डोव संसद की दक्षिण एवं मध्य एशिया विदेश मामलों की उप-समिति की बैठक में ‘यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप : फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा’ विषय पर बोल रही थीं। अपने संबोधन में उन्होंने ट्रंप की नीतियों की आलोचना की, जिसमें भारत पर दुनिया का सबसे अधिक 50 प्रतिशत शुल्क लगाने और एच1बी वीज़ा पर 100,000 अमेरिकी डॉलर शुल्क लगाने जैसी बातें शामिल हैं। बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर अमेरिका में कार्यरत हैं और एच1बी वीज़ा उनका प्रमुख साधन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रंप की नीतियों से भारत-अमेरिका संबंधों को “गंभीर और स्थायी नुकसान” हो रहा है और इसे कम करने के लिए अमेरिका को “अविश्वसनीय तत्परता” के साथ रणनीतिक कदम उठाने होंगे।


